तेल अवीव, 15 जून (हि.स./ रिया नोवोस्ती)। इजराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री ने अमेरिका-ईरान समझाैते पर असहमति जताते हुए आज कहा कि यह समझाैता इजराइल के लिए बाध्यकारी नहीं है और उनका देश लेबनान में हिज़्बुल्लाह के खतरे काे समाप्त करने के अपने संकल्प से काेई समझाैता स्वीकार नहीं करेगा।
इजराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर ने टेलीग्राम पर सोमवार को एक संदेश में कहा कि अमेरिका-ईरान समझौता इजराइल को किसी भी तरह से बाध्य नहीं करता है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि लेबनान में हिज़्बुल्लाह की गतिविधियाें से पैदा खतरों को खत्म करने के संकल्प काे लेकर इज़राइल काे कोई भी समझौता मंज़ूर नहीं है।
रविवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और ईरान के विदेश उप मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने पुष्टि की कि एक समझौता ज्ञापन का मसाैदा तैयार हो गया है और इस दस्तावेज़ पर 19 जून को स्विट्ज़रलैंड में हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। ग़रीबाबादी ने पुष्टि की कि इस समझाैता ज्ञापन में लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य अभियानों को तुरंत रोकने की बात शामिल है।
बेन-गवीर ने कहा, मेरा रुख़ साफ़ है, हम इस समझौते का हिस्सा नहीं हैं, जो हमारी सुरक्षा का किसी भी तरह से ध्यान नहीं रखता और हमें किसी भी लिहाज़ से बाध्य नहीं करता। हमें हिज़्बुल्लाह के खात्मे से कम कुछ भी मंज़ूर नहीं होना चाहिए। हमें उन इलाकों से पीछे नहीं हटना चाहिए जिन पर हमारी सेनाओं ने कब्ज़ा किया है और जिन्हें आतंकवादी बुनियादी ढांचे से मुक्त कराया है। हमें ऐसी स्थिति में वापस नहीं लौटना चाहिए जहां हज़ारों आतंकवादी उत्तरी बस्तियों की सीमाओं पर बैठे हों।
मंत्री ने कहा कि इज़राइल अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के समर्थन के लिए उनका आभारी है, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि इजराइल कोई 'कमज़ोर या अस्थिर देश नहीं है।
बेन-गवीर ने कहा, हर बार जब भी हमने इजराइल की सुरक्षा की कीमत पर अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे घुटने टेके, तो हमें भारी कीमत चुकानी पड़ी। ओस्लो समझौते के मामले में भी ऐसा ही हुआ, 2006 के लेबनान समझौते के मामले में भी ऐसा ही हुआ और गाज़ा में नियंत्रण की पूरी अवधि के दौरान भी ऐसा ही हुआ, जो हमारे लिए एक आपदा साबित हुई।
मौजूदा संघर्ष विराम और अमेरिका की मध्यस्थता में चल रही लेबनानी-इज़राइली बातचीत के बावजूद इज़राइल लेबनान पर हमले जारी रखे हुए है। लेबनानी अधिकारी लगातार दावा करते हैं कि इज़राइली हमले देश की संप्रभुता का उल्लंघन करते हैं और देश के दक्षिणी भाग में स्थिरता लाने में बाधा डालते हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / सचिन बुधौलिया