नई दिल्ली, 29 जून (हि.स.)। देश के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ग्राम सभाओं में कम भागीदारी पर तैयार राष्ट्रीय अध्ययन रिपोर्ट 30 जून को नई दिल्ली में जारी की जाएगी।
पंचायती राज मंत्रालय के अनुसार नीति आयोग के सदस्य डॉ. आर. बालासुब्रमण्यम रिपोर्ट का विमोचन करेंगे। इस अवसर पर पंचायती राज मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज, राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान (एनआईआरडीपीआर) के वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षाविद, शोधकर्ता तथा पंचायती राज संस्थाओं से जुड़े विभिन्न हितधारक उपस्थित रहेंगे।
पंचायती राज मंत्रालय के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज संस्थान द्वारा तैयार की गई यह रिपोर्ट 26 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की लगभग 400 ग्राम पंचायतों में किए गए व्यापक क्षेत्रीय अध्ययन पर आधारित है। अध्ययन में पीईएसए क्षेत्रों और महिला नेतृत्व वाली ग्राम पंचायतों सहित करीब 7,790 लोगों की भागीदारी रही।
रिपोर्ट में ग्राम सभा में नागरिकों की भागीदारी को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारकों का विश्लेषण किया गया है। इनमें जागरूकता का स्तर, सूचना एवं संचार व्यवस्था, समावेशिता, संस्थागत जवाबदेही, स्थानीय शासन प्रणाली, बुनियादी ढांचे की उपलब्धता तथा नागरिकों की धारणाएं शामिल हैं।
रिपोर्ट का उद्देश्य सहभागी लोकतंत्र और जमीनी स्तर के शासन को मजबूत करने के लिए व्यावहारिक उपायों की पहचान करना तथा नीति निर्माण, संस्थागत सुदृढ़ीकरण और ग्राम सभाओं में नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए साक्ष्य-आधारित सुझाव उपलब्ध कराना है।
पंचायती राज मंत्रालय के अनुसार, संविधान के अनुच्छेद 243ए के तहत ग्राम सभा स्थानीय स्वशासन और सहभागी लोकतंत्र की आधारशिला है। यह अध्ययन ग्राम सभाओं को अधिक सक्रिय, समावेशी और जवाबदेह बनाने के लिए आवश्यक सुधारों और उपायों की सिफारिश करता है, जिससे ग्रामीण भारत में पंचायती राज संस्थाओं को और सशक्त बनाया जा सके।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार