
नई दिल्ली, 30 जून (हि.स.) केंद्रीय पर्यटन और संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने मंगलवार को कहा कि नीतियों में स्पष्टता और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता ही निवेशकों में विश्वास जगा सकती है।
केंद्रीय मंत्री शेखावत ने दिल्ली स्थित अशोका होटल में संस्कृति मंत्रालय और नीति आयोग की ओर से आयोजित एक राष्ट्रीय कार्यशाला के दौरान यह बात कही। इस बीच “अनलॉकिंग ग्रोथ इन टूरिज्म एंड हॉस्पिटैलिटी सेक्टर” (पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र में विकास को गति देने') शीर्षक वाली एक विशेष रिपोर्ट भी जारी की गयी। इसका उद्देश्य भारत के पर्यटन और आतिथ्य (हॉस्पिटैलिटी) क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाना और इसके विकास की संभावनाओं को गति देना है।
मंत्री ने कहा, आज वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा केवल प्राकृतिक संसाधनों या विरासतों की नहीं बल्कि सुशासन, बुनियादी ढांचे और प्रशासनिक दक्षता की है। कई बार 400 करोड़ रुपये का निवेश सिर्फ इसलिए अटका रहता है क्योंकि पिछले तीन महीनों से किसी एक आखिरी लाइसेंस पर हस्ताक्षर नहीं हुए होते। निवेशकों को सब्सिडी से ज्यादा ईज ऑफ डूइंग बिजनेस , सरलता और सुगमता की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 के संकल्प को पूरा करने के लिए यह रिपोर्ट और प्रशासनिक सुधार एक मील का पत्थर साबित होंगे, जो बिना गुणवत्ता और सस्टेनेबिलिटी से समझौता किए पर्यटन को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे।
शेखावत ने कहा कि कोविड-19 के बाद दुनिया का नजरिया बदला है। अब लोग 'मॉन्यूमेंटल टूरिज्म' की जगह 'एक्सपीरियंस बेस्ड टूरिज्म' (अनुभव आधारित पर्यटन) को प्राथमिकता दे रहे हैं। भारत के पास हिमालय, समंदर, रेगिस्तान और वन्य जीवन के साथ-साथ योग, आयुर्वेद और अनूठी मेहमाननवाजी (हॉस्पिटैलिटी) का समृद्ध खजाना है, जो हमारे डीएनए में है।
मंत्री ने होटल और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र के निवेशकों का उदाहरण देते हुए कहा कि जो निवेशक 300 करोड़ रुपये से 500 करोड़ रुपये का निवेश कर रहे हैं, उनके लिए 20 प्रतिशत या 30 प्रतिशत की कैपिटल सब्सिडी उतनी बड़ी चुनौती या मायने नहीं रखती, जितनी कि प्रशासनिक मंजूरियां और लाइसेंस की उलझनें हैं।
शेखावत ने पर्यटन उद्योग को बढ़ावा देने और निवेशकों का भरोसा जीतने के लिए चार मूल मंत्र साझा किए। पहला रेग हमें केवल नियमों में बांधने के बजाय निवेशकों और पर्यटकों के मार्ग को सुगम बनाना होगा। दूसरा नियंत्रण की मानसिकता को छोड़कर विश्वास का माहौल पैदा करना होगा।तीसरा सिर्फ कागजी नियमों का पालन करवाने के बजाय बाजार में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ानी होगी और चौथा अनुमति लेने-देने की पुरानी व्यवस्था को समाप्त कर भागीदारी का नया दौर शुरू करना होगा।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व का जिक्र करते हुए उन्होंने 10-12 साल पहले शुरू की गई 'सेल्फ अटेस्टेशन' (स्व-सत्यापन) नीति का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि पहले नागरिकों को अपने ही दस्तावेजों के लिए राजपत्रित अधिकारियों के चक्कर काटने पड़ते थे, क्योंकि व्यवस्था को अपने नागरिकों पर भरोसा नहीं था। प्रधानमंत्री ने इसे खत्म कर जनता पर विश्वास जताया, जिससे बोझ कम हुआ। इसी तर्ज पर अब पर्यटन क्षेत्र में भी 'विश्वास आधारित नियामक नीति' की स्थापना करनी होगी।
हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री के अपने व्यक्तिगत अनुभव को साझा करते हुए शेखावत ने बताया कि एक होटल शुरू करने के लिए निवेशक को आज भी 30-35 तरह के लाइसेंसों से जूझना पड़ता है।
अब केंद्र सरकार ने एक विशेष डैशबोर्ड तैयार किया है, जिसके जरिए हर महीने राज्यों में चल रहे इन रिफॉर्म्स (सुधारों) की प्रगति की समीक्षा की जाएगी और सरकार का लक्ष्य सिंगल विंडो क्लीयरेंस से आगे बढ़कर निवेशक को एक सहज और सुगम अनुभव देना है।
उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य पर्यटन उद्योग के योगदान को भारत की जीडीपी में 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत (वैश्विक बेंचमार्क के बराबर) तक ले जाना है।
इस मौके पर नीति आयोग के सदस्य राजीव गाबा, पर्यटन मंत्रालय के सचिव भुवनेश कुमार और पर्यटन मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव सुमन बिल्ला सहित राष्ट्रीय कार्यशाला में राज्य सरकारों, उद्योग संघों, आतिथ्य क्षेत्र के हितधारकों, ऑनलाइन यात्रा प्लेटफार्मों, शैक्षणिक संस्थानों, ज्ञान भागीदारों और केंद्रीय मंत्रालयों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रद्धा द्विवेदी