

-गौसंरक्षण को जनआंदोलन बनाने का आह्वान, ‘गौवृत्ति परिवार’ मॉडल पर दिया जोर
देहरादून, 14 अप्रैल 2026 (हि.स.)। अखिल भारतीय सह संयोजक, गौ सेवा गतिविधि नवल किशोर ने कहा कि गौपालन में लगातार गिरावट के चलते किसानों की कृषि लागत बढ़ रही है और रासायनिक खादों पर निर्भरता बढ़ने से भूमि की उर्वरता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। गौवंश संरक्षण को केवल सरकारी जिम्मेदारी न मानते हुए इसे जनभागीदारी से जोड़ने की जरूरत है।
अखिल भारतीय सह संयोजक, गौ सेवा गतिविधि नवल किशोर मंगलवार को यहां तिलक रोड पर आयोजित एक बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने 'गौवृत्ति परिवार' मॉडल को समय की सबसे बड़ी आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि वर्तमान में देश में केवल करीब 15 प्रतिशत गौवंश ही किसानों के पास है, जबकि 85 प्रतिशत गायें गौशालाओं में सरकार और सामाजिक संस्थाओं के भरोसे हैं। इस व्यवस्था से सरकारी संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि गौपालन समाज की जिम्मेदारी बने बिना स्थायी समाधान संभव नहीं है।
नवल किशोर ने कहा कि गौपालन में आई गिरावट ने कृषि लागत बढ़ा दी है और रासायनिक खादों पर निर्भरता बढ़ाकर भूमि की उर्वरता को खतरे में डाल दिया है। उन्होंने गौ-आधारित अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने की जरूरत पर बल देते हुए कहा कि जैविक खाद, पंचगव्य और अन्य गौ-उत्पाद किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी सहायक हो सकते हैं। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि प्राचीन भारत में गाय अर्थव्यवस्था की आधारशिला थी, लेकिन औपनिवेशिक नीतियों ने इस व्यवस्था को कमजोर कर दिया। अब समय आ गया है कि समाज फिर से इस परंपरा को मजबूत करे।
बैठक में धार्मिक और सांस्कृतिक पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि गोपाष्टमी जैसे पर्व केवल आस्था नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना के प्रतीक हैं। उन्होंने गौपूजा, गौकथा और जनजागरण अभियानों के जरिए इसे जनआंदोलन का रूप देने का आह्वान किया।
बैठक में उत्तराखंड गौसेवा संयोजक धर्मवीर, विभाग प्रचारक धन्नजय, विभाग कार्यवाह अरुण, जोत सिंह, ललित बडाकोटी, दीपेन्द्र त्रिपाठी सहित कई गणमान्य नागरिक और गौसेवा से जुड़े कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय