एस्थेटिक सर्जरी पर एम्स में तीन दिवसीय अतरराष्ट्रीय सम्मेलन शुक्रवार से

युगवार्ता    23-Apr-2026
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एम्स में आयोजित पत्रकार वार्ता में सम्मेलन के बारे में बताते हुए डॉ. मनीष सिंघल


नई दिल्ली, 23 अप्रैल (हि.स.)। एस्थेटिक सर्जरी को लेकर अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) शुक्रवार से तीन दिवसीय शैक्षणिक सम्मेलन का आयोजन करने जा रहा है। इसमें भारत सहित पड़ोसी देशों से 280 से अधिक प्लास्टिक सर्जन भाग लेंगे। इस सम्मेलन में एस्थेटिक यानि हेयर ट्रांसप्लांट, लिपोसक्शन, फेसलिफ्ट, राइनोप्लास्टी, लेजर ट्रीटमेंट, बोटुलिनम टॉक्सिन और डर्मल फिलर्स के कई पहलुओं पर चर्चा की जाएगी। इस सम्मेलन में इस तेजी से बढ़ते क्षेत्र में नवीनतम तकनीकों और प्रगति पर चर्चा की जाएगी। वर्तमान में भारत एस्थेटिक सर्जरी के क्षेत्र में दुनिया में छठे स्थान पर है।

एम्स में गुरुवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में बर्न और प्लास्टिक सर्जरी विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. मनीष सिंघल ने बताया कि भारत में एस्थेटिक सर्जरी की मांग लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2024 में लगभग 12 लाख प्रक्रियाएं की गईं, जो 2025 में बढ़कर 15 लाख तक पहुंच गई और अब 2026 में इसके और बढ़ने का अनुमान है।

प्रो. सिंघल ने यह भी कहा कि एम्स जैसे राष्ट्रीय संस्थानों की जिम्मेदारी है कि वे एस्थेटिक सर्जरी में सुरक्षित, नैतिक और व्यवस्थित प्रशिक्षण को बढ़ावा दें। इस दिशा में एम्स पटना, एम्स भुवनेश्वर और पीजीआई चंडीगढ़ जैसे प्रमुख संस्थान भी पहल कर रहे हैं।

सहायक प्रोफेसर शिवांगी साहा ने कहा कि एस्थेटिक सर्जरी की मांग समाज के हर वर्ग और आयु समूह में देखी जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि यह केवल बाहरी सुंदरता ही नहीं बल्कि आत्मविश्वास, मानसिक स्वास्थ्य और सामाजिक अवसरों को भी प्रभावित करती है।

कार्यक्रम में

प्रो. मनीष सिंघल, डॉ. राजा तिवारी, डॉ. राज कुमार मानस, डॉ. शिवांगी साहा, डॉ. अपर्णा सिन्हा, डॉ. रुपवथ राम कुमार और डॉ. सुरभि गुप्ता मौजूद रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी

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