देश के पहले वस्त्र पुनर्प्राप्ति केंद्र ने अबतक 30 मीट्रिक टन अपशिष्ट को किया एकत्र

युगवार्ता    06-Apr-2026
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नवी मुंबई वस्त्र पुनर्प्राप्ति केंद्र में महिलाएं अपसाइक्लिंग से तैयार किए गए बैग और गृह सज्जा उत्पाद प्रदर्शित करती हुईं


नई दिल्ली, 06 अप्रैल (हि.स.)। महाराष्ट्र के नवी मुंबई में स्थापित देश के पहले वस्त्र पुनर्प्राप्ति केंद्र (टीआरएफ) ने अब तक 30 मीट्रिक टन वस्त्र अपशिष्ट एकत्र कर 25.5 मीट्रिक टन की वैज्ञानिक ढंग से छंटाई की है और 300 से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षण देकर रोजगार उपलब्ध कराया है।

केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय ने बताया कि इसे नवी मुंबई नगर निगम ने ‘स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0’ के तहत बेलापुर स्थापित किया है। इसके जरिए वस्त्र अपशिष्ट को वैज्ञानिक तरीके से छांटकर पुन: उपयोग, पुनर्चक्रण और अपसाइक्लिंग किया जा रहा है। इसके जरिए अबतक करीब 41,000 कपड़ों को प्रतिदिन औसतन 500 वस्त्रों की दर से संसाधित (प्रोसेस) किया गया। इसके जरिए महिलाओं ने तैयार किए गए बैग, कपड़ों और घर के सजाने वाले समानों को तमाम प्रदर्शनियों में प्रदर्शित किया गया।

मंत्रालय ने बताया कि इसके लिए नवी मुंबई नगर निगम ने सभी 8 वार्डों में आवासीय सोसाइटियों में विशेष वस्त्र संग्रह डिब्बे लगाए हैं। अब तक कुल 140 डिब्बे लगाए जा चुके हैं। कुल 250 डिब्बे लगाने का लक्ष्य है। कपड़ों के अपशिष्ट को एकत्र करने के बाद बेलापुर की अंतरिम टीआरएफ में कपड़ों को तौलकर टैग किया जाता है और उन्हें पुन: उपयोग योग्य, पुनर्चक्रण योग्य, अपसाइक्लिंग योग्य और अस्वीकृत श्रेणियों में बांटा जाता है। फाइबर पहचान के लिए ‘कोशा’ हैंडहेल्ड स्कैनर का उपयोग किया जाता है, जिससे कपास, पॉलिकॉटन, पॉलिएस्टर, ऊन और रेशम जैसी सामग्री की पहचान तुरंत कर ली जाती है।

मंत्रालय ने बताया कि इस काम में अब तक 150 महिलाएं सक्रिय रूप से काम कर रही हैं और प्रति माह 9,000 से 15,000 रुपये तक कमा रही हैं। टीआरएफ ने अब इस पहल के जरिए 1,14,575 परिवारों को जोड़ा है, जिसके लिए 75 से अधिक जनजागरूकता कार्यशालाएं आयोजित की हैं। साथ ही टीआरएफ ने अब तक 350 से अधिक सोसाइटी प्रतिनिधियों को भी जोड़ा है।

मंत्रालय ने बताया कि इस सुविधा ने अबतक एकत्र किए गए नमूनों से 400 से अधिक अपसाइक्लिंग उत्पाद नमूने विकसित किए हैं, जिनमें अस्वीकृत वस्त्र अपशिष्ट से कागज बनाने का सफल प्रयोग भी शामिल है। प्रारंभिक चुनौतियों में डिब्बे लगाने का विरोध, वस्त्र छंटाई की जानकारी का अभाव और मिश्रित फाइबर की जटिलताएं शामिल थीं। इन्हें चरणबद्ध तैनाती, नागरिक सहभागिता और फाइबर स्कैनिंग तकनीक से दूर किया गया। आगे नवी मुंबई नगर निगम अब कोपारखैराने में एक स्थायी और उच्च क्षमता वाली वस्त्र पुनर्प्राप्ति सुविधा स्थापित करने की योजना पर भी काम कर रहा है।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर

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