
नई दिल्ली, 24 अप्रैल (हि.स.)। कपड़ा मंत्रालय की सचिव नीलम शमी राव ने शुक्रवार को कहा कि पारंपरिक कला एक राष्ट्रीय धरोहर है, जिसे हम वैश्विक मंच के लिए गतिशील बना रहे हैं।
नीलम राव ने यह बात आज नई दिल्ली के जवाहर व्यापार भवन स्थित केंद्रीय कुटीर उद्योग निगम (सीसीआईसी) में सोल थ्रेड्स नामक प्रदर्शनी के उद्घाटन पर कही। यह डिजिटल-संचालित लग्जरी हेरिटेज ब्रांड' के रूप में पेश करने की एक नई पहल है।
इस नये मॉडल को समर्थ 2.0 का नाम दिया गया है। यह कलेक्शन भारत की पारंपरिक कारीगरी और आधुनिक डिजाइन का एक अनूठा संगम है। इसका मुख्य उद्देश्य भारतीय शिल्प, विरासत को बढ़ावा देना और देश के पारंपरिक शिल्पकारों तथा उनकी विरासत को एक बड़ा मंच प्रदान करना है।
उन्होंने कहा, पारंपरिक कला केवल एक विरासत नहीं है बल्कि एक ऐसी राष्ट्रीय धरोहर है जिसे हम वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए निरंतर गतिशील कर रहे हैं।
सीसीआईसी के अध्यक्ष अखिलेश कुमार ने कहा कि इस नए मॉडल का मुख्य उद्देश्य भारतीय शिल्पकारों और बुनकरों को उनके उत्पादों का उचित मूल्य दिलाना है। संस्थान का लक्ष्य इन कलाकारों को एक बेहतर बाजार उपलब्ध कराना है। ताकि उनके उत्पाद वैश्विक स्तर तक पहुँच सकें।
समारोह का मुख्य आकर्षण 'द रनवे शोकेस' रहा, जहां निफ्ट और शिल्पकारों के बीच हुए अनूठे सहयोग को प्रदर्शित किया गया। डॉ. सुधा ढींगरा द्वारा क्यूरेट किए गए इस सेगमेंट में पारंपरिक करघों और आधुनिक वार्डरोब के बीच के अंतर को पाटते हुए शानदार परिधान पेश किए गए।
कार्यक्रम के समापन सत्र में पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ फैशन को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया गया।
उद्घाटन समारोह में पहले दिन कलेक्शन की झलक दिखाई गई, जिसके बाद हेरिटेज डिज़ाइनर कलेक्शन का फैशन शो प्रस्तुत किया गया। यह कलेक्शन भारत की समृद्ध स्वदेशी वस्त्र परंपराओं से प्रेरित था, जिसे समकालीन सौंदर्यशास्त्र के अनुरूप नया रूप दिया गया। इस कार्यक्रम में लोक कलाकारों द्वारा जीवंत सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी शामिल थीं, जो भारत की सांस्कृतिक विरासत की विविधता और समृद्धि को दर्शाती हैं।
यह विशेष प्रदर्शनी 24 अप्रैल से 10 मई 2026 तक चलेगी। जिसका समय आगुन्तकों के लिए सुबह 10 बजे से शाम 7 बजे तक रहेगा। इस प्रदर्शनी में भारत की बेहतरीन हस्तशिल्प कृतियों की एक शानदार श्रृंखला प्रदर्शित की जाएगी, जिसमें विशेष रूप से चुनी गई साड़ियां, डिजाइनर परिधान, हस्तनिर्मित आभूषण और घरेलू साज-सज्जा की वस्तुएं शामिल हैं।
यह आयोजन भारतीय हस्तशिल्प और कपड़ा क्षेत्र में नवाचार और परंपरा को एक साथ देखने का एक महत्वपूर्ण अवसर है।
इस अवसर पर विकास आयुक्त (हथकरघा) डॉ. एम. बीना (आईएएस) तथा विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) अमृत राज, सहित विभिन्न मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी और गणमान्य अतिथि भी मौजूद रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी