चीन दौरे में नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने बीजिंग को दिया पुराने संबंध बरकरार रखने का भरोसा

युगवार्ता    17-Jun-2026
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चीनी नेता से मुलाकात करते नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल


काठमांडू, 17 जून (हि.स.)। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल की चीन यात्रा में कोई ठोस या नया एजेंडा सामने नहीं आया, फिर भी इस दौरे के बाद दोनों पक्ष संतुष्ट दिखाई दिए हैं।

नेपाल में नई सरकार बनने के बाद चीन के साथ उसके संबंध किस दिशा में आगे बढ़ेंगे, इसे लेकर जिज्ञासा बनी हुई थी। ऐसे समय में विदेश मंत्री खनाल ने चीन को नेपाल की पुरानी प्रतिबद्धताओं के प्रति आश्वस्त करने का प्रयास किया, जबकि चीन ने भी नेपाल के साथ सहयोग को यथावत बनाए रखते हुए नई सरकार के साथ मिलकर आगे बढ़ने का भरोसा दिलाया।

इस बार बीजिंग ने विदेश मंत्री खनाल के माध्यम से नई नेपाली सरकार से मुख्य रूप से दो बातों पर आश्वस्त होने की कोशिश की। पहला- ‘एक चीन नीति’ के प्रति नेपाल का पारंपरिक समर्थन, दूसरा- बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) के कार्यान्वयन में किसी प्रकार की बाधा नहीं आने की गारंटी। इन दोनों मुद्दों पर मंत्री खनाल ने चीन को भरोसा दिलाने का प्रयास किया।

बीजिंग में अपने चीनी समकक्ष वांग यी के साथ हुई वार्ता में खनाल ने खुलकर ‘एक चीन नीति’ का समर्थन किया। उन्होंने दोहराया कि तिब्बत और ताइवान जैसे चीन के आंतरिक मामलों में नेपाल हमेशा चीन के साथ खड़ा रहेगा और नेपाली भूमि का उपयोग किसी भी चीन-विरोधी गतिविधि के लिए नहीं होने दिया जाएगा। साथ ही उन्होंने चीन से बीआरआई परियोजनाओं के कार्यान्वयन को लेकर किसी प्रकार की शंका न रखने का आग्रह किया, हालांकि, उन्होंने यह संकेत भी दिया कि नेपाल परियोजनाओं की प्राथमिकताओं और स्वरूप पर चर्चा करना चाहता है।

माना जा रहा है कि चीन चाहता है कि अमेरिका के साथ उसकी बढ़ती प्रतिस्पर्धा का असर नेपाल पर न पड़े। इसी कारण चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने 'दूर के मित्र से निकट का पड़ोसी अधिक उपयोगी होता है' जैसी टिप्पणी करते हुए नेपाल को पश्चिमी देशों के अत्यधिक करीब न जाने का संदेश देने की कोशिश की। विशेष रूप से बीआरआई के कार्यान्वयन में अमेरिका द्वारा चुनौतियां खड़ी किए जाने की चीनी धारणा इस दौरे में भी स्पष्ट दिखाई दी। चीन नेपाल के संदर्भ में दक्षिणी पड़ोसी भारत की तुलना में अमेरिका को अधिक बड़ी चुनौती के रूप में देखता है।

इस यात्रा का एक और उल्लेखनीय पहलू यह रहा कि विदेश मंत्री खनाल की पहली औपचारिक मुलाकात चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के अंतरराष्ट्रीय विभाग के प्रमुख के साथ हुई। खनाल स्वयं भी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी आरएसपी के विदेश विभाग प्रमुख हैं। चुनाव से पहले और चुनाव के बाद चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के प्रतिनिधिमंडलों ने काठमांडू में उनसे लंबी बातचीत की थी।

इस बार खनाल का सबसे पहले पार्टी के विदेश विभाग कार्यालय में स्वागत कर चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ने संकेत दिया कि वह आरएसपी के साथ पार्टी-स्तरीय संबंधों को आगे बढ़ाना चाहती है। पांच वर्षों के लिए शासन का जनादेश मिलने के कारण चीन की सत्तारूढ़ पार्टी रास्वपा के साथ सहयोग और संबंधों के विस्तार को महत्वपूर्ण मान रही है।

अतीत में केवल पारंपरिक मित्र कम्युनिस्ट दलों तक संबंध सीमित रखने के कारण कुछ कठिनाइयों का सामना करने वाले चीन ने इस बार सरकारी स्तर की वार्ता से पहले पार्टी-स्तरीय संपर्क को प्राथमिकता देकर यह संकेत दिया है कि उसे नेपाल में दीर्घकालिक राजनीतिक साझेदारों की आवश्यकता है।

नेपाल में बालेन्द्र सरकार के पहले आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल की इस यात्रा के दौरान नेपाल ने अपनी प्राथमिकताओं को भी स्पष्ट रूप से चीन के सामने रखा। केरुङ–काठमांडू रेलमार्ग की अंतिम चरण में पहुंच चुकी व्यवहार्यता अध्ययन (फिजिबिलिटी सर्वे) रिपोर्ट शीघ्र प्राप्त करने से लेकर दैलेख में गैस उत्खनन परियोजना तक के मुद्दे द्विपक्षीय वार्ता में उठाए गए।

हालांकि, ये विषय नए नहीं हैं, लेकिन नई सरकार द्वारा इन्हें अपनी प्राथमिक परियोजनाओं के रूप में आगे बढ़ाए जाने पर चीन सकारात्मक रुख अपनाता दिखाई दिया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास

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