युवा राष्ट्र निर्माता हैं, ज्ञान का उपयोग विकसित भारत के निर्माण में करें : उपराष्ट्रपति

युगवार्ता    25-Apr-2026
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ज्ञान का उपयोग समाज की बेहतरी के लिए करें:उपराष्ट्रपति


ज्ञान का उपयोग समाज की बेहतरी के लिए करें:उपराष्ट्रपति


जयपुर, 25 अप्रैल (हि.स.)। उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि युवा राष्ट्र निर्माता हैं। उन्हें अपने ज्ञान का उपयोग विकसित भारत के निर्माण में करना चाहिए। उन्होंने युवाओं से अपनी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं को राष्ट्र निर्माण से जोड़ने और नवाचार के माध्यम से देश को आर्थिक महाशक्ति बनाने का आह्वान किया है। इस अवसर पर राज्यपाल ने छात्र छात्राओं को डिग्री एवं पदक प्रदान किए।

उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन शनिवार को जयपुर में राजस्थान विश्वविद्यालय के 35वें दीक्षांत समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने राजस्थान को समृद्ध विरासत, वीरता और गहरी सांस्कृतिक विरासत की भूमि बताया, जिसने लंबे समय से उत्कृष्टता और चरित्र को बढ़ावा दिया है। उन्होंने कहा कि जयपुर विरासत और प्रगति का एक जीवंत प्रतीक है और राजस्थान विश्वविद्यालय ज्ञान, सत्यनिष्ठा और सेवा के प्रति समर्पित विचारकों, नेताओं और परिवर्तनकर्ताओं की पीढ़ियों को आकार देना जारी रखे हुए है।

उपराष्ट्रपति ने स्नातक छात्रों को बधाई देते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह एक अंत और एक नई शुरुआत दोनों का प्रतीक है। उन्होंने छात्रों से अपने ज्ञान को प्रगति के साधन के रूप में उपयोग करने का आग्रह किया और इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा का वास्तविक महत्व समाज की बेहतरी, नवाचार और नैतिक आचरण के लिए इसके प्रयोग में निहित है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत की परिकल्पना का उल्लेख करते हुए उन्होंने स्नातकों को रोजगार सृजनकर्ता, नवप्रवर्तक और राष्ट्र निर्माता बनने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने राजस्थान सरकार द्वारा मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में युवाओं के लिए नवाचार और अवसरों को बढ़ावा देने के प्रयासों की भी सराहना की।

महिला सशक्तीकरण के महत्व पर जोर देते हुए उपराष्ट्रपति ने महिला स्नातकों की उपलब्धियों पर गर्व व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में स्वर्ण पदक जीतने वालों में अधिकांश महिलाएं रही हैं। उन्होंने कहा कि उनकी उपलब्धियां महत्वपूर्ण प्रगति का प्रतिनिधित्व करती हैं और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए समान अवसर, गरिमा और नेतृत्व की भूमिका के बिना एक सच्चा विकसित राष्ट्र अस्तित्व में नहीं रह सकता। उन्होंने यह भी आशा व्यक्त की कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम विधायी निकायों में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को और अधिक बढ़ाएगा।

तेजी से बदलती दुनिया की चुनौतियों का सामना करते हुए उपराष्ट्रपति ने छात्रों से आलोचनात्मक चिंतन करने, नैतिक आचरण अपनाने और आजीवन सीखने को प्रोत्साहित किया। उन्होंने छात्रों को दृढ़ रहने, असफलताओं से सीखने और मूल्यों पर अडिग रहने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि सहानुभूति के बिना उत्कृष्टता और विनम्रता के बिना उपलब्धि अधूरी है। उन्होंने स्नातकों से समाज में सार्थक योगदान देने, करुणा का भाव रखने, विविधता का सम्मान करने और सार्वजनिक हित के लिए काम करने का आह्वान किया। उन्होंने स्नातकों से नशे से दूर रहने और सोशल मीडिया का रचनात्मक उपयोग करने की भी सलाह दी।

राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा कि राजस्थान विश्वविद्यालय कभी राजपूताना विश्वविद्यालय से जाना जाता था। इसका जो ध्येय वाक्य है, वह बहुत महत्वपूर्ण है। इस ध्येय वाक्य का मूल है, धर्म ही पूरे विश्व का आधार है। उन्होंने कहा कि अच्छा जीवन जीना है तो ईमानदारी, नैतिकता के साथ चरित्र और राष्ट्रप्रेम हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए।

राज्यपाल ने कहा कि उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले युवाओं की नशीले पदार्थों की ओर बढ़ती प्रवृत्ति चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान से नशीले पदार्थों को भारत भेजा जाता है। इस नशे से भारत के युवा तेजी से बुजुर्ग होते जा रहे हैं। पाकिस्तान यही चाहता है। उन्होंने ड्रग्स को आग बताते हुए कहा कि इससे अपने घर को बचाने की जरूरत है। उन्होंने भारत को समर्थ, शक्तिशाली बनाने का आह्वान किया।

उप मुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने बाबासाहब डॉ. भीमराव आंबेडकर को स्मरण करते हुए कहा कि शिक्षा सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने कहा कि जीवन में धैर्य, अनुशासन, अनुकूलन और ईमानदारी के साथ राष्ट्रप्रेम से ही जीवन में सफलताओं का वरण किया जा सकता है। उन्होंने प्रधानमंत्री के विकसित भारत के संकल्प में युवाओं को महती भूमिका निभाने पर जोर दिया।

राज्यसभा सांसद राधामोहन अग्रवाल ने कहा कि स्वतंत्र भारत के प्रथम गवर्नर-जनरल सी. राजगोपालाचारी ने राजस्थान विश्वविद्यालय परिसर की आधारशिला रखी थी। यह देश का प्रमुख शिक्षण संस्थान है। उन्होंने कहा कि वह स्वयं विश्वविद्यालय के छात्र रहे हैं। यहां शिक्षा प्राप्त युवा अपनी शिक्षा का उपयोग राष्ट्र निर्माण में करें। कुलगुरु अल्पना कटेजा ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियाें के बारे में जानकारी दी।

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हिन्दुस्थान समाचार / दिनेश

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