
नई दिल्ली, 01 अप्रैल (हि.स.)। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को कहा कि भारतीय रेल ने 2025-26 में 741 करोड़ यात्रियों को यात्रा कराकर और 1670 मिलियन टन माल ढुलाई कर नया रिकॉर्ड बनाया है, जो रेल नेटवर्क की बढ़ती क्षमता और देश की अर्थव्यवस्था में उसकी अहम भूमिका को दर्शाता है।
वैष्णव ने लोकसभा में बताया कि 2025-26 में भारतीय रेल ने 741 करोड़ यात्रियों को यात्रा कराई, जो 2024-25 के 716 करोड़ यात्रियों की तुलना में 3.54 प्रतिशत अधिक है। इसके साथ ही यात्री राजस्व में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2024-25 में जहां यह 75,500 करोड़ रुपये था, वहीं 2025-26 में बढ़कर लगभग 80,000 करोड़ रुपये हो गया, जो 5.96 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में रेलवे को मिले रिकॉर्ड बजट आवंटन और पिछले एक दशक में किए गए भारी निवेश का सीधा लाभ अब दिख रहा है। रेलवे गरीबों और मध्यम वर्ग की सवारी है और पिछले 10 वर्षों में हुए निवेश का फायदा समाज के हर वर्ग को मिला है।
माल ढुलाई के क्षेत्र में भी रेलवे ने नया रिकॉर्ड बनाया है। वैष्णव ने बताया कि 2025-26 में भारतीय रेल ने 1670 मिलियन टन (एमटी) माल का परिवहन किया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 3.25 प्रतिशत अधिक है। इसके साथ ही वैगनों की संख्या में 4.56 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 2,79,12,271 से बढ़कर 2,91,86,475 हो गई।
उन्होंने कहा कि यह वृद्धि दर्शाती है कि रेलवे देश में किफायती, विश्वसनीय और कुशल लॉजिस्टिक्स माध्यम के रूप में तेजी से उभर रहा है।
माल ढुलाई में वृद्धि के प्रमुख कारणों का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि उर्वरक तथा ‘पिग आयरन और तैयार स्टील’ क्षेत्रों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उर्वरक परिवहन में 13.49 प्रतिशत और पिग आयरन एवं स्टील में 13.11 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो कृषि और औद्योगिक गतिविधियों में तेजी का संकेत है।
बुनियादी ढांचा क्षेत्र से जुड़े उत्पादों ने भी इस वृद्धि को मजबूती दी। लौह अयस्क का परिवहन 6.74 प्रतिशत बढ़कर 190.12 मिलियन टन हो गया, जबकि सीमेंट ढुलाई में 4.74 प्रतिशत की वृद्धि के साथ यह 157.17 मिलियन टन तक पहुंच गया। इससे देश में निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की रफ्तार का संकेत मिलता है।
राजस्व के मोर्चे पर भी रेलवे ने अच्छा प्रदर्शन किया है। माल ढुलाई से आय 2025-26 में बढ़कर लगभग 1,77,754 करोड़ रुपये हो गई, जो पिछले वर्ष के 1,75,302 करोड़ रुपये की तुलना में 1.44 प्रतिशत अधिक है। आय के प्रमुख स्रोतों में लौह अयस्क, सीमेंट, पिग आयरन एवं स्टील, उर्वरक, खाद्यान्न और खनिज तेल शामिल रहे।
क्षेत्रवार प्रदर्शन में भी संतुलित वृद्धि दर्ज की गई। दक्षिण पश्चिम रेलवे ने 14.89 प्रतिशत की वृद्धि के साथ सबसे बेहतर प्रदर्शन किया। इसके अलावा उत्तर मध्य रेलवे (12.62 प्रतिशत), पूर्वी तट रेलवे (10.42 प्रतिशत) और पश्चिम मध्य रेलवे (10.06 प्रतिशत) ने भी दो अंकों की वृद्धि दर्ज की।
अन्य जोनों में भी सकारात्मक वृद्धि देखने को मिली, जिनमें पूर्वी रेलवे (0.78 प्रतिशत), पूर्व मध्य रेलवे (0.39 प्रतिशत), उत्तर पूर्वी रेलवे (0.25 प्रतिशत), पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (6.75 प्रतिशत), उत्तर पश्चिम रेलवे (5.17 प्रतिशत), दक्षिण मध्य रेलवे (2.59 प्रतिशत), दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (3.18 प्रतिशत), दक्षिण रेलवे (1.10 प्रतिशत) और पश्चिम रेलवे (3.57 प्रतिशत) शामिल हैं।
वैष्णव ने कहा कि यह व्यापक वृद्धि देशभर में रेलवे की माल ढुलाई क्षमता में सुधार और क्षेत्रीय संतुलित विकास को दर्शाती है।
संचालन के स्तर पर भी रेलवे ने महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने बताया कि बीते वित्त वर्ष में 76,352 विशेष ट्रेनें चलाई गईं, जबकि वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 25,000 ट्रेनें नेटवर्क पर संचालित हो रही हैं।
सुरक्षा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। मंत्री ने कहा कि पिछले 50 वर्षों में इस वर्ष सबसे कम केवल 16 गंभीर रेल दुर्घटनाएं दर्ज की गईं, जो एक बड़ी उपलब्धि है।
निर्माण क्षमता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि 2025-26 में 1,914 लोकोमोटिव का निर्माण किया गया, जो कई देशों की कुल उत्पादन क्षमता से अधिक है।
वैष्णव ने कहा कि भारतीय रेल देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ के रूप में कार्य कर रही है। यह न केवल सस्ती और विश्वसनीय यात्री सेवाएं प्रदान कर रही है, बल्कि लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने, सड़कों पर दबाव घटाने और पर्यावरण अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
उन्होंने कहा कि यात्री और माल ढुलाई दोनों क्षेत्रों में लगातार वृद्धि यह दर्शाती है कि भारतीय रेल की क्षमता, दक्षता और विश्वसनीयता में लगातार सुधार हो रहा है, जो देश के समग्र आर्थिक विकास को गति देने में सहायक है।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार