
नई दिल्ली, 26 अप्रैल (हि.स.)। भारत और न्यूजीलैंड के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर हस्ताक्षर से पहले आगरा में आयोजित उद्योग संवाद कार्यक्रम में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के व्यापार एवं निवेश मंत्री टॉड मैक्ले ने उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ व्यापक चर्चा की। इस दौरान स्पष्ट किया गया कि यह समझौता केवल शुल्क कटौती तक सीमित नहीं होगा, बल्कि व्यापार, निवेश, कौशल गतिशीलता और जन-से-जन संबंधों को मजबूत करने वाला एक व्यापक ढांचा साबित होगा।
केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, कार्यक्रम में मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री एसपी बघेल ने भी भाग लिया। इस संवाद में चमड़ा एवं जूता उद्योग, आयुष, औषधि, चिकित्सा उपकरण, हल्के इंजीनियरिंग, खेल सामग्री और लघु उद्योग क्षेत्रों के प्रतिनिधि शामिल हुए, जिन्होंने विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों और संभावनाओं पर अपने विचार रखे।
बैठक में आगरा के चमड़ा उद्योग की विशेष चर्चा हुई, जो देश के लगभग 75 प्रतिशत चमड़ा जूता उत्पादन का केंद्र है। प्रस्तावित समझौते के लागू होने पर भारतीय निर्यात पर शुल्क समाप्त होने और चमड़ा एवं जूता उत्पादों पर वर्तमान शुल्क शून्य होने से इस क्षेत्र को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलने की उम्मीद जताई गई। उद्योग प्रतिनिधियों ने इस क्षेत्र के वर्ष 2030 तक 50 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने की संभावना भी व्यक्त की।
औषधि और चिकित्सा उपकरण क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने समझौते में तेज नियामकीय मंजूरी और अंतरराष्ट्रीय मानकों की मान्यता जैसे प्रावधानों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इससे उत्पादों की स्वीकृति प्रक्रिया आसान होगी और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। समझौते में आयुष से जुड़े प्रावधानों को भी महत्वपूर्ण बताया गया, जिससे पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने की संभावना है।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि यह समझौता उद्योगों के लिए नए अवसरों के द्वार खोलेगा और उन्हें वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने में मदद करेगा। उन्होंने उद्योग जगत से शिक्षा, कौशल विकास और प्रतिभा के आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों में उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने का आह्वान किया।
न्यूजीलैंड के मंत्री टॉड मैक्ले ने भारत को अपने देश के लिए एक महत्वपूर्ण साझेदार बताते हुए कहा कि यह समझौता दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई देगा। उन्होंने उद्योगों को संयुक्त उपक्रमों और निवेश के अवसरों का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया।
यह उद्योग संवाद कार्यक्रम भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर से पहले आयोजित बैठकों की श्रृंखला का हिस्सा है। मार्च 2025 में शुरू हुई वार्ताओं के बाद यह समझौता अंतिम चरण में पहुंच चुका है और इसके जरिए दोनों देशों के बीच व्यापारिक और आर्थिक सहयोग को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर