सीडीएस चौहान ने युद्ध के बदलते स्वरूप के अनुरूप ढलने की जरूरत पर जोर दिया

युगवार्ता    15-Apr-2026
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नौसेना कमांडरों के सम्मेलन में सीडीएस जनरल अनिल चौहान और नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी


- नौसेना प्रमुख ने किया युद्ध की तैयारी पर ध्यान केंद्रित करके 'भविष्य के लिए तैयार' सेना बनाने का आह्वान

नई दिल्ली, 15 अप्रैल (हि.स.)। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने बदलते भू-रणनीतिक यथार्थों और युद्ध के बदलते स्वरूप के अनुरूप ढलने की आवश्यकता पर जोर दिया है, जिसमें आर्थिक एवं तकनीकी आयाम भी शामिल हैं। उन्होंने युद्ध के तेजी से बदलते स्वरूप को देखते हुए नौसेना से नई योजना बनाने का आग्रह किया। नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने युद्ध की तैयारी पर लगातार ध्यान केंद्रित करने और उभरती हुई तकनीकों को अपनाकर एक 'भविष्य के लिए तैयार' सेना बनाने पर जोर दिया।

सीडीएस जनरल चौहान ने बदलते भू-राजनीतिक समीकरणों से संबंधित मामलों पर नौसेना कमांडरों को संबोधित किया और उनसे बातचीत की। इस दौरान उन्होंने भारत की ऊर्जा सुरक्षा की रक्षा के लिए भारतीय नौसेना की त्वरित तैनाती की सराहना की। नौसेना भवन में तीन दिवसीय सम्मेलन के पहले दिन की शुरुआत नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी के उद्घाटन भाषण से हुई। उन्होंने नौसेना के वरिष्ठ नेतृत्व, बाहर से आए ऑपरेशनल और एरिया कमांडर्स, कमांड मुख्यालयों और मुख्यालय स्टाफ को संबोधित किया। उन्होंने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष, ऑपरेशन्स की बढ़ी हुई गति और तीनों सेनाओं के बीच तालमेल में ऊर्जा सुरक्षा सहित भारत के समुद्री हितों की रक्षा करने में नौसेना की उपलब्धियों को सराहा।

नौसेना प्रमुख ने उभरते भू-रणनीतिक परिदृश्य में हिंद महासागर क्षेत्र और उससे आगे भारतीय नौसेना की प्रतिबद्धताओं को दोहराया और बहुपक्षीय तथा द्विपक्षीय अभ्यासों में सक्रिय जुड़ाव के माध्यम से एकजुट और विश्वसनीय दृष्टिकोण के महत्व पर जोर दिया। सम्मेलन के दौरान संयुक्तता, क्षमता वृद्धि, रखरखाव/मरम्मत, बहु-क्षेत्रीय सुरक्षा पद्धतियां, प्रशिक्षण, विदेशी सहयोग, राहत एवं बचाव और स्वदेशीकरण से संबंधित प्रमुख मुद्दों सहित परिचालन संबंधी मुख्य बातों पर चर्चा की गई।

उन्होंने वैश्विक शक्ति संतुलन के बारे में बात करते हुए कहा कि सिर्फ पांच सालों में हम प्रतिस्पर्धा के दौर से निकलकर संघर्ष के दौर में पहुंच गए हैं। उन्होंने चल रहे संघर्ष के आर्थिक और सैन्य प्रभावों पर जोर दिया, साथ ही यह भी बताया कि संघर्ष को लेकर लोगों की सोच को किस तरह 'नैरेटिव वॉरफेयर' के जरिए बदला जा रहा है, न कि सिर्फ जमीनी कार्रवाई के नतीजों के आधार पर। नौसेना प्रमुख ने उन अलग-अलग पहलुओं पर भी जोर दिया, जिसकी वजह से समुद्री सुरक्षा का माहौल एक अहम मोड़ पर पहुंच गया है, जहां सभी मिलकर भारतीय नौसेना के लिए रोजाना बेहद चुनौतीपूर्ण माहौल तैयार कर रहे हैं।

नौसेना प्रमुख ने 'लड़ाई के लिए तैयार, भरोसेमंद, एकजुट और भविष्य के लिए तैयार' सेना बनने की अपनी यात्रा में भारतीय नौसेना की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। हमला करने और बचाव करने, दोनों तरह की कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार होने का प्रदर्शन करने के साथ-साथ उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि पिछले पांच से दस सालों में नौसेना के जहाजों की ऑपरेशनल तैनाती में काफी बढ़ोतरी हुई है। जमीन के ऊपर, पानी के नीचे और हवा में युद्ध लड़ने की क्षमताओं को लगातार बेहतर बनाना और बढ़ाना इस तरह के उपाय थे, जिन्होंने नौसेना की युद्ध की तैयारी में योगदान दिया।

उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना ने फारस की खाड़ी से बाहर निकलने वाले व्यापारिक जहाजों के सुरक्षित पारगमन में प्रमुख भूमिका निभाई है।साथ ही इस क्षेत्र में भारतीय नौसेना के युद्धपोतों की उपस्थिति से भारतीय नाविकों के लिए विश्वास का स्रोत भी बनी रही। नौसेना प्रमुख ने उन प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की रूपरेखा प्रस्तुत की, जो यह सुनिश्चित करेंगे कि नौसेना के सामूहिक प्रयास सुसंगत, निरंतर और स्पष्ट रूप से निर्देशित रहें। उन्होंने विभिन्न प्रौद्योगिकी-गहन क्षमता विकास कार्यों पर भी प्रकाश डाला, जो या तो पूरे हो चुके हैं या विकास और शामिल किए जाने के विभिन्न चरणों में हैं। -------------

हिन्दुस्थान समाचार / सुनीत निगम

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