जर्मनी में लुफ्थांसा एयरलाइन के केबिन क्रू की हड़ताल से 980 उड़ानें रद्द

युगवार्ता    10-Apr-2026
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लुफ्थांसा एयरलाइन (फाइल फाेटाे)


बर्लिन, 10 अप्रैल (हि.स.)। जर्मनी की प्रमुख एयरलाइन लुफ्थांसा के केबिन क्रू की एक दिवसीय हड़ताल से शुक्रवार को हवाई सेवाएं व्यापक रूप से प्रभावित हुईं। देश के व्यस्ततम फ्रैंकफर्ट और म्यूनिख के हवाई अड्डे पर आने और जाने वाली 980 उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। इसके कारण 90 हजार से ज्यादा यात्री प्रभावित हुए।

तुर्किए की सरकारी संवाद समिति अनाडाेलू एजेंसी के अनुसार शुक्रवार काे लुफ्थांसा के केबिन क्रू की हड़ताल के कारण जर्मनी के सबसे व्यस्त हवाई अड्डों पर बड़े पैमाने पर उड़ानें रद्द हो गईं, जिससे 90 हजार से ज़्यादा यात्री प्रभावित हुए। इसके अलावा फ्रैंकफर्ट हवाई अड्डे पर निर्धारित लगभग 1,350 आने और जाने वाली उड़ानों में से लगभग 580 रद्द करनी पड़ीं। दूसरे सबसे प्रमुख हवाई अड्डा म्यूनिख पर करीब 400 उड़ानें प्रभावित हुईं।

इंडिपेंडेंट फ़्लाइट अटेंडेंट्स ऑर्गनाइज़ेशन (आईएफएओ) द्वारा आहूत यह एक दिवसीय हड़ताल गुरुवार आधी रात के कुछ समय बाद से शुरू होकर स्थानीय समय अनुसार रात 10 बजे तक चली। लुफ्थांसा की क्षेत्रीय सहायक कंपनी सिटीलाइन के केबिन क्रू भी जर्मनी के नौ हवाई अड्डों पर इस हड़ताल में शामिल हुए।

आईएफएओ के अध्यक्ष जोआचिम वाजक्वेज बर्गर ने लुफ्थांसा पर बातचीत के योग्य प्रस्ताव पेश करने में विफल रहने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह बाधा टाली जा सकती थी। यूनियन ने ईस्टर यात्रा के व्यस्त दिनों के दौरान कोई कार्रवाई करने से परहेज किया था, लेकिन चेतावनी दी कि शुक्रवार की हड़ताल छुट्टियों के अंत में घर लौट रहे यात्रियों को अभी भी प्रभावित कर सकती है।

लुफ्थांसा ने यात्रियों से हवाई अड्डे के लिए निकलने से पहले अपनी उड़ान की स्थिति की जांच करने का आग्रह किया और कहा कि वह प्रभावित यात्रियों को स्वचालित रूप से सूचित कर रहा है। एयरलाइन ने एक आपातकालीन योजना लागू की, जिसमें सहायक कंपनियों द्वारा अतिरिक्त उड़ानें और कुछ मार्गों पर बड़े विमानों का उपयोग शामिल था।

शुक्रवार की यह कार्रवाई इस साल लुफ्थांसा में चल रहे श्रम विवादों की शृंखला में नवीनतम कड़ी है। फरवरी मध्य में यूएफओ ने कॉकपिट एसोसिएशन के पायलटों के साथ मिलकर संयुक्त एक दिवसीय हड़ताल की थी, जिसके कारण इसी तरह बड़े पैमाने पर उड़ानें रद्द हुई थीं।

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हिन्दुस्थान समाचार / अमरेश द्विवेदी

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