दुनिया के दूसरे देशों से भारत में अब भी पेट्रोल-डीजल सस्ता, ज्यादा कीमतों की वजह राज्यों का वैट

युगवार्ता    23-May-2026
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पेट्रोल-डीजल के लोगो का प्रतीकात्मक चित्र


नई दिल्ली, 23 मई (हि.स)। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल एवं विपणन कंपनियां देश में पिछले दस दिनों के भीतर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तीन बार बढ़ोतरी कर चुकी हैं। पश्चिम एशिया संकट और 28 फरवरी 2026 को होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से लेकर 15, 19 एवं 23 मई को कीमतों में हुई बढ़ोतरी के बाद पेट्रोल-डीजल करीब पांच रुपये महंगे हो चुके हैं, लेकिन दुनिया के अन्य देशों की तुलना में भारत में सबसे कम बढ़ोतरी है, यहां पेट्रोल पंप पर मिलने वाले ईंधन की कीमत दुनिया में सबसे कम कीमतों में से एक है।

ग्लोबल पेट्रोल प्राइस डाट काम के आंकड़ों के अनुसार 28 फरवरी को होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से लेकर 15, 19 एवं 23 मई को ऑयल मार्केटिंग कंपनी (ओएमसी) में हुए बदलावों तक के 76 दिनों के दौरान भारत ने पेट्रोल और डीजल के दाम में लगभग कोई बदलाव नहीं किया, जबकि दुनिया के बाकी हिस्सों में इसकी कीमतें 10, 20, 50 और कुछ अन्य देशों में 90 फीसदी तक बढ़ गईं। मई में पेट्रोल-डीजल के दाम में तीन बार हुए बदलावों को मिलाकर भारत में कुल बढ़ोतरी 5 रुपये प्रति लीटर से थोड़ी ही कम रही। इससे भारत में खुदरा कीमतों में कुल मिलाकर लगभग 5 फीसदी की बढ़ोतरी हुई, जो लगभग 95 रुपये के आधार मूल्य पर पेट्रोल के लिए 4.74 रुपये प्रति लीटर और डीजल के लिए 4.82 रुपये प्रति लीटर के बराबर है।

पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार हो रहे इजाफे को देखकर आम जनता का परेशान होना स्वाभाविक है, लेकिन वैश्विक स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें आसमान को छू रही हैं, जबकि होर्मुज जलडमरूमध्य संकट की वजह से तेल की सप्लाई चेन पूरी तरह चरमरा गई है। भारत में पेट्रोल-डीजल महंगा होने का असल कारण केंद्र सरकार के लगाए जाने वाला टैक्स नहीं, बल्कि राज्यों द्वारा वसूले जाना वाला वैट और स्थानीय कर हैं।

ग्लोबल पेट्रोल प्राइस डाट काम के मुताबिक नीचे दी गई तालिका में 23 फरवरी से मई 2026 के बीच स्थानीय मुद्रा में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में देश-वार फीसदी में परिवर्तन को दिखाया गया है। इसके साथ ही मई 2026 के मध्य से लेकर अभी तक की 'होर्मुज के बाद' की वास्तविक पंप कीमतें भी भारतीय रुपये के समतुल्य मान में दी गई हैं। ये तुलना दो पहलुओं पर आधारित है। भारत में कीमतों में फीसदी वृद्धि सबसे कम रही, जबकि सब्सिडी न देने वाली अर्थव्यवस्थाओं में भारत की वास्तविक कीमतें भी सबसे निचले स्तरों में से एक हैं।

देश---------पेट्रोल-------—-डीजल------कीमत में बदलाव रुपये में क्रमश:

