‘नाइट ऑफ ऑनर्स’ में शामिल हुए दिल्ली के उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री

युगवार्ता    30-Mar-2026
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भारत मंडपम  में इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल दिल्ली में आयोजित नाईट आफ आनर में शामिल होते दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता


नई दिल्ली, 30 मार्च (हि.स.)। इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल, दिल्ली (आईएफएफडी) के रूप में राजधानी ने सिनेमा, संस्कृति और रचनात्मक ऊर्जा का एक भव्य संगम देखा। भारत मंडपम में आयोजित ‘नाइट ऑफ ऑनर्स’ समारोह में दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भाग लेकर इस वैश्विक आयोजन की गरिमा को और बढ़ाया। इस विशेष अवसर पर दिल्ली के पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा भी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में फिल्म निर्देशक राकेश ओमप्रकाश मेहरा, अभिनेता अनुपम खेर, अभिनेत्री भूमि पेडनेकर, दिव्या दत्ता, अर्जन बाजवा सहित देश-विदेश की अनेक प्रतिष्ठित फ़िल्म हस्तियां उपस्थित रहीं। निर्माता-निर्देशक रमेश सिप्पी को शोले के 50 वर्ष पूरे होने पर सम्मानित किया गया।

समारोह में विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और सम्मान समारोहों ने पूरे वातावरण को उत्सवमय बना दिया। अभिनेता अनुपम खेर की काव्यात्मक प्रस्तुति और ग्रैमी विजेता संगीतकार रिकी केज के संगीत ने कार्यक्रम को भावनात्मक ऊंचाई प्रदान की।

इस अवसर पर उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने कहा कि इस फिल्म महोत्सव का आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं है, यह दिल्ली और भारत को क्रिएटिव इकोनॉमी का वैश्विक केंद्र बनाने की एक दृष्टि है। उन्होंने कहा कि भारतीय मिट्टी में जन्मी कहानी दूर देशों के दिलों को छू सकती है और ऐसे मंच उन कहानियों को दुनिया तक पहुंचाने का सेतु बनते हैं। दिल्ली की भूमिका यहां और भी विशेष है।

उन्होंने फिल्मकारों से कहा कि आप सिर्फ रचनाकार नहीं, आप सांस्कृतिक दूत हैं। सिनेमा केवल फ्रेम्स और स्क्रिप्ट्स नहीं, यह साहस है, दृष्टिकोण है, और सच्चाई है। उन्होंने कहा कि आज जिनको सम्मान मिल रहा है आप सभी को हार्दिक बधाई और जिन्हें नहीं मिला, याद रखिए, हर वह कहानी जो दर्शकों तक पहुंची, वह अपने आप में एक असाधारण उपलब्धि है।

उपराज्यपाल ने कहा कि यह एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक आंदोलन की नींव रखी है, जो दिल्ली के सांस्कृतिक भविष्य को दिशा देगा और भारत को वैश्विक रचनात्मक मानचित्र पर और सशक्त बनाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा, “दिल्ली देश का हृदय है, एक ऐसा शहर जो इतिहास और आशाओं दोनों को अपने भीतर समेटे हुए है। यह फिल्म महोत्सव केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि राजधानी की नई सांस्कृतिक पहचान को आकार देने का माध्यम है। सिनेमा में लोगों को जोड़ने, प्रेरित करने और सपनों को साकार करने की अद्भुत शक्ति है। यह मंच नए कलाकारों, फिल्म निर्माताओं और विशेष रूप से महिलाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर देगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आईएफएफडी दिल्ली को एक वैश्विक सांस्कृतिक और सिनेमाई केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने इस आयोजन को “ऑरेंज इकोनॉमी” और रचनात्मक उद्योगों को बढ़ावा देने की दिशा में एक सशक्त पहल बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह महोत्सव केवल सिनेमा का उत्सव नहीं, बल्कि संवाद, नवाचार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का एक जीवंत मंच है, जो दिल्ली को वैश्विक रचनात्मक केंद्र के रूप में स्थापित करेगा।

पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने कहा कि हमारा लक्ष्य सिर्फ एक फिल्म फेस्टिवल आयोजित करना नहीं है, बल्कि दिल्ली को क्रिएटिविटी, इनोवेशन और सिनेमा के एक वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करना और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना है।

उन्होंने बताया कि आईएफएफडी में 6 फ़िल्म प्रोजेक्ट्स को शॉर्टलिस्ट किया गया, और मुझे गर्व है यह कहते हुए कि इस फेस्टिवल से निकलने वाली 3 फिल्में आने वाले समय में पूरे देश में देखी जाएंगी।

कपिल मिश्रा ने कहा कि फ़िल्म परिदृश्य बदला है। देशभक्ति और देश सेवा से जुड़ी फिल्मों की लोकप्रियता नई पीढ़ी में बढ़ रही है। देश की सुरक्षा और सेवा करने वाले नायकों को फिल्मों में जगह मिल रही है।

कपिल मिश्रा ने फ़िल्म जगत से जुड़े सभी लोगों से आग्रह किया कि देश में 100 करोड़ कमाने वाली फिल्में बनाने के साथ 100 करोड़ लोगों को जगाने वाली फिल्में भी बनाते रहें।

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हिन्दुस्थान समाचार / धीरेन्द्र यादव

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