
नई दिल्ली, 01 मई (हि.स.)। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी को लेकर की गई कथित टिप्पणी के मामले में कांग्रेस नेता पवन खेड़ा को उच्चतम न्यायालय के अग्रिम जमानत के फैसले का कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य अभिषेक मनु सिंघवी ने स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह मामला एक व्यक्ति तक सीमित नहीं बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, कानून के शासन और न्याय व्यवस्था की भूमिका से जुड़े मूल सिद्धांतों का प्रश्न है।
कांग्रेस मुख्यालय में सिंघवी ने पत्रकार वार्ता में कहा कि जब भी स्वतंत्रता का सवाल होता है, न्यायपालिका नागरिकों की संरक्षक के रूप में खड़ी होती है। सभी को यह याद रखना चाहिए कि हर व्यक्ति कानून के अधीन है और जब हम धर्म यानी कर्तव्य और न्याय की रक्षा करते हैं तो वही हमारी रक्षा करता है। यह प्रकरण कामरूप के मजिस्ट्रेट न्यायालय से शुरू होकर तेलंगाना उच्च न्यायालय और फिर उच्चतम न्यायालय तक पहुंचा। इसके बाद मामला गौहाटी उच्च न्यायालय में भी गया और अंततः सर्वोच्च न्यायालय ने इस पर निर्णय दिया। इस पूरी प्रक्रिया में कई महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न सामने आए, जिनमें सबसे अहम यह था कि क्या मानहानि जैसे मामलों में बिना गिरफ्तारी के पूछताछ संभव नहीं है।
उन्होंने कहा कि यह याद रखना चाहिए कि हर नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है और यदि राजनीतिक अभियान के दौरान दिए गए बयानों को इस तरह बड़ा मुद्दा बनाया जाएगा तो यह संविधान के अनुच्छेद 19(1)(क) के तहत मिले अधिकारों के लिए खतरा बन सकता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रशांत शेखर