हांगकांग--+12.6 फीसदी, +14.8 फीसदी----268 रुपये और 245 रुपये

नीदरलैंड----+18.4 फीसदी, +25.6 फीसदी, 235 रुपये और 225 रुपये

डेनमार्क-----+15.3 फीसदी, +24.0 फीसदी, 218 रुपये और 202 रुपये

जर्मनी-------+15.6 फीसदी, +21.5 फीसदी, 210 रुपये और 192 रुपये

फ्रांस--------+22.1 फीसदी, +30.2 फीसदी, 198 रुपये और 190 रुपये

इटली-------+16.8 फीसदी, +22.4 फीसदी, 197 रुपये और 188 रुपये

यूके--- +18.4 फीसदी, +34.0 फीसदी, 170 रुपये और 203 रुपये

बेल्जियम-----+25.3 फीसदी, +30.9 फीसदी, 186 रुपये और 180 रुपये

स्विट्जरलैंड-----+11.4 फीसदी, +14.6 फीसदी, 181 रुपये और 168 रुपये

सिंगापुर-----+12.7 फीसदी, +64.7 फीसदी, 178 रुपये और 172 रुपये

न्यूजीलैंड-----+30.7 फीसदी, +88.6 फीसदी, 172 रुपये और 165 रुपये

दक्षिण कोरिया-----+19.0 फीसदी, +26.2 फीसदी, 162 रुपये और 148 रुपेय

ऑस्ट्रेलिया----+18.5 फीसदी, +43.1 फीसदी, 158 रुपये और 165 रुपये

जापान------+9.7 फीसदी, +11.2 फीसदी, 152 रुपये और 138 रुपये

थाईलैंड-----+29.7 फीसदी, +32.4 फीसदी, 140 रुपये और 128 रुपये

म्यांमार----- +89.7 फीसदी, +112.7 फीसदी, 141 रुपये और 148 रुपये

श्रीलंका------ +38.2 फीसदी, +41.8 फीसदी, 140 रुपये और 125 रुपये

नेपाल----- +38.2 फीसदी, +58.5 फीसदी, 136 रुपये और 132 रुपये

पाकिस्तान----+54.9 फीसदी, +44.9 फीसदी, 136 रुपये और 136 रुपये

फिलीपींस-----+40.6 फीसदी, +53.8 फीसदी, 132 रुपये और 126 रुपये

कनाडा-------+31.9 फीसदी, +32.8 फीसदी, 130 रुपये और 128 रुपये

चीन-------+21.7 फीसदी, +23.7 फीसदी, 126 रुपये और 118 रुपये

दक्षिण अफ्रीका----+33.1 फीसदी, +63.6 फीसदी, 125 रुपये और 128 रुपये

अमेरिका----+44.5 फीसदी, +48.1 फीसदी, 110 रुपये और 118 रुपये

बांग्लादेश-----+16.7 फीसदी, +15.0 फीसदी, 109 रुपये और 95 रुपये

वियतनाम-----+23.8 फीसदी, +50.6 फीसदी, 105 रुपये और 98 रुपये

यूएई----+52.4 फीसदी, +86.1 फीसदी, 98 रुपये और 94 रुपये

इंडोनेशिया-----+18.0 फीसदी, +28.5 फीसदी, 96 रुपये और 88 रुपये

मलेशिया-----+56.3 फीसदी, +71.2 फीसदी, 74 रुपये और 72 रुपये

भारत (औसत, 23 मई)---+5.0 फीसदी, +5.3 फीसदी, 95–118 रुपये और (राज्य-निर्भर) 89–105 रुपये

ग्लोबल वेटेड एवरेज---+22.4 फीसदी, +27.0 फीसदी, 130 रुपये और 134 रुपये

पेट्रोल-डीजल की कीमतें ज्यादा होने की वजह राज्य-स्तरीय वैट हैं, जहां इनकी कीमतें असल में अलग होती हैं। पेट्रोल और डीजल पर केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी लगाती है, जो पूरे देश में समान होती है लेकिन राज्यों द्वारा लगाए जाने वाले वैट और सेस के कारण हर राज्य में पेट्रोल और डीजल का दाम बदल जाता है। कई राज्यों में वैट 20 फीसदी है, जबकि कुछ में 30 फीसदी या उससे ज्यादा हैं।

देश में गैरभाजपा शासित राज्यों में पेट्रोल-डीजल ज्यादा महंगा है। तेलंगाना, केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में इनकी कीमतें सबसे अधिक है। इन चार राज्यों में से केवल आंध्र प्रदेश में राजग की सरकार है, जबकि बाकी जगह गैर-भाजपा सरकार है। पेट्रोल और डीजल की कीमतें इसलिए अलग-अलग होती हैं, क्योंकि प्रत्येक राज्य सरकार अलग से वैल्यू एडेड टैक्स (वैट) लगाती है। जिन राज्यों में वैट सबसे ज्यादा है, वे राज्य 30 फीसदी यानी उससे ज्यादा की प्रभावी दरें लगाते हैं, जिसमें प्रति लीटर अतिरिक्त शुल्क और इंफ्रास्ट्रक्चर सेस भी शामिल होते हैं। इसके अलावा जिन राज्यों में वैट सबसे कम है, वे 20 फीसदी के करीब दरें लगाते हैं। इनमें न तो प्रति लीटर कोई अतिरिक्त शुल्क होता है और न ही कोई और सेस।

ग्लोबल पेट्रोल प्राइस डाट काम के अनुसार जिन राज्यों में पेट्रोल की कीमतें 112 रुपये प्रति लीटर से ऊपर पहुंच चुकी है, उन राज्यों द्वारा ईंधन पर ज्यादा वैट और स्थानीय कर लगाने से पेट्रोल-डीजल ज्यादा महंगे हैं, उनमें आंध्र प्रदेश में 31 फीसदी वैट के साथ 4 रुपये प्रति लीटर अतिरिक्त शुल्क और रोड सेस लागू है, जिससे टैक्स की दर 35 फीसदी तक पहुंच जाती है। तेलंगाना में पेट्रोल 116 रुपये प्रति लीटर के करीब है, जबकि केरल मूल वैट के ऊपर सोशल सिक्योरिटी सेस भी वसूल रहा है। इसके अलावा भाजपा शासित राज्यों गुजरात, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, गोवा और असम में पेट्रोल और डीजल काफी सस्ता है। इन सभी राज्यों में पेट्रोल का भाव 102 रुपये प्रति लीटर और उससे कम ही है, जबकि 27 मार्च 2026 को केंद्र सरकार ने 10 रुपये प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी घटाई थी।

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हिन्दुस्थान समाचार / प्रजेश शंकर

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