नेपाल की पूर्व राष्ट्रपति ने कहा- देश में प्रत्यक्ष निर्वाचित कार्यकारी प्रणाली उपयुक्त नहीं

युगवार्ता    29-Jun-2026
Total Views |
पूर्व राष्ट्रपति विद्या भंडारी


काठमांडू, 29 जून (हि.स.)। पूर्व राष्ट्रपति विद्या भंडारी ने कहा है कि प्रत्यक्ष निर्वाचित कार्यकारी प्रणाली नेपाल के लिए उपयुक्त नहीं है। उनका तर्क है कि देश की सामाजिक संरचना और विविधता ऐसी शासन प्रणाली का समर्थन नहीं करती।

काठमांडू में वामपंथी दिवंगत नेता मदन भंडारी की 75वीं जयंती पर आयोजित ‘नेपालको कम्युनिस्ट आन्दोलन र जननेता मदन भण्डारी’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि नेपाल की मौजूदा शासन प्रणाली में बदलाव नहीं किया जाना चाहिए। भण्डारी ने कहा कि व्यावहारिक जरूरतों और कार्यान्वयन के अनुभव के आधार पर संवैधानिक संशोधन पर विचार किया जा सकता है, लेकिन नेपाल जैसे बहुजातीय, बहुभाषी और बहुसांस्कृतिक देश में प्रत्यक्ष निर्वाचित कार्यकारी मॉडल प्रासंगिक नहीं होगा।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में केवल समय-समय पर चुनाव जीतकर जनादेश प्राप्त करना ही पर्याप्त नहीं है। जनसमर्थन हासिल करने के बाद भी संवैधानिक मूल्यों, कानून के शासन और सार्वजनिक जवाबदेही का पालन लगातार होना चाहिए। नेपाल के कम्युनिस्ट आंदोलन की वर्तमान स्थिति पर भण्डारी ने कहा कि कम्युनिस्ट दलों को हालिया प्रतिनिधि सभा चुनाव परिणामों को गंभीर आत्ममंथन और आत्ममूल्यांकन के अवसर के रूप में देखना चाहिए।

उन्होंने केवल एक चुनावी नतीजे के आधार पर जनता के बहुदलीय जनवाद की प्रासंगिकता या कम्युनिस्ट आंदोलन के भविष्य को लेकर जल्दबाजी में निष्कर्ष निकालने के खिलाफ चेतावनी दी। दिवंगत नेता मदन भंडारी के राजनीतिक विचारों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि रचनात्मकता की कमी लंबे समय से कम्युनिस्ट आंदोलन की एक प्रमुख चुनौती रही है और यह बात आज भी उतनी ही प्रासंगिक है। भण्डारी ने कहा कि जनता के घटते विश्वास को गंभीरता से स्वीकार करना होगा। उन्होंने इसके लिए बदलती जन आकांक्षाओं और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप नीतियों, संगठन और कार्यशैली में आवश्यक नवाचार लाने में विफलता को जिम्मेदार ठहराया।

उन्होंने आगे कहा कि केवल अतीत की उपलब्धियों को याद करना अब पर्याप्त नहीं होगा। वर्तमान चुनौतियों का सामना करने के लिए वैचारिक क्षमता और राजनीतिक रचनात्मकता की जरूरत है। युवा पीढ़ी की अपेक्षाओं और डिजिटल युग की मांगों का उल्लेख करते हुए उन्होंने शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, सुशासन और उत्पादनमुखी अर्थव्यवस्था में नए दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही, देश को समृद्धि की ओर ले जाने के लिए प्रभावी कार्यान्वयन को अनिवार्य बताया।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / पंकज दास

Tags