‘ब्रिक्स सांस्कृतिक बैठक’ में जलवायु परिवर्तन रोकने में 'पारंपरागत प्रथाओं’ की भूमिका पर होगी चर्चा : विवेक अग्रवाल

युगवार्ता    01-Jun-2026
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संस्कृति मंत्रालय के सचिव विवेक अग्रवाल के साथ अन्य लोग मौजूद।


नई दिल्ली, 01 जून (हि.स.)। संस्कृति मंत्रालय के सचिव विवेक अग्रवाल ने सोमवार को कहा कि इस बार ‘ब्रिक्स सांस्कृतिक बैठक’ वैश्विक जलवायु परिवर्तन को रोकने में मददगार ‘दुनिया भर की पारंपरिक और स्वदेशी सांस्कृतिक प्रथाओं’ की भूमिका पर विशेष चर्चा होगी।

सचिव विवेक अग्रवाल आज दिल्ली स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र (आईजीएनसीए) में आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने भारत की अध्यक्षता में आयोजित होने जा रहे ब्रिक्स (ब्रिकस) 2026 के 'सांस्कृतिक मंच' के आगामी कार्यक्रमों और प्राथमिकताओं रूपरेखा को साझा किया।

भारत इस साल संस्कृति मंत्रियों की अंतिम बैठक की मेजबानी मध्य प्रदेश के भोपाल में करने जा रहा है जबकि इससे पहले उत्तर प्रदेश के वाराणसी में एक महत्वपूर्ण तकनीकी बैठक आयोजित की जाएगी, जहां साझा घोषणा पत्र के लिए 'जीरो ड्राफ्ट' तैयार होगा। इस बैठक का उद्देश्य ब्रिक्स देशों के बीच सांस्कृतिक सहयोग और लोगों से लोगों के बीच संपर्क को मजबूत करना। इनमें प्रमुख क्षेत्र विरासत, रचनात्मक उद्योग, संग्रहालय, अभिलेखागार और डिजिटल संस्कृति शामिल है।

विवेक ने कहा, “भारतीय संस्कृति में पर्यावरण संरक्षण रची-बसी है। उदाहरण के तौर पर 'छठ महापर्व' में प्रकृति (नदी, पानी, सूर्य) की पूजा की जाती है। ऐसी सांस्कृतिक प्रथाएं कैसे वैश्विक स्तर पर जलवायु परिवर्तन को रोकने में मददगार हो सकती हैं, इस पर मंथन होगा।”

उन्होंने कहा, इस बार ब्रिक्स सांस्कृतिक मंच केवल पारंपरिक चर्चाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि समकालीन और आर्थिक विषयों को प्रमुखता दी जाएगी। वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में सांस्कृतिक क्षेत्र का योगदान लगातार बढ़ रहा है, जो कुछ देशों में जीडीपी (जीडीपी) का 5-7 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। ब्रिक्स देशों के बीच सांस्कृतिक समन्वय और जन-आंदोलन के माध्यम से रचनात्मक उद्योगों को नई गति दी जाएगी। मुख्य रूप से अर्थव्यवस्था में संस्कृति की भागीदारी बढ़ाने और भारत से जुड़े प्रमुख नीतिगत मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। इसके अलावा, वर्तमान समय के सबसे संवेदनशील विषय 'एआई के प्रभाव' पर चर्चा होगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि एआई का उपयोग सकारात्मक हो और यह इंसानी व बौद्धिक संपदा अधिकारों (आईपीआर) का उल्लंघन न करे।

सचिव ने कहा कि औपनिवेशिक काल के दौरान जो राष्ट्रीय संपत्तियां या ऐतिहासिक धरोहरें 'तथाकथित कानूनी' या अवैध तरीकों से देश से बाहर ले जाई गईं, उन्हें वापस लाने पर रणनीति बनेगी। यूनेस्को भी इस पर अंतरराष्ट्रीय सहमति बनाने और 'म्यूजियम ऑफ वैनिश्ड ऑब्जेक्ट्स' के जरिए काम कर रहा है। भारत अपने दो बड़े प्रोजेक्ट्स—'प्रोजेक्ट मौसम' (टेंजिबल/बिल्ट हेरिटेज के लिए) और 'प्रोजेक्ट बृहत्तर भारत' (इनटेंजिबल हेरिटेज जैसे बुद्धिज्म, त्योहार और विचार) के अनुभवों को साझा करेगा। इसके तहत दक्षिण अफ्रीका के साथ गांधी के सत्याग्रह आंदोलन से जुड़ी संस्थाओं को यूनेस्को के संयुक्त नामांकन में ले जाने पर भी बात चल रही है।

