कृषि विकास के लिए केंद्र और यूपी सरकार की संयुक्त समीक्षा, लखनऊ में बनेगा क्लीन प्लांट सेंटर, यूपी ने तैयार किया 2047 का रोडमैप

युगवार्ता    25-Jun-2026
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केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान


-चना, मसूर एवं सरसों खरीद अवधि बढ़ाने की मंजूरी : शिवराज सिंह चौहान

-केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अगले चरण के लिए 6.18 लाख पात्र लाभार्थियों की सूची मुख्यमंत्री को सौंपी

- कृषि क्षेत्र में नवाचार, विविधीकरण और तकनीक आधारित विकास को देंगे नई गति : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

लखनऊ, 25 जून (हि.स.)। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उत्तर प्रदेश के बागवानी क्षेत्र को नई गति देने के लिए लखनऊ में क्लीन प्लांट सेंटर स्थापित किए जाने की घोषणा की है। इस पहल का उद्देश्य किसानों को गुणवत्तापूर्ण, प्रमाणित और रोगमुक्त पौधे उपलब्ध कराना है, जिससे उद्यानिकी उत्पादन में वृद्धि होगी और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।

यह घोषणा गुरुवार को लखनऊ स्थित योजना भवन के वैचारिकी सभागार में आयोजित बैठक के दौरान की गई, जहां केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के कृषि रोडमैप, कृषि क्षेत्र से संबंधित केंद्रीय एवं राज्य योजनाओं तथा ग्रामीण विकास कार्यक्रमों की संयुक्त समीक्षा की। बैठक में केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लिया।

बैठक को संबोधित करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि उत्तर प्रदेश कभी बीमारू राज्यों की श्रेणी में गिना जाता था, लेकिन आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में विकास के नए मानक स्थापित कर रहा है। उन्होंने कृषि क्षेत्र में हो रहे बदलावों की सराहना करते हुए कहा कि राज्य में कृषि उत्पादन, बुनियादी ढांचे और किसानों के कल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।

केंद्रीय मंत्री ने किसानों के हित में एक और महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए चना, मसूर और सरसों की सरकारी खरीद अवधि बढ़ाने की मंजूरी प्रदान की। उन्होंने इस संबंध में स्वीकृति पत्र मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपा। मुख्यमंत्री ने इसके लिए केंद्र सरकार और केंद्रीय मंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इससे अधिक संख्या में किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर अपनी उपज बेचने का अवसर मिलेगा और उनकी आय सुरक्षा मजबूत होगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने केंद्रीय मंत्री के लखनऊ आगमन का स्वागत करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत नए आवासों की स्वीकृति, दलहन और तिलहन फसलों की खरीद अवधि बढ़ाने तथा क्लीन प्लांट सेंटर की स्थापना जैसे निर्णय राज्य के किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होंगे।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और शिवराज सिंह चौहान के मार्गदर्शन में देश का कृषि क्षेत्र नई दिशा प्राप्त कर रहा है। मुख्यमंत्री ने शिवराज सिंह चौहान के मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में लंबे अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में मध्य प्रदेश ने कृषि क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की थीं और अब उनके अनुभव का लाभ पूरे देश को मिल रहा है।

बैठक में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) द्वारा तैयार विकसित कृषि @2047 : उत्तर प्रदेश कार्ययोजना पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण भी दिया गया। आईसीएआर के महानिदेशक ने बताया कि विकसित भारत-2047 के लक्ष्य की प्राप्ति के लिए कृषि क्षेत्र में जलवायु अनुकूल विकास, कृषि विविधीकरण, विज्ञान आधारित खेती, संसाधन आधारित नियोजन, मूल्य श्रृंखला सुदृढ़ीकरण और समन्वित शासन व्यवस्था को प्राथमिकता देनी होगी।

प्रस्तुतीकरण में बताया गया कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश की कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था लगभग 7.41 ट्रिलियन रुपये की है। इसे वर्ष 2047 तक बढ़ाकर 96.96 ट्रिलियन रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए कृषि विकास दर को वर्तमान 3.19 प्रतिशत से बढ़ाकर 5.41 प्रतिशत तक ले जाने की रणनीति तैयार की गई है।

कार्ययोजना के अनुसार भविष्य की कृषि केवल उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने, मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण, निर्यात क्षमता और कृषि आधारित उद्योगों के विकास पर भी समान रूप से ध्यान दिया जाएगा। इसके तहत धान और गेहूं पर अत्यधिक निर्भरता कम करते हुए दलहन, तिलहन, मोटे अनाज, मक्का, बागवानी और अन्य उच्च मूल्य वाली फसलों को बढ़ावा देने की योजना बनाई गई है।

आईसीएआर ने मक्का, दलहन, तिलहन, धान, गेहूं, गन्ना, फल और सब्जियों के लिए अलग-अलग दीर्घकालिक विकास रणनीति प्रस्तुत की। इसमें जलवायु अनुकूल संकर बीजों, ड्रिप सिंचाई, सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों, वैज्ञानिक पोषक तत्व प्रबंधन, प्रसंस्करण इकाइयों और मजबूत मूल्य श्रृंखला के विकास पर जोर दिया गया।

बैठक में कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीक के व्यापक उपयोग की भी अनुशंसा की गई। वर्ष 2047 तक कृषि यंत्रीकरण का स्तर 75 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी), रिमोट सेंसिंग और डिजिटल कृषि प्लेटफॉर्म के उपयोग को बढ़ावा देने की योजना प्रस्तुत की गई।

कार्ययोजना में प्रत्येक जिले में डिजिटल कृषि एवं एआई प्लेटफॉर्म, प्रिसिजन एग्रीकल्चर प्रयोगशालाएं, मृदा-जल-कार्बन वेधशालाएं, जैव संसाधन केंद्र और कृषि उद्यमिता एवं बिजनेस इन्क्यूबेशन केंद्र स्थापित करने का भी सुझाव दिया गया है।

बैठक के दौरान कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं की समीक्षा करते हुए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि विविधीकरण और उत्पादकता वृद्धि पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि केवल सॉयल हेल्थ कार्ड बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि किसानों को उनकी भूमि की वास्तविक स्थिति, पोषक तत्वों की उपलब्धता और संतुलित उर्वरक उपयोग की जानकारी भी दी जानी चाहिए, ताकि वे मृदा स्वास्थ्य कार्ड का प्रभावी उपयोग कर सकें।

बैठक में उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, कृषि राज्य मंत्री बलदेव सिंह औलाख, राजस्व राज्य मंत्री सुरेंद्र दिलेर सहित केंद्र और राज्य सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रस्तुत कार्ययोजना को प्रभावी ढंग से लागू किया गया तो उत्तर प्रदेश न केवल देश के कृषि उत्पादन में अग्रणी बना रहेगा, बल्कि कृषि आधारित अर्थव्यवस्था और किसानों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज कर सकेगा।--------------

हिन्दुस्थान समाचार / शिव सिंह

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