देश के विभाजन के समय संघ की शक्ति उतनी नहीं थी अन्यथा देश का विभाजन भी नहीं होताः सुनील आंबेकर

युगवार्ता    22-May-2026
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संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर और दिल्ली प्रांत के संघचालक अनिल अग्रवाल


नई दिल्ली, 22 मई (हि.स.)। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने शुक्रवार को कहा कि 1942 से 1947 के बीच दिल्ली एवं सम्पूर्ण पंजाब में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का तेजी से तथा बहुत गहराई से विस्तार हुआ। बड़ी संख्या में लोग संघ के साथ जुड़कर कार्य करने लगे तथापि देश के विभाजन के समय संघ की शक्ति उतनी नहीं थी अन्यथा देश का विभाजन भी नहीं होता।

आंबेकर दिल्ली में शुक्रवार को इंद्रप्रस्थ विश्व संवाद केंद्र की ओर से प्रस्तुत डाक्यूमेंट्री “दिल्ली में संघ यात्रा” के प्रदर्शन के अवसर पर बोल रहे थे।

उन्होंने कहा कि जैसा डॉक्यूमेंट्री में भी प्रस्तुत किया गया उस समय गुरुजी का निर्देश था कि विभाजन के बाद जो नया पाकिस्तान बन गया, उस क्षेत्र में जो हिंदू हैं, उनकी पूरी तरह रक्षा होनी चाहिए और अंतिम व्यक्ति सुरक्षित रूप से आने तक स्वयंसेवक डटे रहें। इस कार्य में कितने अनगिनत स्वयंसेवकों का बलिदान हुआ, कितने लोगों को कष्ट हुआ, उसकी कोई गिनती नहीं है। विस्थापितों के लिए बहुत सारे कैंप्स लगाए गए उसमें कई लाख लोग रहे। अगस्त 1947 के पहले पखवाड़े में जब यहां सारी उथल-पुथल में सब लोग व्यस्त थे, तब गुरुजी कराची में थे, उधर सारे स्वयंसेवकों का मार्गदर्शन कर रहे थे कि किस तरीके से हिन्दू समाज की सुरक्षा का यह सारा कार्य किया जाए।

आंबेकर ने कहा कि अगर संघ, डॉक्टर हेडगेवार को राजनीति करनी होती तो वह एक नया राजनैतिक दल शुरू कर देते लेकिन उन्हें तो समाज को खड़ा करना था, पूरे समाज में एक सांस्कृतिक जागरण करना था और इसीलिए उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ बनाया। समाज की सेवा, समाज का उत्थान, समाज को एक मजबूती के साथ खड़े करना, एक पूरे राष्ट्र को अपनी स्वयं के बल पर एक आत्मविश्वास के साथ खड़े करना, यही उसका उद्देश्य था।

सुनील आंबेकर ने कहा कि दिल्ली में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्य का शुभारंभ संघ का प्रारंभिक काल में ही हो गया था। स्वयं आद्य सरसंघचालक डॉक्टर हेडगेवार, जिन्होंने संघ की स्थापना की, उनके समय काल में ही दिल्ली में संघ कार्य प्रारंभ हुआ था। इसलिए संघ के 100 साल के इतिहास से दिल्ली का संघ कार्य बिल्कुल गहराई से जुड़ा हुआ है।

इतने वर्षों में देश के पटल पर जितनी भी घटनाएं हुईं, उन सब घटनाओं में दिल्ली का अपना एक महत्व रहा और स्वाभाविक रूप से दिल्ली में जो संघ कार्य रहा उसका भी अपना एक महत्वपूर्ण स्थान, पूर्ण योगदान उस सारी प्रक्रिया में रहा। जहां सत्ता का केंद्र होने के नाते दलों की राजनीति का भी केंद्र दिल्ली सतत बना रहा, स्वाधीनता के पश्चात भी। उस परिस्थिति में, उस दौर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने शाखाओं के माध्यम से एक सामाजिक, सांस्कृतिक संगठन जो केवल अपने कुछ कार्यक्रमों तक सीमित न रहते हुए समस्त समाज को संगठित करने के ध्येय को लेकर चल पड़ा तथा यह कार्य लगातार अभी तक चलता आया।

इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दिल्ली प्रांत संघचालक डॉ. अनिल अग्रवाल ने कहा कि निरन्तरता और अनुकूलनशीलता संघ कार्य की विशेषता है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दिल्ली प्रांत प्रचार प्रमुख रीतेश अग्रवाल ने कहा कि इंद्रप्रस्थ विश्व संवाद केंद्र द्वारा प्रस्तुत यह डॉक्यूमेंट्री दिल्ली में संघ के बीजारोपण से लेकर उसके विस्तार तक की कहानी को साक्ष्यों, स्मृतियों और ऐतिहासिक घटनाओं के माध्यम से प्रस्तुत करती है। इसमें दिल्ली में संघ की शुरुआत, विभाजन का दर्द और उसकी विभीषिका के बीच किए गए संघ कार्य का चित्रण है। दिल्ली की पहली शाखा से आरम्भ होकर यह फिल्म आज की दिल्ली में संघ के व्यापक विस्तार तक की यात्रा को दर्शाती है। उन्होंने संघ शताब्दी वर्ष पर अपनी दिल्ली अपनी बात द्वारा प्रकाशित विशेषांक “राष्ट्र सेवा के 100 वर्ष” की भी चर्चा की।

रीतेश अग्रवाल ने बताया कि पत्रिका के विशेषांक एवं डाक्यूमेंट्री के लिए दिल्ली के 60 से अधिक वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के औपचारिक एवं अनौपचारिक साक्षात्कार लिए गए, 85 से अधिक पुस्तकों का अध्ययन किया गया, समाचार पत्रों और लेखों को खंगाला गया तथा विभिन्न अभिलेखागार से सामग्री एकत्र की गई। इस प्रक्रिया में 100 घंटे से अधिक की वीडियो फुटेज देखी गई। इन्द्रप्रस्थ विश्व संवाद केंद्र के अभिलेखागार से पुराने वीडियो और साक्षात्कार देखे गए। पूर्व संघ अधिकारियों और सरसंघचालकों के भाषणों, साक्षात्कारों और उपलब्ध फुटेज का भी अध्ययन किया गया।

इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के केन्द्रीय कार्यालय सचिव अशोक पोरवाल, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दिल्ली प्रांत प्रचारक विशाल, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दिल्ली प्रांत सह कार्यवाह राजेश कुमार, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के केन्द्रीय कार्यालय व्यवस्था टोली सदस्य दिलीप तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तर क्षेत्र कार्यालय सचिव राजवीर, इंद्रप्रस्थ विश्व संवाद केंद्र के अध्यक्ष अशोक सचदेवा इत्यादि की गरिमामयी उपस्थिति रही।

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हिन्दुस्थान समाचार / अनूप शर्मा

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