
नई दिल्ली, 30 मार्च (हि.स.)। इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र (आईजीएनसीए) के अध्यक्ष रामबहादुर राय ने कहा कि गीता लोकतंत्र का सार है।
राय ने यह बात आज दिल्ली स्थित आईजीएनसीए के कलानिधि विभाग की ओर से आयोजित ‘प्रो. देवेंद्र स्वरूप स्मृति व्याख्यान’ कार्यक्रम में कही। इसका विषय “भारतीय ज्ञान परम्परा : सनातनता और विश्व कल्याण” पर आधारित था।
उल्लेखनीय है कि यह प्रो. देवेंद्र स्वरूप का जन्मशताब्दी वर्ष है। इस अवसर पर प्रो. देवेंद्र स्वरूप की 36 अप्रकाशित डायरियों पर आधारित पुस्तक “भारत की ज्ञान यात्रा” के पोस्टर का भी लोकार्पण किया गया।
इस कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए राय ने कहा, श्रीमद्भगवद्गीता की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि श्रीकृष्ण ने अर्जुन के किसी भी प्रश्न को नकारा नहीं। उन्होंने कभी अर्जुन को 'मूर्ख' नहीं कहा बल्कि उन्हें प्रश्न पूछने के लिए प्रोत्साहित किया। यही संवाद और तर्कशीलता गीता को लोकतंत्र का असली सार बनाती है। आज भारतीय ज्ञान परंपरा के 'नारा' बन जाने का डर है जबकि यह एक लंबी साधना है। इस साधना को समझने में प्रो. देवेंद्र स्वरूप की डायरी पर आधारित पुस्तक ‘भारत की ज्ञान यात्रा’ के तीनों खंड बेहद मददगार होंगे। हमारी कोशिश है कि ये पुस्तकें जल्द ही आपके बीच हों।
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के राजनीति विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो. संजीव कुमार शर्मा ने भारतीय ज्ञान परंपरा की निरंतरता, उसकी वैश्विक प्रासंगिकता तथा वर्तमान संदर्भों में उसके महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने यक्ष-युधिष्ठिर संवाद, यम-नचिकेता संवाद और गीता में कृष्ण-अर्जुन संवाद का उद्धरण देते हुए कहा कि प्रश्न करना आदिकाल से भारत की परम्परा रही है। भारत में कोई भी ज्ञान अंतिम नहीं है। भारत की परम्परा ने अभ्युदय को जान लिया लेकिन यह भी अंतिम नहीं है। सबको साथ में लेकर चलने का भाव भारतीय परम्परा के मूल में है। परम्परा मूल रूप से भेदभाव रहित है वह समावेशी है। इस पृथ्वी पर रहने वाले सभी मेरे अपने है ये भारत का विचार है। संस्कृत के सारे नाटक इस भरत वाक्य से भरे हैं कि सबका कल्याण हो।
आईजीएनसीए के डीन एवं कलानिधि विभाग के प्रमुख प्रो. (डॉ.) रमेश चन्द्र गौड़ ने कहा कि प्रो. देवेंद्र स्वरूप का चिंतन भारतीय बौद्धिक परम्परा को समझने और उसे समकालीन विमर्श से जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है।
कार्यक्रम में विद्वानों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता रही।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी