भारत–यूरोपीय संघ के संसदीय मैत्री समूह से द्विपक्षीय संबंधों को मिलेगी नई ऊर्जा: अनुराग सिंह ठाकुर

युगवार्ता    30-Mar-2026
Total Views |
संसद भवन में आयोजित  संसदीय मैत्री समूह की पहली  बैठक में अनुराग ठाकुर


नई दिल्ली, 30 मार्च (हि.स.)। भारत–यूरोपीय संघ संबंधों पर हाल ही में गठित संसदीय मैत्री समूह की पहली बैठक सोमवार को संसद भवन में आयोजित हुई। इस बैठक में यूरोपीय संसद के भारत संबंधी प्रतिनिधिमंडल ने भाग लिया, जिसका नेतृत्व चेयरपर्सन एंजेलिका नीब्लर (जर्मनी, ईपीपी समूह) तथा उपाध्यक्ष नील्स फ्लेमिंग ने किया।

भारतीय पक्ष से सांसद अनुराग सिंह ठाकुर की अध्यक्षता में गठित संसदीय मैत्री समूह के 11 सदस्यों ने सहभागिता की। यह बैठक नवगठित मैत्री समूह के अंतर्गत पहली औपचारिक संसदीय सहभागिता रही, जो भारत और यूरोपीय संघ के बीच संस्थागत संबंधों की गहराई को दर्शाती है। बैठक जनवरी 2026 में आयोजित भारत–ईयू शिखर सम्मेलन की भावना तथा उसके बाद द्विपक्षीय संबंधों में हुए व्यापक उन्नयन के संदर्भ में आयोजित की गई।

अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि यह भारत की संसदीय कूटनीति के लिए गर्व का क्षण है। इस मैत्री समूह का गठन और यूरोपीय साझेदारों के साथ यह पहली बैठक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के सतत मार्गदर्शन का परिणाम है।

उन्होंने मीडिया को जारी एक विज्ञप्ति में बताया कि

भारत–ईयू अंतर-संसदीय बैठक के 16वें संस्करण के दौरान आयोजित इस बैठक में द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं पर व्यापक चर्चा हुई। व्यापार एवं आर्थिक संबंधों के तहत भारत–ईयू मुक्त व्यापार समझौते पर हुई ऐतिहासिक प्रगति का स्वागत किया गया, जिसे लगभग 25 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर के संयुक्त बाजार और करीब दो अरब लोगों को कवर करने वाली विश्व की प्रमुख आर्थिक साझेदारियों में से एक बताया गया। भारतीय पक्ष ने इस समझौते के अनुमोदन के लिए यूरोपीय संसद से पूर्ण समर्थन का आग्रह किया।

उन्होंने बताया कि उभरती प्रौद्योगिकी एवं नवाचार के क्षेत्र में दोनों पक्षों ने भारत–ईयू ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल की प्रगति की समीक्षा की, जिसमें 6जी, उत्तरदायी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया।

हरित संक्रमण के क्षेत्र में भारत द्वारा अपनी स्थापित विद्युत क्षमता का 50 प्रतिशत गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से प्राप्त करने की उपलब्धि, जो निर्धारित समय से पांच वर्ष पहले हासिल की गई, को रेखांकित किया गया। भारत–ईयू स्वच्छ ऊर्जा एवं जलवायु साझेदारी तथा ग्रीन हाइड्रोजन पर गठित टास्क फोर्स का भी स्वागत किया गया। जन-से-जन संबंधों के तहत यूरोप में भारतीय पेशेवरों, विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं की बढ़ती भागीदारी पर चर्चा हुई तथा गतिशीलता सहयोग के व्यापक ढांचे का स्वागत किया गया। साथ ही भारत में यूरोपीय विश्वविद्यालयों के परिसर स्थापित करने की संभावनाओं पर भी विचार किया गया।

बैठक में पश्चिम एशिया की स्थिति और यूक्रेन के मुद्दे सहित क्षेत्रीय एवं वैश्विक विषयों पर भी चर्चा हुई।

यूरोपीय संसद की ओर से एंजेलिका नीब्लर ने इस बैठक को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि दोनों लोकतंत्रों के बीच दीर्घकालिक संबंध हैं और यह मंच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने में सहायक सिद्ध होगा।

बैठक में भारत की ओर से सांसद तेनेटी कृष्णप्रसाद, राधा मोहन सिंह, हर्षवर्धन श्रृंगला, देवेश शाक्य सहित अन्य सदस्य तथा विदेश मंत्रालय के अधिकारी उपस्थित रहे। यूरोपीय संसद की ओर से डी आईएन प्रतिनिधिमंडल के 12 सदस्यों ने भाग लिया। दोनों पक्षों ने इस सार्थक संवाद पर संतोष व्यक्त करते हुए नियमित अंतर-संसदीय बैठकों के आयोजन और संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई। अगली अंतर-संसदीय बैठक यूरोप में आयोजित होने की संभावना है।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी

Tags