अंगदान और जल संरक्षण से देश में आएगी नई सामाजिक क्रांति : सीआर पाटिल

युगवार्ता    04-Jun-2026
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डायलिसिस मरीज जागरूकता एवं अंगदान समारोह में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी आर पाटिल


डायलिसिस मरीज जागरूकता एवं अंगदान समारोह में  केंद्रीय जलशक्ति मंत्री व दिलीप देशमुख भाग लेते हुए


अहमदाबाद, 04 जून (हि.स.)। केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने कहा कि अंगदान और जल संरक्षण से देश में नई सामाजिक क्रांति आएगी। उन्होंने अंगदान और समाजसेवा के क्षेत्र में देशमुख के योगदान की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायी बताया।

केंद्रीय जलशक्ति मंत्री पाटिल गुजरात के अहमदाबाद स्थित साइंस सिटी के आर.के. रॉयल हॉल में गुरुवार को आयोजित डायलिसिस मरीज जागरूकता एवं अंगदान समारोह में बोल रहे थे। इस अवसर पर अंगदान के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले दिलीपभाई देशमुख (दादा), डॉ. सिद्धार्थ मावाणी, डॉ. महेश पाटिल, डॉ. धीरन शाह, मयूर दवे, डॉ. हितेश देसाई तथा डॉ. प्रदीप शाह सहित अनेक चिकित्सक और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

केन्द्रीय मंत्री पाटिल ने कहा कि एक सशक्त विचार से शुरू हुई यह मुहिम आज जनभागीदारी के बल पर एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले चुकी है।उन्होंने कहा कि वर्ष 2020 में लीवर प्रत्यारोपण के बाद नया जीवन प्राप्त करने वाले दिलीपभाई देशमुख ने अपना जीवन अंगदान जागरूकता और समाज कल्याण के लिए समर्पित कर दिया है। उनका जीवन समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में जल संरक्षण के लिए ऐतिहासिक निर्णय लिए गए हैं। गुजरात में नर्मदा का पानी साबरमती और कच्छ तक पहुंचाने का कार्य सफलतापूर्वक किया गया है। इसी तर्ज पर मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच केन-बेतवा नदी जोड़ परियोजना तथा राजस्थान की ईआरसीपी योजना पर भी कार्य चल रहा है।

उन्होंने बताया कि सितंबर 2024 से चलाए जा रहे ‘कैच द रेन’ जनआंदोलन के अंतर्गत देशभर में लगभग 1 करोड़ 55 लाख जल संरक्षण संरचनाएं बनाई गई हैं। इनमें से 1 करोड़ 45 लाख से अधिक संरचनाएं लोगों ने स्वयं जनभागीदारी से निर्मित की हैं, जो एक रिकॉर्ड है। उन्होंने कहा कि शहरों में प्रति व्यक्ति प्रतिदिन औसतन 125 लीटर पानी का उपयोग होता है। पानी प्राप्त करना हमारा अधिकार है, लेकिन उसका संरक्षण करना हमारा कर्तव्य है। कृषि क्षेत्र में जल की बचत के लिए सूक्ष्म सिंचाई और टपक सिंचाई पद्धति को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे कम पानी में अधिक उत्पादन संभव हो सके।

पाटिल ने कहा, “भूमिगत जल हमारी फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) की तरह है, जो आने वाली पीढ़ियों की धरोहर है। यदि हम मूलधन ही समाप्त कर देंगे तो भविष्य की पीढ़ियों के साथ अन्याय होगा।” उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में जल संरक्षण के लिए चल रहे व्यापक प्रयासों के कारण भारत भविष्य में जल संकट जैसी स्थिति का सामना नहीं करेगा। उन्होंने नागरिकों से केवल प्रशंसक बनने के बजाय अंगदान और जल संरक्षण के सक्रिय प्रचारक बनने का आह्वान किया।

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हिन्दुस्थान समाचार / यजुवेंद्र दुबे

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