श्रीराम मंदिर निर्माण से जुड़े रमजानभाई समेत 30 विशिष्ट महानुभावों का सम्मान

युगवार्ता    27-Apr-2026
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नागपुर मे आयोजित  सम्मान कार्यक्रम मे शामिल हुए राम मंदिर निर्माण से जुडे  30 महानुभाव


- मंदिर का निर्माण भौतिक परियोजना नहीं, समाज की सामूहिक आस्था और संकल्प का प्रतीक हैः डॉ भागवत

नागपुर, 27 अप्रैल (हि.स.)। महाराष्ट्र के नागपुर मे आयोजित एक समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ मोहन भागवत ने सोमवार को श्रीराम मंदिर निर्माण से जुड़े 30 विशिष्ट महानुभावों को सम्मानित किया।

डॉ. हेडगेवार स्मारक समिति की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में सम्मानित हुए योगदानकर्ताओ में रमजानभाई, नृपेन्द्र मिश्र, जगदीश आफळे, गिरीश सहस्त्रभोजनी, जगन्नाथ गुळवे, आशिष सोमपुरा, निखिल सोमपुरा, अरुण योगिराज, जय काकतीकर, मनाष त्रिपाठी, सत्यनारायण पाण्डे, अनिल सुतार, केशव शर्मा, विनोद शुक्ला, राजीव दुबे, मनीष दाधीच, विनोद मेहता, अंकुर जैन, राजूकुमार सिंह, ए. व्ही. एस. सूर्या श्रीनिवास, नरेश मालवीय, परेश सोमपुरा, नाथ अय्यर, संजय तिवारी, शरद बाबू, अनिल मिश्र, गोपाल, चंपत राय, गोविंददेवगिरी महाराज और वासुदेव कामत शामिल रहे।

कार्यक्रम में राम मंदिर के निर्माण को 500 वर्षों के ऐतिहासिक संघर्ष का परिणाम बताया गया। वक्ताओं ने 22 जनवरी 2024 को हुए श्रीराम लला प्राण प्रतिष्ठा समारोह को भारतीय सभ्यता के लिए एक ऐतिहासिक और भावनात्मक क्षण बताया, जिसने पूरे देश में “सबमें राम, सबके राम” की भावना को और सशक्त किया।

इस अवसर पर अपने संबोधन में डॉ. भागवत ने कहा कि मंदिर निर्माण केवल एक भौतिक परियोजना नहीं बल्कि समाज की सामूहिक आस्था और संकल्प का प्रतीक है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे गोवर्धन पर्वत उठाने में सभी का योगदान था, वैसे ही इस भव्य मंदिर के निर्माण में भी समाज के हर वर्ग की भागीदारी रही। उन्होंने भारत के उत्थान को सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विकास से जोड़ते हुए समाज की सक्रिय भूमिका पर जोर दिया।

नागपुर स्थित डॉ हेडगेवार स्मारक समिति अध्यक्ष के सुरेश भैयाजी जोशी ने अपने वक्तव्य में छत्रपति शिवाजी महाराज से लेकर आधुनिक भारत तक के संघर्षों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह मंदिर केवल एक धार्मिक संरचना नहीं बल्कि भारतीय समाज के पुनर्जागरण का प्रतीक है, जो 500 वर्षों के संघर्ष, जनआंदोलन और कानूनी प्रक्रिया के बाद संभव हुआ।

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने मंदिर की तकनीकी विशेषताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इसे दीर्घकालिक स्थायित्व को ध्यान में रखते हुए बिना लोहे के अत्याधुनिक तकनीक से बनाया गया है। देशभर के कारीगरों और संस्थाओं के सहयोग से यह भव्य निर्माण कार्य पूर्ण हुआ।

समारोह के समापन पर गोविंद देव गिरी ने इसे एक शताब्दी की तपस्या का परिणाम बताते हुए समाज से “राम राज्य” की दिशा में निरंतर कार्य करते रहने का आह्वान किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / मनीष कुलकर्णी

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