अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण नेपाल की कई बड़ी परियोजनाएं ठप

युगवार्ता    12-May-2026
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नेपाल में ठप पड़ी निर्माण परियोजनाएं


काठमांडू, 12 मई (हि.स.)। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, विशेषकर ईरान और संयुक्त राज्य अमेरिका से जुड़े संघर्ष के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होने वाले वैश्विक तेल परिवहन मार्ग प्रभावित हुए हैं, जिसका असर नेपाल के निर्माण और यातायात क्षेत्र पर भी पड़ने लगा है। अधिकारियों के अनुसार पेट्रोलियम पदार्थों, विशेषकर सड़क निर्माण में उपयोग होने वाले बिटुमिन की कमी और कीमतों में वृद्धि के कारण राष्ट्रीय महत्व की कई परियोजनाओं का काम रोकना पड़ा है।

नारायणघाट–बुटवल सड़क विस्तार परियोजना के पूर्वी खंड के सूचना अधिकारी इंजीनियर शिव खनाल ने बताया कि डीजल और पेट्रोल की कीमत बढ़ने के साथ-साथ बिटुमिन की कमी का सबसे गंभीर असर पड़ा है, जिससे सड़क की अंतिम सतह बिछाने का काम ठप हो गया है। एशियाई विकास बैंक की सहायता तथा दक्षिण एशियाई उप-क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग ढांचे के तहत शुरू की गई इस परियोजना का उद्देश्य पूर्व–पश्चिम राजमार्ग के लगभग 115 किलोमीटर हिस्से को चार लेन वाले मार्ग में बदलना है।

65 किलोमीटर लंबे नारायणघाट–दाउन्ने खंड में लगभग 98 प्रतिशत संरचनात्मक और पिचिंग कार्य पूरा हो चुका है, लेकिन अंतिम ब्लैकटॉप की परत अभी बाकी है। हालांकि इस खंड में वाहनों की आवाजाही अधिकांशतः प्रभावित नहीं हुई है, लेकिन खनाल ने बताया कि ड्रेनेज, फेंसिंग और सड़क सुरक्षा संरचनाओं जैसे समापन कार्य अभी अधूरे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पहले पेड़ कटान, बिजली के खंभे हटाने, कोविड-19 महामारी और ठेकेदार संबंधी समस्याओं के कारण भी परियोजना में देरी हुई थी। लगभग 256.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर लागत वाली इस परियोजना में एडीबी का 186.8 मिलियन डॉलर का निवेश है, लेकिन अब निर्धारित समयसीमा पूरी होने पर अनिश्चितता बढ़ गई है।

इसी प्रकार नागढुंगा–मुग्लिन सड़क विस्तार परियोजना में भी काम की गति धीमी पड़ गई है। पश्चिमी खंड के सूचना अधिकारी इंजीनियर सचेंद्र मिश्र ने बताया कि 38 किलोमीटर लंबे हिस्से में अब तक केवल 42 प्रतिशत काम पूरा हुआ है, जिसमें 13 किलोमीटर सड़क का ब्लैकटॉप शामिल है। उन्होंने कहा कि बिटुमिन की बढ़ती कीमतों और आपूर्ति में कमी के कारण ठेकेदारों ने काम काफी धीमा कर दिया है।

इन दोनों परियोजनाओं से स्पष्ट होता है कि वैश्विक ऊर्जा और वस्तु बाजारों में आने वाले बाहरी झटकों का असर अब नेपाल की आधारभूत संरचना विकास परियोजनाओं, विशेषकर बड़े राजमार्ग विस्तार कार्यों, पर बढ़ता जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि ये परियोजना को प्रभावित करने वाली लगातार आने वाली समस्याओं में से केवल कुछ उदाहरण हैं। परियोजना कार्यान्वयन में शामिल सरकारी प्रतिनिधियों ने स्वीकार किया कि प्रगति मुख्य रूप से निर्माण सामग्री की कमी के कारण धीमी हुई है।

निर्माण व्यवसायी महासंघ के अध्यक्ष निकोलस पाण्डेय ने कहा, “पहले डीजल की कीमत 139 रुपये प्रति लीटर थी, जो अब 225 रुपये तक पहुंच गई है। बिटुमिन का दाम 75 रुपये से बढ़कर 155 रुपये हो गया है। सरकार को निर्माण सामग्री की आपूर्ति और मूल्य समायोजन के मुद्दे पर तत्काल कदम उठाना चाहिए।” वहीं सड़क विभाग के प्रवक्ता तथा उपमहानिर्देशक श्याम बहादुर खड्का ने कहा कि इस विषय पर सरकार के साथ लगातार चर्चा चल रही है।

उन्होंने कहा, “बिटुमिन की कमी के कारण देशभर में सड़कों के ब्लैकटॉप का काम धीमा हो गया है।” उन्होंने यह भी बताया कि ठेकेदार बढ़ी हुई लागत के अनुरूप ठेका समझौतों में संशोधन की मांग कर रहे हैं। “हम इस मुद्दे पर सरकार के साथ संवाद कर रहे हैं,” उन्होंने कहा।

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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास

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