
नई दिल्ली, 04 जून (हि.स.)। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने देश के शोधकर्ताओं, छात्रों और नवाचारकर्ताओं को पेटेंट फाइलिंग तथा शोधपत्र लेखन में सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से एएनआरएफ समर्थित एक डिजिटल पोर्टल शुरू करने की घोषणा की है।
डॉ. सिंह ने गुरुवार को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, जैव प्रौद्योगिकी विभाग, वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग तथा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की संयुक्त समीक्षा बैठक में यह घोषणा की। बैठक में विभिन्न वैज्ञानिक पहलों, संस्थागत समन्वय, विज्ञान प्रशासन सुधारों, जनसंपर्क गतिविधियों और आगामी राष्ट्रीय विज्ञान कार्यक्रमों की तैयारियों की समीक्षा की गई।
उन्होंने कहा कि नया पोर्टल शोधकर्ताओं और युवा नवाचारकर्ताओं को वैज्ञानिक लेखन, प्रकाशन प्रक्रिया, बौद्धिक संपदा संरक्षण और पेटेंट संबंधी प्रक्रियाओं पर संरचित प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन उपलब्ध कराएगा। इससे शोध की गुणवत्ता बढ़ेगी, नवाचार को बढ़ावा मिलेगा और वैज्ञानिक कार्यों को प्रकाशनों तथा बौद्धिक संपदा संपत्तियों में परिवर्तित करने में मदद मिलेगी।
डॉ. सिंह ने विभिन्न वैज्ञानिक विभागों और संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि अनुसंधान एवं नवाचार से अधिकतम राष्ट्रीय लाभ प्राप्त करने के लिए सभी वैज्ञानिक संगठनों को एकीकृत और सहयोगात्मक तरीके से कार्य करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि कई संस्थान समान प्रकृति के कार्य कर रहे हैं, लेकिन विभागों के बीच जानकारी के आदान-प्रदान की कमी के कारण उपलब्ध विशेषज्ञता का पूरा लाभ नहीं मिल पाता। उन्होंने प्रमुख परियोजनाओं, तकनीकी उपलब्धियों और संस्थागत क्षमताओं की नियमित साझेदारी के लिए संरचित व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए।
मंत्री ने वैज्ञानिक संस्थानों की उपलब्धियों और सफलता की कहानियों को व्यापक स्तर पर प्रदर्शित करने की आवश्यकता भी बताई। उन्होंने सुझाव दिया कि समीक्षा बैठकों में विभिन्न प्रयोगशालाओं और संस्थानों की उल्लेखनीय उपलब्धियों की प्रस्तुति को नियमित रूप से शामिल किया जाए, ताकि परस्पर सीखने और सहयोग को बढ़ावा मिले।
विज्ञान संचार के महत्व पर बल देते हुए डॉ. सिंह ने कहा कि वैज्ञानिक उपलब्धियों को नागरिकों, छात्रों, स्टार्टअप्स और शोधकर्ताओं तक सरल एवं प्रभावी तरीके से पहुंचाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म, सोशल मीडिया और आधुनिक संचार माध्यमों का अधिक उपयोग किया जाना चाहिए।
बैठक में विज्ञान प्रशासन के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम, मिशन कर्मयोगी के साथ उसके एकीकरण, फाइल निपटान, शिकायत निवारण, मुकदमा प्रबंधन और व्यय संबंधी प्रदर्शन संकेतकों की भी समीक्षा की गई। उन्होंने प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया।
डॉ. सिंह ने ईएसटीआईसी-2026 की तैयारियों की भी समीक्षा करते हुए कहा कि यह आयोजन भारत की वैज्ञानिक उपलब्धियों, नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र और उभरती प्रौद्योगिकियों को प्रदर्शित करने का महत्वपूर्ण मंच बने। उन्होंने इसमें वैज्ञानिक संस्थानों, स्टार्टअप्स, उद्योग जगत, छात्रों और युवा नवाचारकर्ताओं की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करने पर बल दिया।
बैठक का समापन वैज्ञानिक विभागों के बीच सहयोग बढ़ाने, संस्थागत क्षमताओं को मजबूत करने और वैज्ञानिक अनुसंधान एवं नवाचार के सामाजिक प्रभाव को बढ़ाने की सामूहिक प्रतिबद्धता के साथ हुआ।
बैठक में भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार अजय कुमार सूद, जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव राजेश एस. गोखले तथा विभिन्न वैज्ञानिक विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुशील कुमार