उन्होंने बताया कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिए भारत इस साल दो बड़े सांस्कृतिक उत्सवों का आयोजन करने जा रहा है। पहला ब्रिक्स सांस्कृतिक समारोह (भोपाल) है, जिसमें अगस्त में मंत्रियों की बैठक के समानांतर (7-8 अगस्त) भोपाल में इसका आयोजन होगा। इसमें भागीदार देशों के सांस्कृतिक दल हिस्सा लेंगे। दूसरा अक्टूबर महीने में राष्ट्रीय विद्यालय नाटक (एनएसडी) के सहयोग से 12-14 अक्टूबर को दिल्ली में एक भव्य ब्रिक्स रंगमंच समारोह का आयोजन प्रस्तावित है इसमें सभी 11 सदस्य देशों और 10 भागीदार देशों के कलाकारों को नाटक और म्यूजिकल परफॉर्मेंस के लिए आमंत्रित किया जा रहा है।

सचिव ने एक सवाल के जवाब में स्पष्ट किया कि ब्रिक्स में संघर्षशील देश (जैसे अमेरिका-ईरान या रूस-यूक्रेन) एक साथ नहीं हैं। यहां समान विचारधारा वाली और एक-दूसरे पर निर्भर अर्थव्यवस्थाएं हैं, इसलिए किसी बड़े गतिरोध की आशंका नहीं है।

उन्होंने बताया कि इस बैठक में शामिल हो रहे 10 भागीदार देशों को 'पर्यवेक्षक' का दर्जा रहेगा। वे चर्चाओं में शामिल हो सकते हैं, अपनी बात रख सकते हैं लेकिन अंतिम 'संयुक्त घोषणापत्र' पर केवल 11 मुख्य सदस्य देश ब्राजील, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथोपिया, ईरान और इंडोनेशिया का ही अधिकार होगा और उन्हीं के वोट गिने जाएंगे।

सचिव ने उम्मीद जताई है कि मतभेदों को दरकिनार कर 'चेयर समरी' की जगह एक पूर्ण संयुक्त घोषणा पत्र जारी किया जाएगा, जो बाद में सभी राष्ट्राध्यक्षों के मुख्य घोषणा पत्र का हिस्सा बनेगा। उन्होंने बताया कि भारत ने ब्रिक्स सांस्कृतिक सहयोग की मेजबानी वर्ष 2016 में (गोवा), वर्ष 2021 में (नई दिल्ली) की थी और अब वर्ष 2026 में (भोपाल) में निर्धारित है। इसके अलावा, 2026 भारत का ब्रिक्स सांस्कृतिक ट्रैक और चार आधिकारिक ब्रिक्स सांस्कृतिक ट्रैक बैठकें आयोजित की जाएंगी।

संस्कृति मंत्रालय के संयुक्त सचिव डॉ अरविंद कुमार ने बताया कि साल 2015 में ब्रिक्स में संस्कृति को एक महत्वपूर्ण जोड़ने वाले कारक के रूप में शामिल करने का निर्णय लिया गया था। इसके बाद 2016 में भारत ने ही गोवा में पहली संस्कृति मंत्रियों की बैठक की अगुवाई की थी। कोविड काल (2021) के बाद, अब 2026 में भारत को तीसरी बार इस ट्रैक की मेजबानी का अवसर मिला है।

इस साल संस्कृति मंच के तहत कुल 4 बैठकें तय की गई हैं। पहली बैठक (29 अप्रैल) वर्चुअल माध्यम से संपन्न हो चुकी है। इसमें मुख्य विषयों पर सहमति बनी। दूसरी बैठक (वाराणसी) में आगामी रणनीति और ड्राफ्ट पेपर पर चर्चा होगी। 5-8 अगस्त तक अंतिम कार्यसमूह बैठक (भोपाल) में सभी सदस्य देशों के संस्कृति मंत्री शामिल होंगे और संयुक्त घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर करेंगे।

इसके अलावा, 2026 के लिए सांस्कृतिक सहयोग के तीन प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर जोर दिया जाएगा। इनमें रचनात्मक अर्थव्यवस्था, सीसीआई और एआई के युग में कॉपीराइट, दूसरा सांस्कृतिक संपत्ति का विरासत संरक्षण और वापसी तथा तीसरा संस्कृति, जलवायु और सतत विकास शामिल है।

ब्रिक्स सांस्कृतिक ट्रैक कैलेंडर के अनुसार 29-30 अप्रैल के पहली सीड्ब्लयूसी की वर्चुअली बैठक आयोजित हुई थी। दूसरी बैठक, 5-6 जून को बनारस में, तीसरी बैठक 5-6 अगस्त को भोपाल में होगी और 6-7 अगस्त को ब्रिक्स सांस्कृतिक समारोह भोपाल में, 7-8 अगस्त को संस्कृति मंत्रियों की बैठक भोपाल में और 12-14 अक्टूबर को ब्रिक्स रंगमंच समारोह नई दिल्ली में आयोजित होगा।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2016 में, भारत ने गोवा में प्रथम ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की बैठक की मेजबानी की थी। वर्ष 2020 में, व्यवस्थित सांस्कृतिक सहयोग को मजबूत करने के लिए 'सांस्कृतिक ब्रिक्स कार्य समूह' की स्थापना की गई थी। अब तक 10 ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की बैठकें सफलतापूर्वक आयोजित की जा चुकी हैं।

इस मौके पर आईजीएनसीए के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोश सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी

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