
खड़गपुर, 03 मार्च (हि. स.)। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), खड़गपुर ने मंगलवार ज्योति चटर्जी स्कूल ऑफ डिजिटल इंजीनियरिंग, अनुप्रयुक्त आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग का शुभारंभ किया। यह देश का पहला ऐसा क्षैतिज, शोध-आधारित अनुप्रयुक्त एआई केंद्र है, जिसका उद्देश्य एआई नवाचार को केवल शोध तक सीमित न रखकर उसे व्यावहारिक उपयोग और उद्योग के साथ जोड़ना है।
स्कूल को पूर्णतः क्षैतिज संरचना में बनाया गया है, जो सभी शैक्षणिक और औद्योगिक क्षेत्रों में काम करेगा। यह डीन (अनुसंधान एवं विकास) कार्यालय के अधीन संचालित होगा और इसका फोकस उच्च प्रभाव वाले अनुवादात्मक तकनीकी मॉडल पर होगा। इसके केंद्र में उद्योग और शिक्षा का घनिष्ठ सहयोग होगा।
इस पहल को डॉ. ज्योति चटर्जी (बीटेक 1977, आईआईटी खड़गपुर) के योगदान से सशक्त किया गया है। उन्होंने आईआईटी खड़गपुर फाऊंडेशन यूएसए के माध्यम से पांच वर्षों में अधिकतम पांच मिलियन अमेरिकी डॉलर देने की प्रतिबद्धता जताई है। इस परोपकारी योगदान से स्कूल के सतत नवाचार और उच्च-स्तरीय अनुसंधान को मजबूती मिलेगी।
यह स्कूल पारंपरिक एआई विभागों से अलग, बहुविषयी और नवाचार-उन्मुख पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में कार्य करेगा। इसमें डिजिटल इंजीनियरिंग, अगली पीढ़ी की कंप्यूटिंग, मशीन लर्निंग, डीप न्यूरल सिस्टम्स, आईओटी, स्मार्ट सेंसिंग, साइबर-फिजिकल सिस्टम, रोबोटिक्स, बड़े डेटा इंजीनियरिंग, क्लाउड अवसंरचना और डिजिटल स्वास्थ्य एवं बायोमेडिकल एआई शामिल हैं।
स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में इसका समन्वय स्कूल ऑफ मेडिकल साइंस एंड टेक्नोलॉजी, कॉमन रिसर्च एंड टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट हब ऑन हेल्थकेयर और डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के क्लिनिकल इकोसिस्टम से होगा, जिससे प्रयोगशाला से लेकर वास्तविक क्षेत्रीय तैनाती तक एआई प्रणालियों का परीक्षण संभव होगा।
डीन (आर एंड डी) के नेतृत्व में स्कूल उद्योग-आधारित प्रयोगशालाएं और एआई टेस्टबेड स्थापित करेगा, उद्योग और सरकार के साथ सह-विकास मंच विकसित करेगा, पायलट स्तर पर अनुसंधान और अनुवादात्मक परियोजनाओं को गति देगा और तकनीकी परिपक्वता व व्यावसायीकरण को बढ़ावा देगा। यह कार्यबल विकास पहलों के माध्यम से वैश्विक मानकों के अनुरूप नई क्षमताएं भी तैयार करेगा।
आईआईटी खड़गपुर के निदेशक प्रो. सुमन चक्रवर्ती ने कहा कि ज्योति चटर्जी स्कूल उद्योग, शिक्षाविदों और सरकार के बीच ऐसा मंच होगा, जहां भारत और विश्व के लिए संप्रभु एआई समाधानों का निर्माण किया जाएगा। यह संरचना अनुसंधान से उत्पाद और राष्ट्रीय क्षमता तक की यात्रा को साकार करने में मदद करेगी।
इस परोपकारी ढांचे के तहत पांच वर्षों में अधिकतम पांच मिलियन अमेरिकी डॉलर तक का वित्तीय सहयोग सुनिश्चित किया गया है। दीर्घकालिक स्थिरता के लिए एंडोमेंट्स, प्रायोजित अनुसंधान, उद्योग साझेदारियां, कार्यकारी शिक्षा और नवाचार-आधारित राजस्व स्रोतों को प्राथमिकता दी जाएगी।
इस शुभारंभ के साथ आईआईटी खड़गपुर ने राष्ट्रीय स्तर पर एकीकृत, उद्योग-केंद्रित और अनुवादात्मक एआई पारिस्थितिकी तंत्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है, जो भारत में डिजिटल इंजीनियरिंग और अनुप्रयुक्त एआई के लिए नया मानक स्थापित करेगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता