साइबर अपराध से निपटने के लिए रियल टाइम तंत्र जरूरी : सीजेआई सूर्यकांत

युगवार्ता    20-Apr-2026
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नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 22वें डी.पी. कोहली स्मृति व्याख्यान के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत और सीबीआई निदेशक प्रवीण सूद, उत्कृष्ट सेवा पदक से सम्मानित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ।


नई दिल्ली, 20 अप्रैल (हि.स.)। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के 22वें डीपी कोहली स्मृति व्याख्यान में भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने साइबर अपराधों पर प्रभावी एवं वास्तविक समय में कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया। इस अवसर पर उत्कृष्ट सेवा (एमएसएम) पदक से कुल 23 अधिकारियों और कर्मचारियों को सम्मानित किया गया।

यहां भारत मंडपम में आयोजित इस कार्यक्रम में सीबीआई के वरिष्ठ अधिकारी, न्यायपालिका के प्रतिनिधि और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि साइबर अपराध अब बेहद संगठित और तेज हो गए हैं, जबकि उनकी जांच और प्रतिक्रिया अभी भी धीमी है। साइबर ठगी आमतौर पर एक कॉल या संदेश से शुरू होती है, जिसमें लोगों को झांसे में लेकर उनकी निजी या बैंकिंग जानकारी हासिल की जाती है और कुछ ही समय में धनराशि कई खातों में ट्रांसफर कर दी जाती है।

उन्होंने कहा कि इस चुनौती से निपटने के लिए रियल टाइम सूचना साझा करना, संदिग्ध लेन-देन पर तुरंत रोक लगाना और जरूरत पड़ने पर खातों को अस्थायी रूप से फ्रीज करने जैसी व्यवस्थाएं विकसित करनी होंगी। साथ ही कानून प्रवर्तन एजेंसियों, दूरसंचार कंपनियों, डिजिटल प्लेटफॉर्म और वित्तीय संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है, ताकि अपराध को समय रहते रोका जा सके।

मुख्य न्यायाधीश ने तकनीकी क्षमता बढ़ाने, डिजिटल फॉरेंसिक को मजबूत करने और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तथा मशीन लर्निंग के उपयोग पर भी बल दिया। उन्होंने ‘अभय’ जैसे एआई आधारित नोटिस सत्यापन प्लेटफॉर्म की सराहना करते हुए कहा कि यह आम लोगों को फर्जी नोटिस और साइबर धोखाधड़ी से बचाने में मदद करेगा।

उन्होंने कहा कि साइबर अपराधों का सबसे ज्यादा असर आम नागरिकों, विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों पर पड़ता है, इसलिए शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया सरल, त्वरित और संवेदनशील होनी चाहिए। उन्होंने संस्थाओं के बीच समन्वित और एकीकृत तंत्र विकसित करने की आवश्यकता पर जोर दिया, ताकि अपराध की रोकथाम और जांच दोनों को प्रभावी बनाया जा सके।

कार्यक्रम के दौरान उत्कृष्ट सेवा (एमएसएम) पदक से सम्मानित अधिकारियों और कर्मचारियों में राजीव रंजन, सुधा सिंह, अश्विन आनंद शेनवी, जयलक्ष्मी रामानुजम, अमृत पाल सिंह, विवेक, सुराज मजूमदार, राज कुमार, मणिक्कावेल सुंदरमूर्ति, संजीव शर्मा, बलदेव कुमार, राजिंदर कुमार, विष्णु ओम विक्रम, नरेश कुमार कौशिक, वहेंगबम सुनील सिंह, सुभाष किसान खातले, कुलदीप कुमार भारद्वाज, आलोक कुमार मजूमदार, एन. कृष्णा, विनोद कुमार चौधरी, दया राम यादव, शेख खमरुद्दीन और राजेश कुमार शामिल हैं।

उल्लेखनीय है कि डीपी कोहली स्मृति व्याख्यान सीबीआई के संस्थापक निदेशक धर्मनाथ प्रसाद कोहली की स्मृति में आयोजित किया जाता है, जिसका उद्देश्य कानून प्रवर्तन और आपराधिक न्याय प्रणाली से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर संवाद को बढ़ावा देना है।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर

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