
कोलकाता, 09 मई (हिं.स.)। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस प्रमुख व पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बार फिर अपने बयान से राज्य की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। उन्होंने कहा है कि राज्य में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए यदि जरूरत पड़ी तो वह वाम दलों से सहयोग लेने में भी कोई आपत्ति नहीं करेंगी।
ममता बनर्जी ने यह बयान कोलकाता के कालीघाट स्थित अपने आवास के निकट आयोजित रवीन्द्रनाथ टैगोर जयंती समारोह के दौरान दिया। इस अवसर पर वह अपनी पार्टी के कई विधायकों के साथ कार्यक्रम में शामिल हुईं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा और बंगाल के हितों की सुरक्षा के लिए सभी राजनीतिक दलों को वैचारिक मतभेदों से ऊपर उठकर काम करना होगा। उन्होंने भाजपा विरोधी दलों से एकजुट होने की अपील करते हुए संकेत दिया कि राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए “अति वामपंथी” विचारधारा के साथ भी संवाद संभव है, यदि उसका उद्देश्य भाजपा को रोकना हो।
ममता बनर्जी ने दावा किया कि कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक व दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सहित कई विपक्षी नेताओं ने उन्हें फोन कर समर्थन का भरोसा दिया है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में राजनीतिक कार्यक्रमों में भीड़ कम दिखाई दे सकती है, लेकिन जनता का समर्थन उनके साथ है। मुख्यमंत्री ने छात्र संगठनों, गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ), सामाजिक संस्थाओं और स्वयंसेवी समूहों से भी इस अभियान में शामिल होने की अपील की। हालांकि, उन्होंने व्यापारिक वर्ग की भूमिका को लेकर संदेह व्यक्त करते हुए कहा कि उनके हित अक्सर अलग होते हैं।
कार्यक्रम के दौरान ममता बनर्जी ने रवीन्द्रनाथ टैगोर को श्रद्धांजलि अर्पित की और सांस्कृतिक एकता तथा सामाजिक समरसता पर जोर दिया। इस दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से तीन स्थानों पर रवीन्द्र जयंती कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति नहीं दी गई।
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हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता