
बेंगलुरु, 06 मार्च (हि.स.)। कर्नाटक राज्य के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने केंद्र सरकार के महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) को समाप्त कर वीबी-जी-राम-जी योजना लागू किए जाने को अधिकार आधारित रोजगार व्यवस्था को कमजोर करने वाला कदम बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कदम महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज की परिकल्पना के भी विपरीत है।
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया शुक्रवार को विधानसभा में राज्य का बजट पेश कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि नई योजना के लागू होने से ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में कई प्रकार की समस्याएं उत्पन्न होने की आशंका है। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था के तहत मांग आधारित रोजगार गारंटी प्रणाली से हटकर केंद्र ने निर्धारित रोजगार आवंटन प्रणाली लागू होने की आशंका है। इससे ग्रामीण श्रमिकों की रोजगार सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कदम संविधान के 73वें संशोधन की मूल भावना के भी विरुद्ध है और इससे पंचायतों के निर्णय लेने के अधिकार पर असर पड़ने की आशंका है। योजना के निर्माण और क्रियान्वयन में केंद्रीकरण बढ़ने की संभावना भी उन्होंने जताई। सिद्धारमैया के अनुसार, यदि अप्रत्यक्ष रूप से ठेकेदारों की भागीदारी की व्यवस्था की जाती है तो इससे ग्रामीण मजदूरों के लिए प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर कम हो सकते हैं। इसके अलावा केंद्र के प्रशासनिक और नियामक नियंत्रणों के कारण कार्यों के समय पर क्रियान्वयन में भी बाधा आ सकती है।
इस संदर्भ में राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से ग्राम पंचायतों को सशक्त बनाते हुए ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने वाली पूर्व व्यवस्था को पुनः बहाल करने की मांग की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा और विकेंद्रीकृत शासन व्यवस्था के सिद्धांतों को बनाए रखने के लिए आवश्यक होने पर कानूनी लड़ाई सहित सभी कदम उठाने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है।
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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश महादेवप्पा