
नई दिल्ली, 13 मई (हि.स.)। नागपुर एयरपोर्ट को नई पहचान मिलने वाली है। बुधवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आधुनिकीकरण और उन्नयन को मंजूरी दे दी है। सरकार ने एयरपोर्ट के विकास के लिए पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत निजी भागीदारी को हरी झंडी दिखाई है। इसके तहत जीएमआर नागपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड अगले 30 वर्षों तक एयरपोर्ट के विकास, संचालन और प्रबंधन का काम संभालेगी।
सरकार के इस फैसले के बाद नागपुर एयरपोर्ट को विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस करने का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।
कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए केन्द्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि यह परियोजना नागपुर में मल्टी-मॉडल अंतर्राष्ट्रीय कार्गो हब और हवाई अड्डा (मिहान) प्रोजेक्ट का अहम हिस्सा है, जिसका उद्देश्य नागपुर को मध्य भारत का बड़ा एविएशन और लॉजिस्टिक्स हब बनाना है। नई योजना के तहत एयरपोर्ट का चरणबद्ध तरीके से विस्तार किया जाएगा। भविष्य में इसकी क्षमता बढ़ाकर सालाना 3 करोड़ यात्रियों को संभालने लायक बनाई जाएगी। इसके साथ ही
यात्रियों को आधुनिक टर्मिनल और बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, कार्गो हैंडलिंग क्षमता में वृद्धि होगी
देश और विदेश के लिए कनेक्टिविटी मजबूत होगी। उन्होंने बताया कि
विदर्भ क्षेत्र में व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिलेगा
पर्यटन और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे
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उल्लेखनीय है कि साल 2009 में एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया और महाराष्ट्र एयरपोर्ट डेवलपमेंट कंपनी लिमिटेड ने मिलकर मिहान इंडिया लिमिटेड को शामिल किया। इसके बाद एयरपोर्ट के संचालन और विकास की योजना तैयार की गई।
साल 2016 में पीपीपी मॉडल के तहत निजी कंपनी चुनने के लिए ग्लोबल टेंडर जारी किया गया, जिसमें जीएमआर सबसे बड़ी बोली लगाने वाली कंपनी बनी। हालांकि बाद में यह प्रक्रिया कानूनी विवादों में फंस गई थी। मामला बोम्बे हाई कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद आखिरकार अक्टूबर 2024 में समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।
अब केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद नागपुर एयरपोर्ट के आधुनिकीकरण का काम तेजी से आगे बढ़ने की उम्मीद है।
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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी