नई दिल्ली, 22 जून (हि.स.)। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सोमवार को कहा कि ई-प्रॉसिक्यूशन ऐप 2.0 जांच एजेंसियों, अभियोजन तंत्र और न्यायिक प्रणाली को जोड़ने वाला नया सूचना राजमार्ग है, जो भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) के तहत निर्धारित समयसीमा में मामलों के निस्तारण को सुगम बनाएगा।
शाह ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी एक पोस्ट में कहा कि ई-प्रॉसिक्यूशन ऐप 2.0 जांच एजेंसियों, अभियोजन और न्यायिक व्यवस्था के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करेगा तथा मामलों के समयबद्ध निपटारे के लिए आवश्यक डिजिटल आधार प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से सूचनाओं और आंकड़ों का निर्बाध आदान-प्रदान संभव होगा, जिससे अपराधियों की पहचान करने में लगने वाला समय कम होगा। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों (ई-एविडेंस) के एकीकरण की प्रक्रिया भी अधिक प्रभावी और तेज बनेगी।
गृह मंत्री ने कहा कि यह प्रणाली मामलों की समयसीमा की निगरानी करने में भी सक्षम होगी, जिससे न्यायिक प्रक्रिया में अनावश्यक विलंब कम होगा और लोगों को त्वरित तथा सटीक न्याय सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि ई-प्रॉसिक्यूशन ऐप 2.0 आपराधिक न्याय प्रणाली के डिजिटलीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो जांच, अभियोजन और न्यायिक संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर न्याय वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और दक्ष बनाएगा।
केंद्रीय गृह मंत्री ने हाल ही में राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की चार महत्वपूर्ण डिजिटल प्रणालियों का शुभारंभ किया था, जिनका उद्देश्य देश की आपराधिक न्याय प्रणाली को तकनीक आधारित और अधिक प्रभावी बनाना है। इनमें अभिज्ञान प्रणाली (एप) के माध्यम से पुलिसकर्मी किसी भी स्थान पर संदिग्ध व्यक्तियों के अंगुली चिन्हों का राष्ट्रीय डाटाबेस से तत्काल मिलान कर सकेंगे।
वहीं आपराधिक रिकॉर्ड और व्यक्तिगत जानकारी (सीआरपीआई) एप की मदद से मुखाकृति, नेत्र और आनुवंशिक पहचान (डीएनए) मैचिंग का एकीकरण किया जा रहा है। यह मल्टी-मोडल बायोमेट्रिक तकनीक पहचान की विश्वसनीयता बढ़ाती है, मैनुअल चूक घटाती है और प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाती है। इसका प्रमुख उपयोग रिपीट ऑफेंडर्स और सीसीटीवी-आधारित पहचान में है। अब तक 2,190 सीआरपीआई यूनिट्स वितरित और 5.53 लाख से अधिक एनरोलमेंट हुए हैं।
इसके अलावा ई-फॉरेंसिक्स 2.0 - यह देश की फोरेंसिक प्रयोगशालाओं और जांच एजेंसियों को एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जोड़ता है। इसकी प्रमुख सुविधाओं में फोरेंसिक परीक्षण के लिए केस प्राप्ति व डिजिटल ट्रैकिंग, नमूनों का पंजीकरण, लैब वर्कफ़्लो, रिपोर्ट निर्माण, रिपोर्ट की डिजिटल उपलब्धता और चेन ऑफ कस्टडी का सुदृढ़ीकरण शामिल है। वहीं ई-प्रॉसिक्यूशन 2.0 - यह प्लेटफॉर्म पुलिस, अभियोजन और न्यायिक प्रक्रिया के बीच डिजिटल समन्वय स्थापित करता है, ताकि अपराधी की पहचान के बाद उसे समयबद्ध सजा भी सुनिश्चित हो सके।
गृह मंत्रालय के अनुसार ये सभी डिजिटल प्रणालियां अपराधी की पहचान से लेकर जांच, साक्ष्य संकलन, न्यायवैज्ञानिक परीक्षण, अभियोजन और दोषसिद्धि तक की पूरी प्रक्रिया को एकीकृत रूप से जोड़ती हैं। इससे आपराधिक न्याय प्रणाली अधिक प्रभावी, पारदर्शी, जवाबदेह और तकनीक-संचालित बनेगी तथा नागरिकों को तेज और बेहतर न्याय उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार