
- छह सांसदों को उनके मौजूदा संसदीय क्षेत्रों से लोकसभा चुनाव में शिवसेना के ‘धनुष-बाण’ पर उम्मीदवार बनाया जाएगाः शिंदेमुंबई, 22 जून (हि.स.)। महाराष्ट्र की राजनीति में सोमवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब उद्धव ठाकरे गुट के छह सांसदों ने उपमुख्यमंत्री एवं शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का दामन थाम लिया। इस मौके पर एकनाथ शिंदे ने घोषणा की कि पार्टी में शामिल हुए सभी छह सांसदों को उनके मौजूदा संसदीय क्षेत्रों से आगामी लोकसभा चुनाव में शिवसेना के ‘धनुष-बाण’ चुनाव चिन्ह पर उम्मीदवार बनाया जाएगा।
शिंदे की इस घोषणा के बाद भाजपा-शिवसेना-राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के महागठबंधन ‘महायुती’ में आगामी सीट बंटवारे को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।
गौरतलब है कि वर्ष 2022 में तत्कालीन शिवसेना में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में बड़ी बगावत हुई थी। बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा का समर्थन करने वाला एक बड़ा वर्ग शिंदे के साथ अलग हो गया था। इसके बाद शिंदे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने और चुनाव आयोग ने उनके गुट को ही असली शिवसेना मानते हुए ‘धनुष-बाण’ चुनाव चिन्ह आवंटित किया था।
वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट ने ‘मशाल’ चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ते हुए नौ सांसदों को संसद पहुंचाया था। इनमें से छह सांसदों-ओमराजे निंबालकर, संजय जाधव, संजय देशमुख, भाऊसाहेब वाकचौरे, संजय दिना पाटिल और नागेश पाटिल आष्टीकर ने सोमवार को शिंदे गुट में शामिल होने की घोषणा कर दी। पार्टी में शामिल हुए सांसदों का शिवसेना की ओर से जोरदार स्वागत किया गया।
उधर, इस घटनाक्रम से नाराज उद्धव ठाकरे ने कहा कि वह इन सभी सांसदों के संसदीय क्षेत्रों का दौरा करेंगे और जनता के सामने अपना पक्ष रखेंगे। उन्होंने एकनाथ शिंदे को चुनौती देते हुए कहा कि यदि दम है तो वर्ष 2029 के लोकसभा चुनाव में इन सांसदों को दोबारा जीताकर दिखाएं।
उद्धव ठाकरे की चुनौती स्वीकार करते हुए एकनाथ शिंदे ने ऐलान किया कि पार्टी में शामिल हुए सभी छह सांसदों को उनके वर्तमान क्षेत्रों से ही ‘धनुष-बाण’ चिन्ह पर चुनाव मैदान में उतारा जाएगा। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस फैसले से शिंदे की राजनीतिक स्थिति और मजबूत हुई है, लेकिन महायुती के भीतर सीटों के बंटवारे को लेकर नई चुनौतियां भी खड़ी हो सकती हैं।
इस पर प्रतिक्रिया देते हुए एनसीपी के एक वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री ने कहा कि बड़े राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद दोनों पक्षों की ओर से बयानबाजी स्वाभाविक है, लेकिन सीट बंटवारे जैसे निर्णय राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन नेतृत्व द्वारा लिए जाते हैं। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव में अभी तीन वर्ष का समय बाकी है, इसलिए वर्तमान बयानों को अंतिम राजनीतिक स्थिति नहीं माना जाना चाहिए। एनसीपी नेता ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी इस मामले में भाजपा की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार कर रही है। भाजपा का रुख सामने आने के बाद ही एनसीपी अपनी विस्तृत राजनीतिक रणनीति स्पष्ट करेगी।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार उद्धव ठाकरे गुट से छह सांसदों का शिंदे शिवसेना में शामिल होना महाराष्ट्र की राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है, जिसका असर आने वाले वर्षों में राज्य की राजनीतिक समीकरणों पर देखने को मिल सकता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / मनीष कुलकर्णी