

- गोयल ने उद्योग जगत से लीक से हटकर सुधार के विचारों का किया आह्वान
नई दिल्ली, 19 मई (हि.स)। वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को 'विकसित भारत' की यात्रा को गति देने के लिए उद्योग और सरकार के बीच सहयोग का आह्वान किया। इसके साथ ही उन्होंने वैश्विक अनिश्चितताओं को सुधार और सुदृढ़ विकास के अवसरों में बदलने का आग्रह किया।
नई दिल्ली में एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (एसोचैम) के 'इंडिया बिजनेस रिफॉर्म समिट' को संबोधित करते हुए गोयल ने 'ईज ऑफ डूइंग बिज़नेस' (व्यापार करने में आसानी) को बढ़ावा देने, भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने और 'विकसित भारत' की ओर देश की यात्रा को तेज करने के लिए उद्योग और सरकार के बीच और अधिक गहरे सहयोग का आह्वान किया। गोयल ने कहा कि मौजूदा वैश्विक स्थिति और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं को भारत के लिए एक अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए, ताकि वह अपनी व्यावसायिक प्रक्रियाओं को मज़बूत कर सके, तेजी से सुधार कर सके, अधिक लचीलापन ला सके और अपनी आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुदृढ़ बना सके। उन्होंने भारत की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने और 'विकसित भारत 2047' की ओर देश की यात्रा को तेज़ करने के लिए उद्योग और सरकार के बीच गहरे सहयोग का आह्वान किया।
व्यापारियों से सतर्क रहने और घबराहट से बचने का आग्रह करते हुए मंत्री ने कहा कि भारत ने कोविड-19 जैसी अप्रत्याशित चुनौतियों पर सफलतापूर्वक काबू पाया है। उन्होंने अधिक स्मार्ट और कुशल व्यावसायिक तरीकों की आवश्यकता पर ज़ोर दिया, जिसमें कचरा कम करना, उत्पादकता बढ़ाना और ऊर्जा दक्षता के उपायों को अपनाना शामिल है। गोयल ने बताया कि देश में लगभग 1,800 ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) काम कर रहे हैं। मंत्री ने कहा कि ये जीसीसी लगभग 20 लाख प्रत्यक्ष नौकरियां और लगभग 1 करोड़ अप्रत्यक्ष नौकरियां पैदा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कंपनियां भारत को एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में तेज़ी से पहचान रही हैं, जिसके पास वैश्विक ऑपरेशन्स को सहयोग देने में सक्षम युवा और प्रतिभाशाली मानवशक्ति मौजूद है।
मंत्री ने निर्यातकों से आगे यह भी आग्रह किया कि वे नए बाजारों की तलाश करके, सैंपलिंग और ट्रायल ऑर्डर करके, और समझौतों के औपचारिक रूप से लागू होने से पहले ही वैश्विक जुड़ाव बढ़ाकर, आने वाले एफटीए का सक्रिय रूप से लाभ उठाएं।
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर