
पोर्ट लुइस (मॉरीशस), 11 अप्रैल (हि.स.)। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने शनिवार को कहा कि जलवायु परिवर्तन, समुद्री सुरक्षा चुनौतियां, आपूर्ति शृंखला में अवरोध और बढ़ती असमानताएं अब केवल सहयोग ही नहीं, बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी की मांग कर रही हैं।
विदेश मंत्री खनाल मॉरीशस के पोर्ट लुइस में 10 से 12 अप्रैल तक आयोजित 9वें हिंद महासारग सम्मेलन के दूसरे दिन एक सत्र को संबोधित कर रहे थे। हिंद महासागर शासन के लिए सामूहिक नेतृत्व विषय पर केंद्रित इस सम्मेलन का उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र के नेताओं, नीति निर्माताओं और विशेषज्ञों को एकसाथ लाना है ताकि साझा जिम्मेदारियों, सहकारी ढांचों और क्षेत्रीय शासन के भविष्य पर विचार-विमर्श किया जा सके।
सम्मेलन का आयोजन इंडिया फाउंडेशन और भारतीय विदेश मंत्रालय के संयुक्त तत्वावधान में मॉरीशस सरकार के सहयोग से किया गया है। सम्मेलन में भारत के विदेश मंत्री डॉ. इस जयशंकर सहित दक्षिण और दक्षिण पूर्व के कई देशों के विदेश मंत्री और प्रतिनिधियों की सहभागिता है।
नेपाल के विदेश मंत्री खनाल ने कहा कि मध्यपूर्व में जारी संघर्षों का प्रभाव नेपाल सहित पूरे विश्व पर पड़ रहा है। इन संघर्षों का प्रभाव क्षेत्रीय सीमाओं से बाहर फैल रहा है, जिससे ईंधन की कीमतें, आपूर्ति शृंखला और आजीविका पर असर पड़ रहा है। हिंद महासागर की स्थिरता वैश्विक शांति से सीधे जुड़ी हुई है।
“हिंद महासागर शासन के लिए सामूहिक संरक्षकत्व” विषय पर उन्होंने कहा कि सामूहिक जिम्मेदारी की शुरुआत इस सरल सत्य से होती है कि हिमालय और महासागर का भविष्य एक-दूसरे से अविच्छिन्न रूप से जुड़ा हुआ है।
उन्होंने कहा, “नेपाल सरकार के दृष्टिकोण में संरक्षकत्व का अर्थ संकीर्ण स्वार्थ से ऊपर उठकर साझा जिम्मेदारी निभाना है। इसके लिए समावेशी, पारदर्शी और नियम-आधारित बहुपक्षीय प्रणाली आवश्यक है, जो अंतरराष्ट्रीय कानून, संप्रभु समानता, पारस्परिक सम्मान और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के सिद्धांतों पर आधारित हो।”
खनाल ने कहा कि नेपाल संवाद का साझेदार, लैंड लॉक्ड देशों की आवाज और पर्वत तथा महासागर के बीच सेतु बनने के लिए तैयार है। उन्होंने उल्लेख किया कि भले ही नेपाल लैंड लॉक्ड देश है, लेकिन उसका हिंद महासागर से संबंध प्राचीन, स्वाभाविक और अविभाज्य रहा है। इतिहास में नेपाली व्यापारी, तीर्थयात्री और विद्वान हिमालय से महासागर तक जाने वाले मार्गों का उपयोग करते थे, जिनसे न केवल व्यापार बल्कि विचार और दर्शन भी फैलते थे। विशेष रूप से गौतम बुद्ध की शिक्षाएं भी इन्हीं मार्गों से व्यापक रूप से फैलीं।
खनाल ने कहा, “जलवायु परिवर्तन ने इस संबंध को और अधिक स्पष्ट तथा चिंताजनक बना दिया है। नेपाल में ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, जिससे ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड का खतरा बढ़ गया है। दूसरी ओर हिंद महासागर तेजी से गर्म हो रहा है, जिससे समुद्र का जल स्तर बढ़ रहा है और द्वीपीय देशों के लिए खतरा उत्पन्न हो रहा है।”
उन्होंने कहा कि नेपाल इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र और कॉप सम्मेलनों में उठाता रहा है तथा इसी संदर्भ में ‘सागरमाथा संवाद’ नामक अंतरराष्ट्रीय मंच की स्थापना की गई है।
खनाल ने हिंद महासागर को वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति का केंद्र बताते हुए उन्होंने समुद्री आतंकवाद, समुद्री डकैती, मादक पदार्थों की तस्करी और मानव तस्करी जैसी चुनौतियों पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा, “हम विवादों के समाधान के लिए संवाद और अंतरराष्ट्रीय कानून का समर्थन करते हैं। हम केवल भौगोलिक रूप से ही नहीं, बल्कि साझा जिम्मेदारी के माध्यम से भी जुड़े हुए हैं।”
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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास