वैज्ञानिकों ने पानी से मिट्टी विस्थापन में खोजे नए पैटर्न, तेल रिकवरी प्रक्रिया में होगी मददगार

युगवार्ता    22-Apr-2026
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रमन अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए प्रयोग में पानी जब क्ले (मिट्टी) को विस्थापित करता है तो उसकी सतह पर नई आकृतियाँ बनती हैं। इस अध्ययन में पहली बार ज़िगज़ैग और स्क्यूअरिंग जैसे पैटर्न देखे गए, जो तेल रिकवरी और सामग्री परिवहन की प्रक्रिया को समझने में मदद करेंगे।


नई दिल्ली, 22 अप्रैल (हि.स.)। वैज्ञानिकों ने मिट्टी और पानी के प्रवाह के बीच बनने वाले पैटर्न पर नई खोज की है। जब पानी मिट्टी (क्ले) को धकेलता है तो उसकी सतह पर अलग-अलग आकृतियां बनती हैं। पहले केवल साधारण शाखाओं जैसे पैटर्न देखे जाते थे, लेकिन अब शोधकर्ताओं ने दो नए पैटर्न जिगजैग और स्क्यूअरिंग की पहचान की है। यह खोज तेल निकालने की प्रक्रिया (ऑयल रिकवरी) और मिट्टी जैसी सामग्री को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने की तकनीक को बेहतर बनाने में मदद करेगी।

केंद्रीय विज्ञान मंत्रालय ने बताया कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के स्वायत्त संस्थान- रमन अनुसंधान संस्थान (आरआरआई) के वैज्ञानिकों ने यह अध्ययन किया। वरिष्ठ प्रोफेसर रंजिनी बंद्योपाध्याय ने बताया कि इन नए पैटर्न का उभरना अप्रत्याशित था और यह क्ले की यांत्रिक प्रकृति को नियंत्रित करने के नए तरीके सुझाता है।

शोधकर्ताओं ने क्ले को पहले ओवन में सुखाकर उसका घोल तैयार किया और फिर विभिन्न योजक (एडिटिव्स) जैसे डाइमिथाइलफॉर्मामाइड (डीएमएफ), टेट्रासोडियम पाइरोफॉस्फेट (टीएसपीपी), सोडियम क्लोराइड और पोटैशियम क्लोराइड मिलाकर अलग-अलग नमूने बनाए। जब क्ले को शुद्ध पानी में घोला गया तो ‘टिप-स्प्लिटिंग’ पैटर्न बना, जबकि डीएमएफ और टीएसपीपी मिलाने पर ज़िगज़ैग और स्क्यूअरिंग पैटर्न सामने आए। सोडियम क्लोराइड और पोटैशियम क्लोराइड मिलाने पर क्ले अत्यधिक लोचदार और भंगुर (कठोर दिखने वाले नाजुक पदार्थ) हो गया, जिससे पानी के प्रवाह के दौरान शीट की तरह टूटने लगा।

यह प्रयोग ‘हीले-शॉ सेल’ (एक उपकरण जिसमें दो समानांतर प्लेटों के बीच बहुत पतली जगह होती है) नामक व्यवस्था में किया गया, जिसमें दो कांच की प्लेटों के बीच पानी और क्ले को इंजेक्ट किया गया। पानी के प्रवाह से केंद्र से बाहर की ओर सुंदर आकृतियां बनीं।

पीएचडी छात्र वैभवराज सिंह परमार ने कहा कि तेल रिकवरी के दौरान अस्थिरता वांछनीय नहीं होती, क्योंकि इससे दक्षता घटती है लेकिन यदि हम इन अस्थिरताओं को समझ लें तो उन्हें नियंत्रित भी कर सकते हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर

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