
नई दिल्ली, 23 अप्रैल (हि.स.)। भारत साल 2030 में अहमदाबाद (गुजरात) में राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी करने जा रहा है। प्रस्तावित आयोजन को 2026 में ग्लासगो में होने वाले सीमित संस्करण की तुलना में अधिक विस्तृत और भव्य बनाने की योजना है। ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों (23 जुलाई–2 अगस्त) में केवल 10 खेल और 6 पैरा स्पोर्ट्स शामिल होंगे, जबकि 2030 संस्करण में शूटिंग, कुश्ती, बैडमिंटन और तीरंदाजी जैसे प्रमुख खेलों की वापसी की संभावना जताई जा रही है।
भारतीय तीरंदाजी की दिग्गज खिलाड़ी दीपिका कुमारी और अनुभवी तीरंदाज तरुणदीप राय ने 2030 में तीरंदाजी को फिर से शामिल किए जाने को लेकर आशा व्यक्त की है।
दीपिका कुमारी, जिन्होंने 2010 दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों में महिला व्यक्तिगत रिकर्व वर्ग में भारत को ऐतिहासिक स्वर्ण पदक दिलाया था, ने साई मीडिया के हवाले से कहा, “2010 राष्ट्रमंडल खेल मेरे करियर के लिए बहुत बड़ा मोड़ था, क्योंकि 16 साल की उम्र में मैंने उस खेल में चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया, जो उस समय ज्यादा लोकप्रिय नहीं था। उस समय मैं अपनी उपलब्धि का महत्व पूरी तरह नहीं समझ पाई थी, लेकिन मेरे अनुसार उस जीत के बाद भारत में तीरंदाजी को काफी बढ़ावा मिला। बहुत से लोगों को इस खेल के बारे में जानकारी मिली और देश में अन्य खेलों के प्रति भी जागरूकता बढ़ी, क्योंकि लोगों ने उन्हें करीब से देखा।”
उन्होंने आगे कहा, “जिस तरह 2010 में हमने राष्ट्रमंडल खेलों का आयोजन किया था, मुझे विश्वास है कि 2030 का आयोजन उससे भी बड़ा और बेहतर होगा। हम तीरंदाज लंबे समय से इस बहु-देशीय प्रतियोगिता में हिस्सा नहीं ले पाए हैं और उम्मीद है कि 2030 में तीरंदाजी की वापसी होगी।”
वहीं, तीन बार के ओलंपियन तरुणदीप राय ने कहा, “2010 राष्ट्रमंडल खेल मेरे लिए बेहद खास अनुभव था। उसके बाद मैंने तीरंदाजी के क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखा। बुनियादी ढांचे में सुधार हुआ और खिलाड़ियों की तकनीकी क्षमता व ज्ञान में भी वृद्धि हुई। उस समय देश में करीब 400 तीरंदाज थे, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर 30,000 से अधिक सक्रिय तीरंदाजों तक पहुंच गई है। आज स्थिति यह है कि लगभग 100 तीरंदाज किसी भी दिन भारतीय टीम में जगह बनाने की क्षमता रखते हैं, जो 2010 के बाद एक बड़ा बदलाव है।”
उन्होंने आगे कहा, “भारत का 2030 राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी करना हम सभी खिलाड़ियों के लिए गर्व का क्षण है। मेरा मानना है कि यदि भारत हर 5 या 10 साल में इस स्तर के आयोजन करे, तो देश के खेल पारिस्थितिकी तंत्र में बड़ा बदलाव आएगा। 2030 के आयोजन से नई प्रतिभाएं सामने आएंगी और अधिक बच्चे खेल को करियर के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित होंगे।”
कुल मिलाकर, 2030 राष्ट्रमंडल खेल भारत के लिए न केवल एक बड़े आयोजन का अवसर होगा, बल्कि तीरंदाजी जैसे खेलों के पुनरुत्थान और विकास का भी महत्वपूर्ण मंच बन सकता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुनील दुबे