
काठमांडू, 26 जून (हि.स.)। नेपाल में एवियन इन्फ्लुएंजा (बर्ड फ्लू) का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए नेपाल के पशु सेवा विभाग ने काठमांडू और आसपास के जिलों में तकनीकी टीमों को सक्रिय कर दिया है। साथ ही नियमित प्रयोगशाला परीक्षणों के जरिए निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया गया है।
पशु सेवा विभाग के महानिदेशक उमेश दाहाल ने बताया कि काठमांडू, भक्तपुर, ललितपुर और काभ्रेपलाञ्चोक जिलों में बर्ड फ्लू नियंत्रण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है, क्योंकि इन क्षेत्रों में संक्रमण का खतरा अभी भी अधिक बना हुआ है। उन्होंने कहा कि करीब तीन महीने पहले शुरू हुआ यह प्रकोप अब देश के 11 जिलों तक फैल चुका है।
दाहाल के अनुसार, अब तक लगभग 100 पोल्ट्री फार्मों में बर्ड फ्लू संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है। संक्रमण की श्रृंखला तोड़ने के लिए प्रभावित फार्मों में संक्रमित पक्षियों को नष्ट किया जा रहा है। इसके अलावा संक्रमित अंडों और पोल्ट्री फीड को भी नष्ट किया जा रहा है, ताकि वायरस का प्रसार रोका जा सके। विभाग ने प्रभावित पोल्ट्री फार्म संचालकों को सलाह दी है कि वे कम से कम छह सप्ताह तक नए चूजे न लाएं।
विभाग के मुताबिक, काठमांडू के चन्द्रागिरि, कीर्तिपुर, टोखा, तारकेश्वर, गोदावरी, चाँगुनारायण और सूर्यविनायक समेत कई क्षेत्रों के पोल्ट्री फार्मों में संक्रमण की पुष्टि हुई है। इन इलाकों में निगरानी बढ़ाने के साथ जैव-सुरक्षा उपायों को भी सख्ती से लागू किया जा रहा है।
महानिदेशक दाहाल ने कहा कि पोल्ट्री में बर्ड फ्लू के लिए फिलहाल कोई प्रभावी उपचार या व्यापक रूप से उपयोग किया जाने वाला टीका उपलब्ध नहीं है। ऐसे में संक्रमित पक्षियों को नष्ट करना ही इस अत्यधिक संक्रामक वायरस के प्रसार को रोकने का सबसे प्रभावी उपाय माना जा रहा है।
उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि हालांकि ऐसे मामले बेहद दुर्लभ हैं, लेकिन यह वायरस इंसानों को भी संक्रमित कर सकता है। इसे देखते हुए पोल्ट्री किसानों, फार्म कर्मियों और उपभोक्ताओं से सभी आवश्यक सुरक्षा मानकों का पालन करने और किसी भी संदिग्ध स्थिति की तत्काल सूचना संबंधित अधिकारियों को देने की अपील की गई है।
बर्ड फ्लू नियंत्रण अभियान की प्रभावी निगरानी के लिए विभाग के महानिदेशक की अध्यक्षता में केंद्रीय बर्ड फ्लू समन्वय समिति का गठन किया गया है। इसके अलावा प्रभावित जिलों में संबंधित प्रमुख जिला अधिकारियों के नेतृत्व में जिला स्तरीय समन्वय समितियां भी बनाई गई हैं, जो रोकथाम, निगरानी और राहत कार्यों की देखरेख कर रही हैं।
विभाग के सूचना अधिकारी मुकुल उपाध्याय ने बताया कि जिन किसानों की पोल्ट्री, अंडे और पोल्ट्री फीड को संक्रमण रोकने के लिए नष्ट किया गया है, उन्हें नुकसान के सत्यापन के बाद जिला स्तरीय समितियों की ओर से निर्धारित दरों के अनुसार आकलित लागत का अधिकतम 75 प्रतिशत तक मुआवजा दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था का उद्देश्य प्रभावित किसानों को आर्थिक राहत प्रदान करना और संक्रमण नियंत्रण अभियान में उनका सहयोग सुनिश्चित करना है।
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हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास