युद्ध लंबा चला ताे तेल 150 डाॅलर प्रति बैरल तक पहुंच सकता है : कतर के ऊर्जा मंत्री

युगवार्ता    06-Mar-2026
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अबू धाबी, 06 मार्च (हि.स.)। कतर के ऊर्जा मंत्री साद अल-काबी ने कहा है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। अगर यह संघर्ष जारी रहा तो तेल की कीमतें 150 डाॅलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। लगातार लड़ाई के कारण खाड़ी के ऊर्जा निर्यातकों को कुछ ही हफ्तों में उत्पादन रोकना पड़ सकता है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है।

इजरायली टीवी चैनल आई24 की एक रिपोर्ट के मुताबिक अबू धाबी इंटरनेशनल पेट्रोलियम एग्जीबिशन एंड कॉन्फ्रेंस के उद्घाटन सत्र में कतर के ऊर्जा मंत्री साद अल-काबी ने कहा, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष वैश्विक ऊर्जा बाजार को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है और कच्चे तेल की कीमतें 150 डाॅलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं। अगर क्षेत्र में लड़ाई जारी रहती है तो खाड़ी के ऊर्जा निर्यातकों को कुछ ही हफ्तों में उत्पादन रोकना पड़ सकता है, जिससे दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर बड़ा असर पड़ेगा।

इस अवसर पर संयुक्त अरब अमीरात के ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर मंत्री सुहैल अल-मजरूई और मिस्र के पेट्रोलियम एवं मिनरल रिसोर्स मिनिस्टर करीम बदावी भी माैजूद थे। काबी ने यह भी चेतावनी दी कि यह संघर्ष दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं को नीचे ला सकता है। उनके मुताबिक क्षेत्र में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति के कारण खाड़ी के ऊर्जा निर्यातक जल्द ही अपने अंतरराष्ट्रीय कॉन्ट्रैक्ट्स की आपूर्ति पूरी करने में असमर्थ हो सकते हैं।

यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब रास लफ़्फ़ान इंडस्ट्रियल सिटी कतर में सबसे बड़ी लिक्विफाइड नेचुरल गैस फैसिलिटी को ईरान ने ड्रोन हमला कर निशाना बनाया था। इस हमले के बाद कतर को ‘अप्रत्याशित घटना’ घोषित करना पड़ा, जिसके कारण वह अस्थायी रूप से कुछ गैस वितरण अनुबंध को पूरा नहीं कर पा रहा है। कतर वर्तमान में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एलएनजी उत्पादक है।

काबी ने कहा कि भले ही युद्ध तुरंत समाप्त हो जाए, लेकिन इस व्यवधान के बाद कतर को गैस आपूर्ति को सामान्य करने में “कई हफ्तों से लेकर महीनों” तक का समय लग सकता है। इस हमले ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में महत्वपूर्ण ऊर्जा अवसंरचना की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। क्षेत्र ईरान, इजराइल और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण ऊर्जा आपूर्ति पर खतरा मंडरा रहा है।

काबी के अनुसार, अन्य खाड़ी निर्यातकों को भी जल्द इसी तरह की रुकावटों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, कतर अपनी गैस का अपेक्षाकृत कम हिस्सा यूरोप को निर्यात करता है, लेकिन काबी ने चेतावनी दी कि अगर खाड़ी से गैस आपूर्ति घटती है तो एशियाई खरीदार उपलब्ध गैस के लिए यूरोपीय ग्राहकों से ज्यादा कीमत देने को तैयार हो सकते हैं। इससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में और अधिक दबाव बढ़ सकता है।

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हिन्दुस्थान समाचार / अमरेश द्विवेदी

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