
जिनेवा/न्यूयॉर्क, 15 जून (हि.स.)।
अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते को लेकर बनी सहमति का दुनिया भर के नेताओं और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने स्वागत किया है। दोनों देशों के बीच 19 जून को इस प्रस्तावित समझौते पर स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर होने और इसके प्रभावी होने के बाद समुद्री नाकेबंदी हटा ली जाएगी और होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोल दिया जाएगा।
ईरानी सरकारी समाचार संगठन प्रेसईडी टीवी ने बताया कि समझौते को अंतिम रूप दिए जाने के बाद संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस विवाद के समाधान को लेकर बनी सहमति को महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने उम्मीद जताई कि सभी पक्ष इस अवसर का उपयोग कर स्थायी समाधान की दिशा में आगे बढ़ेंगे।
कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान अल थानी ने समझौते को लेकर बनी सहमति का स्वागत किया और उम्मीद जताई कि सभी पक्ष भविष्य की बातचीत में सकारात्मक और रचनात्मक भावना के साथ शामिल होंगे। तुर्किये के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन तथा विदेश मंत्री हाकान फिदान ने इसको क्षेत्रीय शांति और स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने सभी पक्षों से किसी भी उकसावे वाली कार्रवाई से बचने की भी अपील की।
ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और इटली ने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि यदि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर स्पष्ट और सत्यापन योग्य कदम उठाता है तो वे संबंधित प्रतिबंधों में राहत देने के लिए तैयार हैं।
यूरोपीय संघ (ईयू) की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास ने समझौते को लेकर बनी सहमति को संभावित बड़ी कूटनीतिक सफलता करार दिया। वहीं, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य का दोबारा खुलना वैश्विक अर्थव्यवस्था और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा।
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने समझौते को लेकर बनी सहमति को युद्ध समाप्त करने और क्षेत्रीय स्थिरता बहाल करने की दिशा में अहम कदम बताया। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी इसको कूटनीतिक प्रयासों की सफलता बताते हुए इसके शीघ्र और पूर्ण क्रियान्वयन की अपील की। जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने इसे वैश्विक अर्थव्यवस्था और मध्य पूर्व की सुरक्षा के लिए सकारात्मक अवसर बताया तथा दोनों पक्षों को बधाई दी।
जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची और स्पेन के विदेश मंत्री होज़े मैनुअल अल्बारेस ने फैसले का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई कि ईरान के परमाणु मुद्दे पर जल्द ही व्यापक समझौता होगा। बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने भी एक बयान जारी कर ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौते को अंतिम रूप दिए जाने का स्वागत किया और इसे तनाव कम करने की दिशा में एक सकारात्मक घटनाक्रम बताया।
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज और न्यूज़ीलैंड के विदेश मंत्री विंस्टन पीटर्स ने भी इसका स्वागत करते हुए कहा कि संवाद एवं कूटनीति ही लंबे समय से चले आ रहे विवादों को सुलझाने का सबसे प्रभावी माध्यम है। साथ ही इसे तेज़ी से और पूरी तरह से लागू करने की अपील की।
इटली की प्रधानमंत्री जार्जिया मेलोनी ने इसको शांति का अवसर बताया और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में समुद्री सुरक्षा प्रयासों में सहयोग की पेशकश की। नॉर्वे के विदेश मंत्री एस्पेन बार्थ ईडे ने कहा कि समुद्री मार्गों की स्वतंत्र आवाजाही सुनिश्चित करना आवश्यक है और परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत जारी रहनी चाहिए। कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो ने भी इस प्रस्तावित समझौते का समर्थन करते हुए इसे वैश्विक शांति के लिए सकारात्मक कदम बताया।
इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइज़ेशन (आईएमओ) के महासचिव आर्सेनियो डोमिंग्वेज़ ने कहा कि भावी समझौता समुद्री सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और नौवहन की स्वतंत्रता को बहाल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।
इस पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का मानना है कि यह समझौता मध्य पूर्व में तनाव कम करने और क्षेत्रीय स्थिरता स्थापित करने की दिशा में एक ऐतिहासिक अवसर साबित हो सकता है।
उल्लेखनीय है कि विगत 28 फरवरी को शुरू हुआ अमेरिका-ईरान युद्ध 108 दिनों तक चला। दोनों देशों के बीच शांति समझौते को लेकर बनी सहमति पर स्विट्जरलैंड में 19 जून को हस्ताक्षर किए जाएंगे।
------------------
हिन्दुस्थान समाचार / अमरेश द्विवेदी