
कोलकाता, 30 जून (हि.स.)। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा है कि केंद्र सरकार पश्चिम बंगाल के उपयुक्त क्षेत्रों में बाघों की पुनर्स्थापना की संभावनाओं का वैज्ञानिक आधार पर अध्ययन कर रही है। उन्होंने कहा कि विशेषज्ञों से व्यापक परामर्श और वैज्ञानिक योजना के साथ इस दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि जैव विविधता संरक्षण और पारिस्थितिक सुरक्षा को और मजबूत किया जा सके।
कोलकाता में भारतीय प्राणी सर्वेक्षण के 111वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित एनिमल टैक्सोनॉमी समिट 2026 के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए यादव ने कहा कि देश में संरक्षण की सोच अब केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह सतत विकास और विकसित भारत की परिकल्पना का महत्वपूर्ण आधार बन चुकी है।
उन्होंने राजस्थान के सरिस्का में बाघ पुनर्स्थापना कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2008 में वहां बाघों की संख्या शून्य थी, जो अब बढ़कर 56 हो गई है। उन्होंने कहा कि इसी अनुभव को ध्यान में रखते हुए पश्चिम बंगाल के उपयुक्त परिदृश्यों में बाघों की पुनर्स्थापना की संभावनाओं पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
भूपेंद्र यादव ने कहा कि वर्ष 2014 के बाद भारत की पर्यावरणीय नीति और वैश्विक भूमिका में उल्लेखनीय बदलाव आया है। आज भारत केवल वैश्विक पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना ही नहीं कर रहा, बल्कि उनके समाधान तय करने में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है।
उन्होंने कहा कि मिशन लाइफ, इंटरनेशनल सोलर अलायंस, कोएलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर, इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस, ग्लोबल बायोफ्यूल्स अलायंस तथा जलवायु न्याय के समर्थन जैसी पहलों के माध्यम से भारत ने यह साबित किया है कि आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ साथ आगे बढ़ सकते हैं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य विकास और संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करते हुए जैव विविधता की रक्षा करना तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और समृद्ध प्राकृतिक विरासत सुनिश्चित करना है।
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हिन्दुस्थान समाचार / ओम पराशर