यूराेप से हिन्द प्रशांत तक सुरक्षित व्यापार के लिए रुस तैयार कर रहा है 'नॉर्दर्न सी रूट'

युगवार्ता    13-Jun-2026
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मॉस्को, 13 जून (हि.स. / रिया नोवोस्ती) रूस को उम्मीद है कि पश्चिम एशियाई समुद्री मार्गों पर सुरक्षा के संकट के मद्देनज़र आने वाले समय में उसके द्वारा विकसित किये जा रहे उत्तरी समुद्री मार्ग से वाणिज्यिक जहाज़ों के यातायात में भारी वृद्धि होगी जिसका सर्वाधिक फायदा यूरोप और हिन्द प्रशांत क्षेत्र के बीच व्यापार में होगा।

रूस के सुदूर पूर्व एवं आर्कटिक विकास मंत्री एलेक्सी चेकुनकोव ने रिया नोवोस्ती से बातचीत में कहा कि जैसे-जैसे उत्तरी समुद्री मार्ग कॉरिडोर का विस्तार हो रहा है, इस रास्ते से जहाज़ों के यातायात की वैश्विक मांग में भारी बढ़ोतरी की उम्मीद है, खासकर ऐसे समय जब भूमध्य सागर से एशिया के लिए स्वेज नहर के आसपास सुरक्षा स्थिति के तनाव कारण वैश्विक वाणिज्य गड़बड़ा रहा है।

यह पूछे जाने पर कि क्या उन्हें भविष्य में उत्तरी समुद्री मार्ग (नॉर्दर्न सी रूट) से परिवहन की वैश्विक मांग में वृद्धि की उम्मीद है, चेकुनकोव ने सवाल के जवाब में कहा, मुझे इस बात का पूरा भरोसा है।

रूसी मंत्री ने कहा कि रूस सबसे जटिल तकनीकी समाधान और आइसब्रेकर बना रहा है और अंतरिक्ष में उपग्रह लॉन्च कर रहा है; साथ ही, आइस-क्लास जहाज भी बनाए जा रहे हैं। एक सिस्टम एवं बुनियादी ढांचा तैयार किया जा रहा है।

चेकुनकोव ने कहा, जैसे ही यह सिस्टम नियमित रूप से काम करना शुरू करेगा, मेरा यकीन मानिए, दुनिया की सबसे बड़ी शिपिंग कंपनियां पहले इसे आज़माएंगी, फिर इसकी आदी हो जाएंगी, और फिर यह उनके लिए सामान्य बात हो जाएगी। तब, मुझे लगता है, हम परिवहन में ज़बरदस्त वृद्धि देखेंगे, जिससे कीमतें कम होंगी और नॉर्दर्न सी रूट और भी आकर्षक हो जाएगा।

उन्होंने कहा कि कई बड़े देश पहले से ही इस दिशा में अपने लिए सीधे लक्ष्य तय कर रहे हैं।

चेकुनकोव ने कहा, न केवल एशियाई देश, बल्कि अफ्रीकी देश भी - और निश्चित रूप से मिस्र, अल्जीरिया और ट्यूनीशिया जैसे बड़े समुद्री व्यापारिक देश - परिवहन के लिए नॉर्दर्न सी रूट का पूरी तरह से उपयोग कर सकेंगे।

मंत्री ने कहा कि फिलहाल, नॉर्दर्न सी रूट पर नेविगेशन का मौसम अपेक्षाकृत छोटा है जो जहाज की आइस क्लास के आधार पर लगभग चार से छह महीने का ही है। इस मार्ग पर अभी भी आइसब्रेकर एस्कॉर्ट की आवश्यकता है। हालांकि, उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे विकास योजनाएं लागू होंगी - जिनमें 10 परमाणु आइसब्रेकर का निर्माण, उपग्रहों का समूह तैनात करना और 40 खोज-और-बचाव जहाजों का बेड़ा बनाना शामिल है - इस शिपिंग कॉरिडोर का साल भर उपयोग करना और अधिक व्यावहारिक होने की उम्मीद है।

इसके अनुसार यूरोप से हिन्द प्रशांत क्षेत्र के लगभग सभी देशों तक सुरक्षित व्यापार संभव होगा जिनमें भारत, चीन, आसियान देश एवं ऑस्ट्रेलिया भी शामिल हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / सचिन बुधौलिया

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