
कोलकाता, 30 मई (हि.स.)। सार्वजनिक क्षेत्र की अग्रणी शिपबिल्डिंग कंपनी गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स लिमिटेड ने अंतरराष्ट्रीय जहाज निर्माण के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। कंपनी ने जर्मनी की शिपिंग कंपनी कार्सटन रेहडर के लिए बनाए जा रहे बहुउद्देश्यीय मालवाहक पोत परियोजना के चौथे जहाज की कील रखकर वैश्विक समुद्री बाजार में देश का मान बढ़ाया है।
कंपनी ने शनिवार को बताया कि यह परियोजना इस भारतीय शिपयार्ड के इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा वाणिज्यिक निर्यात जहाज निर्माण ऑर्डर है। यह सफलता वैश्विक मंच पर भारतीय शिपयार्ड की मजबूत होती उपस्थिति को रेखांकित करने के साथ ही 'मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड' पहल के अनुरूप भारत की उन्नत जहाज निर्माण क्षमता को भी प्रदर्शित करती है।
इस महत्वपूर्ण कील स्थापना समारोह में कंपनी के कार्यकारी निदेशक (वाणिज्यिक जहाज निर्माण एवं आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन) एम. वेंकटेश मूर्ति, शिपयार्ड के वरिष्ठ अधिकारी, जर्मन कंपनी के प्रतिनिधि तथा अंतरराष्ट्रीय वर्गीकरण संस्था डीएनवी के अधिकारी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
उल्लेखनीय है कि दोनों कंपनियों के बीच सहयोग की शुरुआत साल 2024 में चार बहुउद्देश्यीय पोतों के निर्माण के अनुबंध के साथ हुई थी, जिसे बाद में बढ़ाकर कुल 12 पोतों तक कर दिया गया। इसी कड़ी में सितंबर 2025 में नौवें से बारहवें हाइब्रिड प्रणोदन (मिश्रित ईंधन तकनीक) वाले पोतों के लिए अंतिम अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए थे।
'कोरल 7500 डीडब्ल्यूटी' श्रेणी के ये आधुनिक पोत 120 मीटर लंबे, 17 मीटर चौड़े और 5.85 मीटर ड्राफ्ट वाले होंगे, जिनकी माल ढोने की क्षमता लगभग सात हजार 500 मीट्रिक टन होगी। इन्हें बल्क कार्गो, सामान्य माल, भारी उपकरणों, कंटेनरों और पवन ऊर्जा संयंत्रों के विशाल ब्लेडों के परिवहन के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता