जब जैव विविधता समृद्ध होगी तो मानवता भी होगी समृद्ध : भूपेंद्र यादव

युगवार्ता    22-May-2026
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केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने भोपाल में इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस प्री-समिट को किया संबोधित


मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं केंद्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव ने व्हीकल को दिखाई हरी झंडी


मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने साहित्य, रिपोर्ट्स का किया विमोचन


केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने भोपाल में डाक टिकट का विमोचन किया


भोपाल, 22 मई (हि.स.) । केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने शुक्रवार को कहा कि इंदौर को 'वेटलैंड सिटी' घोषित किया गया है और देश में जल्द ही रामसर साइट्स की संख्या बढ़कर 100 होने वाली है, जिनमें से 94 साइट्स अब तक घोषित की जा चुकी हैं। उन्होंने 'एक्ट लोकली, थिंक ग्लोबली' का मंत्र देते हुए कहा कि विकास और पर्यावरण का संतुलन तभी संभव है जब सोसाइटी, पॉलिसीमेकर्स, वैज्ञानिक और सिविल सोसाइटी मिलकर प्रयास करें। उन्होंने कहा कि जब जैव विविधता समृद्ध होगी तो मानवता समृद्ध होगी।

केंद्रीय मंत्री यादव अंतरराष्ट्रीय जैव विविधता दिवस के मौके पर शुक्रवार को मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित भारतीय वन प्रबंधन संस्थान (आईआईएफएम) के ऑडिटोरियम में 'इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस' (आईबीसीए) प्री-समिट इवेंट के शुभारंभ पर संबोधित कर रहे थे। इस कार्यक्रम का उद्घाटन मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री यादव ने दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यक्रम की शुरुआत में मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री ने वन्यजीवों की सुरक्षा और त्वरित रेस्क्यू ऑपरेशन्स के लिए वन विभाग की 20 विशेष बाइक और एक अत्याधुनिक रेस्क्यू ट्रक को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

उन्होंने कहा कि भोजन की थाली में विविधता का उदाहरण देते हुए समझाया कि जैसे एक ही तरह का भोजन नीरस होता है, वैसे ही प्रकृति में भी विविधता ही जीवन का आधार है। उन्होंने 'प्रोजेक्ट चीता' की सफलता का जिक्र करते हुए कहा कि चीता ग्रासलैंड (घास के मैदानों) को पुनर्जीवित करता है, जो जल संरक्षण के लिए बेहद जरूरी हैं। वहीं, टाइगर न सिर्फ अपनी टेरिटरी बल्कि हमारी नदियों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों की भी रक्षा करते हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि धरती का कम से कम 30 प्रतिशत हिस्सा स्थायी रूप से रिजर्व क्षेत्र के रूप में सुरक्षित किया जाना चाहिए।

यादव ने आर्थिक एवं सामाजिक पहलुओं को जोड़ते हुए कहा कि देश की जीडीपी का आधे से अधिक हिस्सा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से बायो-डायवर्सिटी से जुड़ा है। हमारी दवाइयां, फल और औषधीय वनस्पतियों का निर्यात इसी की बदौलत है। यदि जैव विविधता कमजोर हुई तो देश में खाद्य सुरक्षा का संकट खड़ा हो जाएगा। उन्होंने भोपाल गैस त्रासदी के यूनियन कार्बाइड कचरे के सफल निस्तारण के लिए मुख्यमंत्री डॉ. यादव की पीठ थपथपाई और ग्रामीण स्तर पर समितियां बनाकर स्थानीय लोगों को पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ सामाजिक-आर्थिक लाभ देने की वकालत की।

समिट के दौरान इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस के महानिदेशक डॉ. एसपी यादव और मध्य प्रदेश वन विभाग द्वारा भारत में चीता पुनर्स्थापन अभियान को लेकर विशेष प्रेजेंटेशन दिए गए। इस मौके पर कई महत्वपूर्ण प्रकाशनों और डिजिटल पहलों की शुरुआत की गई, जिनमें विशेष डाक टिकट का विमोचन, ‘इंडियाज बायोडायवर्सिटी रिपोर्ट 2026’ का विमोचन, नागोया प्रोटोकॉल पर भारत की पहली राष्ट्रीय रिपोर्ट और एबीएस (एबीएस) एंड-टू-एंड वेब पोर्टल का लोकार्पण किया गया। अमरकंटक बायोडायवर्सिटी हेरिटेज साइट और मध्य प्रदेश के पवित्र वनों (देवस्थानों) के संरक्षण पर आधारित लघु फिल्मों का प्रदर्शन भी हुआ।

कार्यक्रम में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्यमंत्री कीर्ति वर्धन सिंह और मप्र के वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार विशेष रूप से मौजूद रहे। इस समिट का संयुक्त आयोजन भारत सरकार के वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण, मप्र शासन, आईबीसीए (आईबीसीए) और आईआईएफएम द्वारा किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य वन्यजीव सुरक्षा और वैश्विक प्रतिबद्धताओं को लेकर जन-जागरूकता बढ़ाना है।

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हिन्दुस्थान समाचार / उम्मेद सिंह रावत

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