जापान के इकोनॉमिक ज़ोन में चीनी सर्वे और कोस्ट गार्ड की गतिविधि से बढ़ा तनाव

युगवार्ता    29-Jun-2026
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सांकेतिक


टोक्यो, 29 जून (हि.स.)। जून की शुरुआत में चीन के कोस्ट गार्ड के जहाजों ने ताइवान के पूर्व में जापान के एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक ज़ोन (ईईजेड) के भीतर एक सरकारी समुद्री सर्वेक्षण जहाज को सुरक्षा प्रदान की। इस घटनाक्रम ने पूर्वी चीन सागर में चीन के बढ़ते समुद्री दावे और जापान के साथ उसके संबंधों में नया तनाव पैदा कर दिया है।

जापान की समाचार एजेंसी क्योडो न्यूज द्वारा संचालित जापान वायर के अनुसार, चीनी सर्वे जहाज 'शियांग यांग होंग 22' ने 16 से 18 जून तक जापान के ईईजेड के भीतर समुद्री अध्ययन किया। इस दौरान चीन के कोस्ट गार्ड के जहाज 'हाईजिंग 2304' और '2502' उसके साथ मौजूद रहे। जापानी अधिकारियों का कहना है कि यह अभियान लगभग पूरी तरह जापान के ईईजेड के अंदर संचालित किया गया।

इससे पहले 10 जून को 'हाईजिंग 2304' सेनकाकू द्वीप समूह के पास जापानी जलक्षेत्र में घुसा था। उसके साथ चीन के कोस्ट गार्ड के तीन अन्य जहाज भी थे। इस जहाज पर 76 मिमी की रैपिड-फायर गन लगी है, जिसकी मारक क्षमता 10 किलोमीटर से अधिक बताई जाती है।

28 जून को जापान कोस्ट गार्ड ने एक और घटना की पुष्टि की, जिसमें एक चीनी सर्वे जहाज सेनकाकू द्वीप समूह के ऊत्सुरी द्वीप से लगभग 57 किलोमीटर पश्चिम-दक्षिण-पश्चिम में जापान के ईईजेड के भीतर समुद्र में पाइप जैसी संरचनाएं उतारता देखा गया। जापानी अधिकारियों ने रेडियो संदेश के जरिए इस गतिविधि को तत्काल रोकने की मांग की और कहा कि इस क्षेत्र में वैज्ञानिक सर्वे के लिए जापान की पूर्व अनुमति आवश्यक है।

विशेषज्ञों का मानना है कि चीन अब केवल कूटनीतिक विरोध तक सीमित नहीं है, बल्कि विवादित समुद्री क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी और दावेदारी को व्यवहारिक रूप से स्थापित करने की रणनीति अपना रहा है। जापानी विश्लेषकों के अनुसार, यह तरीका दक्षिण चीन सागर में अपनाई गई चीन की नीति से मेल खाता है।

माना जा रहा है कि चीन की यह सक्रियता 28 मई को जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची और फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर के संयुक्त बयान के बाद तेज हुई, जिसमें दोनों देशों ने अपने ईईजेड की सीमा निर्धारण पर बातचीत शुरू करने की योजना जताई थी। चीन ने अगले ही दिन इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए कहा था कि संबंधित समुद्री क्षेत्र ताइवान के पूर्वी जलक्षेत्र से भी जुड़ा है, जिसे वह अपना हिस्सा मानता है।

चीनी सैन्य सूत्रों का कहना है कि जापान और फिलीपींस की पहल ने चीन को अपने समुद्री अधिकारों को और मजबूती से प्रदर्शित करने का अवसर दिया। वहीं, चीन के सरकारी मीडिया से जुड़े एक सोशल मीडिया अकाउंट ने दावा किया कि ताइवान के पूर्वी समुद्री क्षेत्रों में सर्वेक्षण भविष्य में प्राकृतिक संसाधनों के विकास, समुद्र के नीचे केबल बिछाने और समुद्री हितों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण आधार तैयार करेगा।

इस बीच, जापान और चीन के बीच उच्चस्तरीय सरकारी वार्ता भी पिछले वर्ष से ठप पड़ी हुई है। जापानी अधिकारियों का कहना है कि संवादहीनता के कारण दोनों देशों के बीच सुरक्षा और आर्थिक मामलों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे लगातार लंबित हैं, जिससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ने की आशंका बनी हुई है।

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हिन्दुस्थान समाचार / अमरेश द्विवेदी

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