
नई दिल्ली, 16 जून (हि.स.)। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने मंगलवार को कृषि भवन में पराली प्रबंधन और इसके स्थायी समाधान पर एक उच्च स्तरीय अंतर-मंत्रालयी बैठक की अध्यक्षता की।
बैठक में फसल अवशेष प्रबंधन (सीआरएम) योजना के अंतर्गत हुई प्रगति तथा आगामी कटाई मौसम में धान की पराली के प्रभावी प्रबंधन के लिए राज्यों की तैयारियों की समीक्षा की गई।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पराली जलाने से न केवल पर्यावरण प्रदूषित होता है, बल्कि धरती माता का स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है। इससे मित्र कीट नष्ट होते हैं, मिट्टी की उर्वरता घटती है और प्रदूषण के कारण जनस्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इस दृष्टि से इसे रोकना अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि पराली जलाने की समस्या से निपटने के लिए वर्ष 2018-19 में फसल अवशेष प्रबंधन योजना शुरू की गई थी। तब से पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश तथा आईसीएआर को कुल 4,266.47 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की गई है। इस सहायता से राज्यों में 3.54 लाख से अधिक फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों का वितरण तथा 43,500 से अधिक कस्टम हायरिंग केंद्रों की स्थापना संभव हुई है।
वर्ष 2026-27 की तैयारियों के संबंध में उन्होंने बताया कि सीआरएम योजना के अंतर्गत 544.15 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है जिसमें से पहली किस्त के रूप में 272.07 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं।
बैठक में कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु स्थापित निगरानी एवं संस्थागत व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की गई। बताया गया कि फसल अवशेष प्रबंधन के लिए गठित अंतर-मंत्रालयी समिति नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित कर रही हैं। राज्यों को अगस्त 2026 से पहले मशीनों का वितरण पूर्ण करने, कस्टम हायरिंग केंद्रों को मजबूत बनाने, उपलब्ध मशीनरी का पूर्ण उपयोग सुनिश्चित करने तथा व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाने की सलाह दी गई है।
केंद्रीय कृषि मंत्री ने पराली प्रबंधन के सफल मॉडलों एवं प्रेरक अनुभवों का व्यापक प्रचार-प्रसार करने पर बल दिया। उन्होंने किसानों में इसे लेकर जागरूकता फैलाने पर बल दिया कि जिन खेतों में पराली को जलाने के बजाय मिट्टी में मिलाया गया वहां धान की उत्पादकता में वृद्धि देखी गई है। साथ ही, राज्यों में प्रत्यक्ष धान बुवाई (डायरेक्ट सीडेड राइस-डीएसआर) तकनीक को प्रभावी ढंग से बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया।
दोनों केंद्रीय मंत्रियों ने यंत्रीकरण, तकनीकी नवाचार, पराली के औद्योगिक उपयोग, जन-जागरूकता और सभी हितधारकों के समन्वित प्रयासों के माध्यम से पराली जलाने की समस्या को समाप्त करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। बैठक में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) तथा संबंधित एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।
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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी