
पणजी/नई दिल्ली, 09 अप्रैल (हि.स.)। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने गुरुवार को कहा कि देश को आगे बढ़ाने के लिए सहयोग, नवाचार और लोकतांत्रिक मूल्यों का पालन बहुत आवश्यक है।
ओम बिरला ने यह बात गोवा की राजधानी पणजी में कॉमनवेल्थ पार्लियामेंटरी एसोसिएशन (सीपीए) इंडिया क्षेत्र के ज़ोन 7 का पहले दो दिवसीय सम्मेलन के उद्घाटन में कही। इसका उद्देश्य संसदीय लोकतंत्र को सशक्त बनाना और क्षेत्रीय विकास के साझा विजन को गति देना है।
उन्होंने विधि निर्माताओं से कहा, “वे अपने व्यक्तिगत और राजनीतिक हितों से ऊपर उठकर पूरी ईमानदारी के साथ जनता की उम्मीदों और आकांक्षाओं पर खरा उतरें। चुने हुए प्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है कि वे जनता की अपेक्षाओं को पूरा करें लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाएं और पारदर्शी, समावेशी तथा जवाबदेह शासन सुनिश्चित करें। जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए दूरदर्शिता, समर्पण और जन कल्याण के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता आवश्यक है। ये गुण एक विकसित, न्यायपूर्ण और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए जरूरी हैं। जन प्रतिनिधियों को विज्ञान और तकनीक की शक्ति का उपयोग करके लोगों की समस्याओं का समाधान करना चाहिए। एआई जैसी आधुनिक तकनीकों के इस दौर में भी मानवीय संवेदनशीलता उतनी ही जरूरी है।”
बिरला ने विधि निर्माताओं से कहा कि वे जनता से जुड़कर उनकी समस्याओं को समझें और सहानुभूति के साथ उनका समाधान करें जो प्रतिनिधि नीतियों और कानूनों पर चर्चा में सक्रिय रहते हैं वे अपने राज्यों में मजबूत नेता बनकर उभरते हैं। विधि निर्माताओं को प्रक्रियाओं की जितनी अधिक जानकारी होगी उनकी भागीदारी उतनी ही प्रभावी होगी। उन्होंने कहा कि जन कल्याण और अच्छे शासन के लिए राज्यों के विधानमंडलों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बहुत जरूरी है। संसदीय लोकतंत्र को दुनिया की सबसे बेहतर शासन प्रणाली माना जाता है। 1952 से हर चुनाव में मतदान प्रतिशत बढ़ना भारत के मजबूत और जीवंत लोकतंत्र का प्रमाण है।
युवा विधि निर्माताओं की भूमिका पर बोलते हुए बिरला ने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य को हासिल करने में युवाओं की अहम भूमिका है। भविष्य के नेताओं के रूप में युवाओं को नई नीतियां बनाने, सभी वर्गों के विकास को आगे बढ़ाने और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने की जिम्मेदारी दी गई है। युवाओं की ऊर्जा, नई सोच और जन सेवा के प्रति समर्पण देश को समृद्ध, आत्मनिर्भर और न्यायपूर्ण बना सकता है तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए स्थायी विकास सुनिश्चित कर सकता है।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि जनता की अपेक्षाएं बहुत अधिक हैं और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में मजबूत विधायी संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने कहा कि सीपीए इंडिया रीजन के नए जोन–7 के अंतर्गत आने वाले राज्यों के सामने अलग-अलग चुनौतियां हैं लेकिन सहयोग और मिलकर काम करने की भावना से इन चुनौतियों को अवसरों में बदला जा सकता है। विशेष रूप से तटीय विकास जैसे क्षेत्रों में राज्य एक-दूसरे से सीख सकते हैं और सर्वोत्तम तरीकों को अपनाकर आगे बढ़ सकते हैं।
इस अवसर पर राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, गोवा के मुख्यमंत्री डॉ प्रमोद सावंत, महाराष्ट्र विधान परिषद के सभापति राम शिंदे और महाराष्ट्र विधान सभा के अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने भी अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में गोवा विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. गणेश गांवकर ने स्वागत भाषण दिया।
लोकसभा सचिवालय के अनुसार यह सम्मेलन 2024 में सीपीए इंडिया क्षेत्र का ज़ोन 7 गोवा, गुजरात और महाराष्ट्र की विधानसभाओं से मिलकर बना है। इसको 9 क्षेत्रों में पुनर्गठित किए जाने के बाद यह जोन 7 का पहला सम्मेलन है। वर्तमान में गुजरात विधानसभा के अध्यक्ष इस ज़ोन के अध्यक्ष हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी