93 के हुए रस्किन बॉन्ड, परिवार संग सादगी से मनाया जन्मदिन

युगवार्ता    19-May-2026
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रस्किन बॉन्ड प्रतीकात्मक चित्र।


मसूरी, 19 मई (हि. स.)। पहाड़ों की रानी मसूरी की पहचान बन चुके विश्वप्रसिद्ध अंग्रेजी लेखक पद्मश्री एवं पद्म भूषण सम्मानित रस्किन बॉन्ड मंगलवार को 93 वर्ष के हो गए। इस बार उनका जन्मदिन बेहद सादगी के साथ देहरादून स्थित आवास पर परिवार के बीच मनाया गया। स्वास्थ्य संबंधी कारणों से इस बार वह मसूरी नहीं पहुंच सके, जिससे उनके हजारों प्रशंसकों में हल्की मायूसी जरूर देखने को मिली। रस्किन बॉन्ड का नाम सुनते ही लोगों के जेहन में मसूरी की धुंध, बारिश, देवदार के जंगल, पुरानी गलियां और पहाड़ों की सादगी जीवंत हो उठती है।

उन्होंने अपनी लेखनी से न केवल मसूरी को साहित्य के नक्शे पर अलग पहचान दिलाई, बल्कि पहाड़ी जीवन की आत्मा को भी दुनिया के सामने बेहद संवेदनशील अंदाज में प्रस्तुत किया। पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों के चलते चिकित्सकों की सलाह पर उन्हें मसूरी से देहरादून शिफ्ट किया गया है। परिवार के अनुसार उनका स्वास्थ्य फिलहाल स्थिर है और वह चिकित्सकीय निगरानी में हैं। उनके पुत्र राकेश बॉन्ड ने बताया कि इस बार जन्मदिन घर पर ही सादगी के साथ मनाया गया। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों की सलाह पर फिलहाल उन्हें देहरादून में रखा गया है।

मसूरी माल रोड स्थित प्रसिद्ध पुस्तक दुकान पर हर वर्ष उनके जन्मदिन पर विशेष आयोजन होता था। देशभर से साहित्य प्रेमी केवल रस्किन बॉन्ड की एक झलक पाने और उनसे ऑटोग्राफ लेने मसूरी पहुंचते थे। वह अपने प्रशंसकों से बेहद आत्मीयता से मिलते, किताबों पर हस्ताक्षर करते और बच्चों से खास बातचीत भी करते थे। इस बार उनके मसूरी नहीं पहुंच पाने से पर्यटकों और स्थानीय लोगों में निराशा जरूर दिखी, लेकिन लोगों ने उनके स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की कामना की। सोशल मीडिया पर भी दिनभर उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं देने वालों का सिलसिला जारी रहा।

19 मई 1934 को हिमाचल प्रदेश के कसौली में जन्मे रस्किन बॉन्ड का बचपन पहाड़ों के बीच बीता। उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा शिमला और देहरादून में प्राप्त की। बेहद कम उम्र में उन्होंने लेखन शुरू कर दिया था। उनको जॉन लेवेलिन रीस पुरस्कार मिला, जिसने उन्हें अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उनकी लेखनी में पहाड़ों की मासूमियत, अकेलापन, दोस्ती, प्रकृति और इंसानी भावनाओं का अनूठा मिश्रण देखने को मिलता है।

रस्किन बॉन्ड की कहानियां हर आयु वर्ग के पाठकों के बीच लोकप्रिय हैं। उनकी प्रमुख पुस्तकों में ब्लू अम्ब्रेला, स्टी सीरीज़, ख्टाइम स्टॉप्स एट शामली, अवर ट्रीज़ स्टिल ग्रो इन देहरादून, अ फ़्लाइट ऑफ़ पिजन्स, और ख्दिल्ली इज़ नॉट फ़ार,शामिल हैं। उनकी कई कहानियों पर फिल्में और टीवी धारावाहिक भी बन चुके हैं। नीला छाता और 7 खून माफ जैसी फिल्मों ने उनकी रचनाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाया।

रस्किन बॉन्ड पिछले कई दशकों से मसूरी में रह रहे थे और उन्होंने हमेशा कहा कि पहाड़ ही उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा हैं। मसूरी की बारिश, जंगल, बंदर, पहाड़ी बच्चे और यहां की शांत जिंदगी उनकी कहानियों के स्थायी पात्र रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि रस्किन बॉन्ड केवल लेखक नहीं बल्कि मसूरी की सांस्कृतिक पहचान हैं। उनकी वजह से देश-दुनिया के हजारों लोग मसूरी को करीब से जान पाए। साहित्य प्रेमियों का मानना है कि रस्किन बॉन्ड की लेखनी आने वाली पीढ़ियों को भी प्रकृति, संवेदनशीलता और इंसानी रिश्तों की अहमियत सिखाती रहेगी।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश कुमार पांडेय

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