प्रधानमंत्री मोदी के असम दौरे का व्यापक असर, तालमेल का संकेत

युगवार्ता    13-May-2026
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Prime Minister Narendra Modi in Assam on Tuesday.


गुवाहाटी, 13 मई, (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हालिया असम दौरे को राज्य की राजनीति, विकास और पूर्वोत्तर रणनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। राज्य में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव से पहले और इसके बाद जिस प्रकार प्रधानमंत्री मोदी का असम आगमन हुआ, उसका असम तथा पूर्वोत्तर की जनता पर व्यापक असर देखा जा रहा है। लोगों में यह संदेश गया है कि प्रधानमंत्री सिर्फ चुनाव के मौके पर ही नहीं, बल्कि हर मौके पर असम के साथ जुड़े रहते हैं। पूरे पूर्वोत्तर में कनेक्टिविटी से लेकर सांस्कृतिक विकास, परंपरागत संस्कृति को बाहर तक ले जाने एवं पूर्वोत्तर को पहले दर्जे पर रखने को लेकर प्रधानमंत्री की यहां विशेष छवि बन गई है। मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा के नेतृत्व में भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार के गठन के तुरंत बाद प्रधानमंत्री की मौजूदगी ने केंद्र और राज्य सरकार के बीच मजबूत तालमेल का स्पष्ट संकेत दिया है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस दौरे के जरिए भाजपा ने पूर्वोत्तर में अपने विकास आधारित एजेंडे को और मजबूती देने का प्रयास किया है। केंद्र सरकार लगातार असम को पूर्वोत्तर भारत के प्रवेश द्वार तथा आर्थिक केंद्र के रूप में स्थापित करने पर जोर देती रही है। इसी दिशा में परिवहन, ऊर्जा और संपर्क व्यवस्था से जुड़ी कई महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को गति दी जा रही है।

बीते कुछ महीनों के दौरान प्रधानमंत्री द्वारा हजारों करोड़ रुपये की विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया गया है। इनमें शिलांग–सिलचर हाई-स्पीड कॉरिडोर, असम माला 3.0 सड़क परियोजना, नुमलीगढ़ रिफाइनरी विस्तार, नॉर्थईस्ट गैस ग्रिड, रेलवे डबलिंग और जलविद्युत परियोजनाएं विशेष रूप से शामिल हैं। इन योजनाओं को पूर्वोत्तर के बुनियादी ढांचे को आधुनिक स्वरूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार इन परियोजनाओं का लाभ आने वाले वर्षों में व्यापक रूप से देखने को मिल सकता है। अपर असम, बराक घाटी तथा पड़ोसी राज्यों के बीच संपर्क व्यवस्था मजबूत होने की संभावना जताई जा रही है। साथ ही दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ व्यापार, पर्यटन और लॉजिस्टिक्स गतिविधियों को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।

विश्लेषकों का कहना है कि सड़क, रेल और जलमार्ग नेटवर्क के विस्तार से उद्योगों, कृषि क्षेत्र और माल परिवहन व्यवस्था को भी बड़ा लाभ मिलेगा। ऊर्जा और आधारभूत संरचना परियोजनाओं के जरिए रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना व्यक्त की जा रही है, जिससे युवाओं और स्थानीय कारोबार को बढ़ावा मिल सकता है।

प्रधानमंत्री मोदी के लगातार असम दौरों को राजनीतिक स्थिरता और विकास की निरंतरता के प्रतीक के रूप में भी देखा जा रहा है। ब्रह्मपुत्र नद पर निर्माणाधीन पुल, एक्सप्रेसवे और रेलवे विस्तार योजनाओं को केंद्र सरकार पूर्वोत्तर भारत के बदलते स्वरूप की पहचान के तौर पर प्रस्तुत कर रही है।

चाय बागान भूमि अधिकार, ग्रामीण संपर्क और रणनीतिक बुनियादी ढांचे पर केंद्र का विशेष फोकस राज्य के ग्रामीण मतदाताओं, चाय जनजातियों, युवाओं और व्यापारिक समुदाय के बीच भाजपा की पकड़ मजबूत करने की दिशा में भी अहम माना जा रहा है।

हिन्दुस्थान समाचार / श्रीप्रकाश

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