
नई दिल्ली, 24 जून (हि.स.)। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान तथा अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जिेतेन्द्र सिंह ने ब्रिक्स देशों से मिलकर एक मजबूत “स्पेस इकोनॉमी” विकसित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र आने वाले वर्षों में वैश्विक आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण केंद्र बनने जा रहा है और ब्रिक्स देशों के पास इसे नई दिशा देने की क्षमता मौजूद है।
बेंगलुरु में आयोजित ब्रिक्स देशों की अंतरिक्ष एजेंसियों के प्रमुखों की बैठक के समापन सत्र को संबोधित करते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था का भविष्य किसी एक देश के प्रयासों से नहीं बल्कि साझेदारी, साझा नवाचार और सामूहिक महत्वाकांक्षा से तय होगा। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों के पास विशाल जनसंख्या, मजबूत वैज्ञानिक आधार, उन्नत तकनीकी क्षमताएं और औद्योगिक संसाधन हैं, जिनके बल पर वे वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के प्रमुख स्तंभ बन सकते हैं।
उन्होंने कहा कि आज अंतरिक्ष तकनीक केवल रॉकेट और उपग्रहों तक सीमित नहीं है बल्कि यह संचार, नेविगेशन, कृषि, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, आपदा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक आपदाएं, खाद्य एवं जल सुरक्षा और सतत शहरीकरण जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए अंतरिक्ष आधारित समाधान पहले से कहीं अधिक आवश्यक हो गए हैं।
चंद्रयान-3 की चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफल लैंडिंग, आदित्य एल 1 के माध्यम से सूर्य के अध्ययन तथा मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम गगनयान की प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि इन मिशनों ने भारत को वैश्विक अंतरिक्ष समुदाय में नई पहचान दिलाई है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि ब्रिक्स देशों को केवल विचार-विमर्श तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि सह-विकास, सह-नवाचार और सह-निर्माण की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, उद्योगों, स्टार्टअप्स और युवा नवोन्मेषकों को एक मंच पर लाकर ब्रिक्स देश वैश्विक चुनौतियों के समाधान विकसित कर सकते हैं, नई आर्थिक संभावनाएं पैदा कर सकते हैं और साझा समृद्धि का मजबूत आधार तैयार कर सकते हैं।
डॉ. सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में व्यापक सुधार किए गए हैं, जिससे निजी कंपनियों, स्टार्टअप्स और शैक्षणिक संस्थानों के लिए नए अवसर खुले हैं। उन्होंने कहा कि भारत आज दुनिया के सबसे तेजी से विकसित हो रहे अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्रों में शामिल है।
बैठक के दौरान ब्रिक्स देशों के बीच अंतरिक्ष सहयोग की प्रगति की समीक्षा की गई। प्रतिनिधियों ने अंतरिक्ष में बढ़ते मलबे को कम करने, टिकाऊ और सुरक्षित अंतरिक्ष अभियानों को बढ़ावा देने, रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट कॉन्स्टेलेशन को मजबूत बनाने तथा प्रस्तावित ब्रिक्स स्पेस काउंसिल की स्थापना जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। इसके अलावा आपदा प्रबंधन, पृथ्वी अवलोकन, क्षमता निर्माण और ज्ञान साझा करने के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी।
इस दो दिवसीय बैठक का आयोजन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 के तहत किया। इसमें ब्राजील, चीन, रूस, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात सहित ब्रिक्स देशों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में भारतीय अंतरिक्ष उद्योग और तेजी से उभर रहे न्यू-स्पेस स्टार्टअप्स ने भी अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया।
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हिन्दुस्थान समाचार / विजयालक्ष्मी